दो साल पहले भी परीक्षा में सुधार के लिए बनी थी कमेटी, मिले थे कई सुझाव; क्या हुआ उनका?
Raisina News Desk- जुलाई 27, 2026 12:11 AM IST

नई दिल्ली:
पेपर लीक और एग्जाम रिफॉर्म को लेकर केंद्र सरकार ने एक हाई पावर्ड टास्क फोर्स बना दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक वीडियो जारी कर बताया है कि टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणी की अगुवाई में हाई पावर्ड टास्क फोर्स बनाने का फैसला लिया गया है, जो एग्जाम रिफॉर्म पर काम करेगी.
पीएम मोदी ने रविवार को 1 मिनट 20 सेकंड का एक वीडियो जारी किया और कहा कि अब हमें भविष्य के लिए सोचना है. उन्होंने कहा कि हमारी परीक्षा पद्धति ट्रांसपेरेंट हो और टेक्नोलॉजी का उपयोग हो, इसलिए टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में हाई पावर्ड टास्क फोर्स बनाने का फैसला लिया है. उन्होंने बताया कि यह टास्क फोर्स एग्जाम रिफॉर्म पर फोकस करेगी.
हालांकि, इससे पहले 2024 में भी NEET पेपर लीक होने के आरोपों के बाद सरकार ने ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की अगुवाई में एक कमेटी बनाई थी. इस कमेटी ने पेपर लीक रोकने और एग्जाम प्रक्रिया में सुधार के लिए 101 सिफारिशें दी थीं, लेकिन अब तक इन्हें लागू नहीं किया गया है.
24 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से पूछा है कि राधाकृष्णन कमेटी ने जो सिफारिशें दी थीं, उन्हें लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं. इस पर, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों से आगे बढ़कर काम कर रही है.
5 मई 2024 को NEET-UG की परीक्षा हुई थी, लेकिन इसके भी लीक हो जाने का मामला सामने आया था. कई छात्रों को 720 में से 718 या 719 नंबर मिले थे. वहीं, 67 छात्र ऐसे थे जिन्हें 720 से पूरे 720 नंबर आए थे.
इसके बाद 23 जून 2024 को उन 1,563 छात्रों का री-एग्जाम हुआ, जिन्हें ग्रेस मार्क्स मिले थे. NTA ने दावा किया था कि इन्हें ग्रेस मार्क्स इसलिए दिए गए थे, क्योंकि एग्जाम में कुछ छात्रों का ‘समय का नुकसान’ हुआ था. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, जबकि बिहार और कई राज्यों में पेपर लीक के आरोपों की जांच CBI को सौंप दी गई थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने री-एग्जाम करवाने से इनकार कर दिया था.
इसी बीच, 22 जून 2024 को इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की अगुवाई में एक हाई लेवल एक्सपर्ट कमेटी (HLCE) बनाई गई. 21 अक्टूबर 2024 को कमेटी ने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी थी.
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राधाकृष्णन कमेटी ने 101 सिफारिशें की थीं. कमेटी ने एग्जाम करवाने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बड़े बदलाव करने की सिफारिश की थी. कमेटी की 5 बड़ी सिफारिशें ये थीं:-
1. ऑनलाइन टेस्टिंग: कमेटी ने ऑनलाइन टेस्टिंग का सुझाव दिया था. जिन मामलों में पूरी तरह ऑनलाइन टेस्ट संभव नहीं है, वहां समिति ने हाइब्रिड मॉडल की सिफारिश की थी. इसके तहत क्वेश्चन पेपर को डिजिटली एग्जाम सेंटर तक पहुंचाया जाए. इस मॉडल में प्रिंटिंग प्रेस, स्ट्रॉन्ग-रूम में स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए पेपर लीक का खतरा कम हो जाता है.
2. मल्टी-स्टेज एग्जाम: जिस तरह से JEE की परीक्षा होती है, वैसे ही NEET-UG का एग्जाम भी मल्टी-स्टेज में करवाया जाना चाहिए. पहला चरण एक स्क्रीनिंग परीक्षा के तौर पर काम करेगा, जबकि दूसरा राउंड उन लोगों के लिए होगा जो पहले चरण में पास होते हैं. समिति का कहना था कि इससे एग्जाम सेंटर पर लॉजिस्टिक का बोझ कम होगा और छात्रों के चयन में सटीकता भी बेहतर होगी.
3. अपना नेटवर्क तैयार करना: कमेटी ने सिफारिश की थी कि केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों और विश्वविद्यालयों जैसे संस्थानों में कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) के लिए 400-500 केंद्रों का एक नेशनल नेटवर्क बनाया जाना चाहिए. इससे एक सत्र में 2 से 2.5 लाख छात्र एक बार में परीक्षा दे सकें.
4. ज्यादा स्थायी पद: कमेटी ने NTA में कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए कर्मचारियों पर ज्यादा निर्भरता को एक बड़ी कमजोरी माना था. कमेटी ने स्थायी पदों की संख्या बढ़ाने की सिफारिश की थी, क्योंकि एग्जाम और डेटा सिक्योरिटी के लिए स्थायी कर्मचारी जरूरी हैं.
5. सरकार का ज्यादा कंट्रोल: कमेटी ने सुझाव दिया था कि NTA अपने और ज्यादा एग्जाम सेंटर बनाए. थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडर पर निर्भरता कर करे. कमेटी ने प्राइवेट सेंटर का इस्तेमाल न करने की सलाह दी थी, क्योंकि उन पर पूरी तरह से नजर रखना मुश्किल हो सकता है. समिति ने कहा था कि एग्जाम सरकारी संस्थानों में कराई जाए, जहां निगरानी ज्यादा मजबूत होती है.
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राधाकृष्णन कमेटी की रिपोर्ट आए डेढ़ साल से ज्यादा हो गया है. रिपोर्ट के बाद दो बार NEET एग्जाम हो चुके हैं लेकिन अब तक सिफारिशों को लागू नहीं किया जा सका है.
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा था कि ह्यूमन हैंडलिंग जितना कम होगा, पेपर लीक होने का खतरा उतना कम होगा. कमेटी ने प्राइवेट वेंडर पर भी निर्भरता कम करने की सलाह दी थी. इसके अलावा मल्टी स्टेज एग्जाम करवाने का सुझाव भी दिया था. हालांकि, अब तक ऐसा नहीं हो पाया.
सरकार का कहना है कि अगले साल NEET की परीक्षा पूरी तरह से कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) पर करवाई जाएगी.
कमेटी के मेंबर रहे पंकज बंसल ने मई में NDTV से कहा था कि सभी सिफारिशों को लागू करना NTA के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा था कि CBT से 95% समस्याएं खत्म हो जानी चाहिए. उन्होंने तर्क दिया था कि मौजूदा सिस्टम में सबसे बड़ी कमजोरियां फिजिकल पेपर को संभालने और उसे लाने-ले जाने से जुड़ी हैं.
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