पेपर लीक पर संग्राम: सरकार संसद में चर्चा को तैयार लेकिन विपक्ष ने फंसा दिया पेच.. क्या धुल जाएगा मॉनसून सत्र?
Raisina News Desk- जुलाई 22, 2026 10:52 PM IST

नई दिल्ली:
नीट पेपर लीक पर सड़क से संसद तक घिरी सरकार भले ही अब सदन में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हो गई हो लेकिन कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष की दो शर्तों ने उसकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं. विपक्ष ने साफ़ कर दिया है कि लोकसभा में चर्चा कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत और राज्यसभा में नियम 267 के तहत हो. इसके साथ ही विपक्ष चर्चा से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है.
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने जाहिर कर दिया है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से समझौता नहीं होगा. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कहा कि चर्चा से पहले मंत्री को पद से हटाया जाए. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रदर्शनकारी छात्र भी कर रहे हैं.
ऐसे में पहला सवाल तो यह है कि क्या सरकार विपक्ष की माँग के अनुरूप नियम के तहत चर्चा के लिए तैयार होगी ? जानकारों की मानें तो अब से पहले 2015 में लोकसभा में “ललित मोदी” के मुद्दे पर कार्यस्थगन प्रस्ताव और 2016 में नोटबंदी के मुद्दे पर राज्यसभा में नियम 267 के तहत चर्चा की मांग स्वीकार की गई थी. करीब दस सालों के बाद अगर सरकार “ चर्चा के नियम” वाली शर्त मानती है तो ये विपक्ष की मनोवैज्ञानिक जीत होगी. हालांकि नियम के पेंच से भी पहले का सवाल यह है कि क्या धर्मेंद्र प्रधान की छुट्टी होगी ?
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक सड़क पर छात्रों के जबरदस्त विरोध प्रदर्शन और संसद ने विपक्ष के आक्रामक तेवर से सरकार मानसून सत्र के दो दिन बाद पेपर लीक पर चर्चा के लिए जिस तरह तैयार हो गई है उससे साफ़ है कि वो बैकफुट पर है. ऐसे में कांग्रेस दबाव बरक़रार रखेगी. मंगलवार को राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस सांसद अचानक पीएम आवास के पास प्रदर्शन करने पहुंच गए. पार्टी ने अपने नेताओं को ऐसे ही औचक प्रदर्शनों के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं.
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक मांगें नहीं मानी गई तो तो संसद के अंदर और बाहर पार्टी अपने आक्रामक तेवर बरक़रार रखेगी. ऐसे में संभावना कम है कि मानसून सत्र के पहले हफ़्ते के बचे दो दिनों में भी संसद में कोई काम हो पाएगा?
देखना होगा कि सरकार दबाव में झुकती है या दूसरे हफ़्ते में कोई बीच का रास्ता निकलता है? अगर ऐसा नहीं होता तो फिर मानसून सत्र के पूरी तरह धुलने की संभावना ज़्यादा नज़र आ रही है.
ऐसे में परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष की आशंका का समाधान भी हो जाएगा. बीते कुछ हफ्तों में आम आदमी पार्टी, टीएमसी और शिव सेना के करीब 10 राज्यसभा और 26 लोकसभा सांसदों ने पाला बदला है. इसे सरकार की दो तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा था. डीएमके के इंडिया गठबंधन से दूर जाने के बाद कांग्रेस को इस सत्र में परिसीमन बिल के पास होने का डर सता रहा था.
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