सीजेपी ने सरकार से मनवा ली अपनी बात, अब क्या राजनीति करने उतरेगी कॉकरोच पार्टी?
Raisina News Desk- जुलाई 26, 2026 12:12 AM IST

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शनिवार को सरकार के साथ बैठक के बाद आंदोलन खत्म करने की घोषणा कर दी. सीजेपी ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है और उसके बाद केंद्र सरकार ने हमारी बाकी मांगें भी मान ली हैं, इसीलिए हम आंदोलन खत्म कर रहे हैं. इसके बाद जंतर-मंतर के धरना स्थल पर जश्न का माहौल दिखा. वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भविष्य में राजनीति में उतरने के सवाल पर भी सीजेपी के प्रवक्ता ने जवाब दिया.
सीजेपी ने कहा कि ये हमारा संगठन नीट पेपर लीक पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए था. हमने इस काम को सफलतापूर्वक किया. भविष्य में भी ऐसे प्रयास करेंगे, लेकिन ये क्या शक्ल लेगा, इस पर अभी कुछ नहीं कह सकते.
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वहीं NDTV को दिए एक इंटरव्यू में, CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास ने कहा, “भारत में किसी भी चीज़ के लिए कभी ‘ना’ मत कहिए,” हालांकि, पार्टी ने फिलहाल फुल-टाइम राजनीति में आने की किसी भी संभावना से इनकार किया है और कहा कि उनकी प्राथमिकता युवाओं के नेतृत्व वाले ज़मीनी स्तर के आंदोलन को मज़बूत करना है.
CJP प्रवक्ता आशुतोष रंका ने NDTV से कहा, “आंदोलन का सफल होना, मुझे लगता है कि हम सभी के लिए बहुत बड़ी बात है. यह गर्व का पल है. यह सच में खुश होने और राहत महसूस करने का पल है और इसके बाद, हम देखेंगे कि आगे क्या होता है.”
वहीं आंदोलन खत्म करने को लेकर सीजेपी ने कहा कि हमने सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन राउंड की बातचीत की. जंतर-मंतर पर हमारा प्रोटेस्ट, जो कई दिनों से चल रहा था, हमारी तीन मुख्य मांगें थीं: केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ फाइल किए गए सभी लीगल केस, एफआईआर वापस ली जाएं और प्रदर्शनकारियों या आयोजकों के खिलाफ भविष्य में कोई केस फाइल नहीं किया जाए.
उन्होंने कहा कि हमारी मांग थी कि नीट पेपर न होने के बाद जिन परिवारों ने अपनों को खो दिया, उन्हें 1 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए. धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है. इसका मतलब है कि हमारी पहली डिमांड मान ली गई है. हमारी दूसरी मांग थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर, सिर्फ दिल्ली में ही नहीं बल्कि सभी भाजपा शासित और भाजपा सहयोगी राज्यों में, वापस ली जाएं. सरकार ने वह मांग भी मान ली है. जल्द ही एफआईआर वापस ले ली जाएंगी.
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, “कॉकरोच जनता पार्टी यह ऐलान करती है कि हम अच्छी नीयत से आंदोलन वापस ले रहे हैं, इस समझ के साथ कि तय शर्तों को तय टाइमलाइन के अंदर पूरा किया जाएगा.”
गौरतलब है कि सीजेपी कोई ऑन ग्राउंड पार्टी नहीं है. चीफ जस्टिस के एक कथित टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर एक मूवमेंट सा चल पड़ा और करोड़ों युवा अपनी मर्जी के इससे जुड़ते गए. फिर पेपर लीक की घटना पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन शुरू हुआ और लोगों के जुड़ने के साथ-साथ ये और बड़ा होता गया. ये एक तरह से फेसलेस आंदोलन था. लोग किसी पार्टी के आह्वान पर नहीं जुटे थे. देशभर में इसे जबरदस्त जनसमर्थन मिला.
हालांकि कॉकरोच जनता पार्टी अगर चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त किसी दल का शक्ल लेती है तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा. क्योंकि ये पहला मामला नहीं होगा, जब जंतर-मंतर पर आंदोलन के बाद कोई पार्टी बन गई हो. 2011 में जनलोकपाल की मांग को लेकर हुए अन्ना आंदोलन के बाद उसका प्रमुख चेहरा रहे अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनाई और तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने. आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के बाद पंजाब में भी सरकार बनाई और 10 साल में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा भी हासिल कर लिया.
तमिलनाडु में एक्टर विजय ने भी ऐसा उदाहरण पेश किया है. उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) ने पहली ही बार विधानसभा चुनाव लड़कर 108 सीटें जीतीं और सरकार बनाई. उन्होंने इससे पहले कई सालों तक प्रदेश में घूम-घूमकर लोगों को जागरूक किया, आंदोलन किए, जनसभा कर लोगों से संपर्क साधा और अपनी विचारधारा रखी. खासकर युवाओं में अपनी पैठ बनाई. विजय ने सरकार बनने के बाद AI मंत्रालय, AI यूनिवर्सिटी और AI सिटी बनाने का वादा किया. इसके अलावा 5 लाख सरकारी नौकरियां और उच्च शिक्षा के लिए 20 लाख रुपये तक के एजुकेशन लोन जैसे वादे किए. विजय के इन वादों ने उन्हें युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय बना दिया. इसका असर चुनावी नतीजों में देखने को मिला और वो सीएम की कुर्सी तक पहुंचे.
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