मास्क थमाया, छाता दिया… दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी इंसानियत की अनकही कहानियां

सेंट्रल दिल्ली सोमवार को बैनरों से पटी हुई थी. हर तरफ युवाओं का सैलाब दिखाई दे रहा था. राजधानी के मुख्य इलाकों में जाने वाले हर बड़े रास्ते पर हजारों छात्र खड़े हुए थे. नीट पेपर लीक के विरोध में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की तरफ से बुलाए गए इस विशाल विरोध-प्रदर्शन का माहौल किसी आम राजनीतिक रैली जैसा नहीं, बल्कि किसी आने वाले तूफान की आहट जैसा लग रहा था.

एक पत्रकार के तौर पर, उस भीड़ के बीच जाने का अनुभव बहुत ही टेंशन भरा था. आंसू गैस के घने धुएं और नारों के शोर के बीच, असली कहानी किसी गुस्से की नहीं बल्कि शांत और उस मानवीय संवेदना की कहानी थी, जो इस विरोध के बीच सोचना भी मुश्किल था. टीवी कैमरों की नजर छात्रों के टकराव पर थी. इस विरोध के बीच मैंने संवेदना के तीन ऐसे पल देखे जो खबरों में दिखाए ही नहीं गए.

Advertisement – Scroll to continue

जंतर-मंतर पर इंसानी ढाल

सोमवार की सुबह जंतर-मंतर का नजारा कुछ अलग ही था. ये वो जगह है जो देश के बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शनों का ऐतिहासिक केंद्र रही है. वहां की हवा में तनाव साफ महसूस हो रहा था. वक्त जैसे-जैसे बीता तवान भी बढ़ता गया. कुछ उग्र गुटों का गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने हिंसक झड़प की और पुलिस बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचाया. इतना ही नहीं उन्होंने मेरे और अन्य मीडिया कर्मियों को लेकर अपना गुस्सा भी जताया.

PTI फोटो.

‘न्याय के लिए आए हैं, हिंसा के लिए नहीं

इससे पहले कि अफरा-तफरी बेकाबू हो जाती, भीड़ का ऐसा चेहरा देखने को मिला, जो आमतौर पर इस तरह के धरनों में देखने को नहीं मिलता है. जैसे ही तनाव बढ़े लगा तो प्रदर्शनकारी छात्रों के एक गुट ने तुरंत अपने साथियों को पीछे खींचकर टकराव को एक पल में शांत कर दिया. एक छात्र ने बुलंद आवाज में कहा, “हम यहां न्याय के लिए आए हैं, हिंसा के लिए नहीं,” और इस तरह तुरंत हालात शांत हो गए. उस तनावपूर्ण पल में ये देखने को मिला कि अपने गहरे गुस्से के बावजूद, यह पीढ़ी अपने मकसद के लिए अडिग रहती है. 

PTI फोटो.

आंसू गैस के बीच उम्मीद की किरण

दोपहर तक, विरोध का केंद्र रायसीना रोड की ओर बढ़ गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया. अपनी मांगों को लेकर छात्र नारेबाजी कर रहे थे. ये लोग  शिक्षा नीति में पूरी तरह बदलाव की मांग पर अड़े थे. हालात इतने बिगड़ने लगे कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस छोड़नी पड़ी. आंसू गैस के तीखे धुएं से आंखें खुद ही बंद होने लगीं और दम घुटने लगा. हालात ऐसे थे कि कैमरा चालू रखना भी मुश्किल होने लगा था. मैं खुद को बेबस महसूस करने लगी. इस दौरान सफेद धुएं के बीच से दो लड़कियां मेरे सामने आईं और बिना एक भी शब्द बोले उन्होंने मेरे हाथ में एक नया मास्क थमा दिया. इतना ही नहीं उन्होंने मेरी जलन वाली आंखों पर ठंडा और साफ पानी भी डाला. जहां बाकी सब खुद को पुलिस से बचाने के लिए दौड़ रहे थे, ऐसे में ये दो अनजान लड़कियां एक अनजान पत्रकार की मदद के लिए रुकी रहीं. रायसीना रोड की तपती सड़क पर इंसानियत धुएं से कहीं ज्यादा मजबूत साबित हुई.

PTI फोटो.

मॉनसून में मिली पनाह

विरोध प्रदर्शन में गुस्से के बीच आसमान भी कुछ अलग ही कहानी रच रहा था. दिल्ली में एक दम से तेज और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई. लेकिन ये प्रदर्शन नहीं रुका. मैंने भी अपना कैमरा चालू रखा. जब मैं बारिश में पूरी तरह भीग गई तो मैंने अपने कपड़ों से अपने कैमरे समेत अन्य सामान को भीगने से बचाने की कोशिश की. लेकिन मेरे कपड़े तो पहले से ही भीगे हुए थे. इस बीच एक यंग प्रदर्शनकारी लड़की मेरे सामने आई. उसकी उम्आर 25 के आसपास रही होगी. वह खुद भी पूरी तरह भीगी हुई थी. लेकिन इंसानियत दिखाते हुए उसने अपना छाता मेरी तरफ बढ़ा दिया. हालांकि मैंने लेने से मना भी किया. उसने मुस्कुराते हुए कुछ ऐसा कहा जो अब भी मेरे कानों में गूंज रहा है. वह बहुत ही सादगी से बोली, “आप दुनिया को हमारी कहानी बता रही हैं, इसकी जरूरत आपको मुझसे ज्यादा है.” हालांकि बाद में मैंने उसे बहुत ढूंढा लेकिन इतनी भीड़ में वह कहीं नहीं मिली. हलांकि उसका छाता वापस नहीं कर पाने के लिए मुझे अब तक बुरा लग रहा है. 

सीजेपी के बैनर तले छात्रों के विरोध प्रदर्शन और उनके गुस्से के बीच बैक ऑफ द कैमरा ये वो इंसानियत की कहानियां हैं जो शायद न तो आपको टीवी पर देखने को मिलेंगी और नहीं इसका जिक्र होगा. इंसानियत से भरी ये कहानियां मेरे दिल को छू गईं. ये कहना गलत नहीं होगा कि गुस्से के बीच इन युवाओं को उनका मकसद अच्छी तरह पता है. 

ये भी पढ़ें- सीजेपी प्रोटेस्ट LIVE: दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP का धरना आज भी जारी, कहा- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तो चाहिए

Prev Post
Next Post