सड़क की लड़ाई खत्म, संसद में थमेगा संग्राम! सबसे सख्त 'एंटी-पेपर लीक बिल' पर सरकार को मिलेगा सबका साथ?

नई दिल्ली:

संसद के मॉनसून सत्र का पहला हफ्ता तो विरोध प्रदर्शन और हंगामे में ही गुजर गया. अब सोमवार से दूसरा हफ्ता शुरू हो रहा है. दूसरे हफ्ते का पहला दिन तो बहुत खास है, क्योंकि सोमवार को ही केंद्र सरकार पेपर लीक के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा बिल पेश करने जा रही है. इस बिल में पेपर लीक करने वालों को सख्त से सख्त सजा का प्रावधान किया गया है.

वहीं, विपक्ष भी अपनी जिद पर अड़ा है. विपक्ष का कहना है कि वह छात्रों पर पुलिस की कथित ज्यादती का मुद्दा संसद में उठाएगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग करेगा. 

न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि संसद भवन में सोमवार सुबह राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कैबिन में ‘INDIA’ ब्लॉक की बैठक होगी. इस बैठक में संसद में विपक्ष एंटी-पेपर लीक कानून में संशोधन से जुड़े बिल को लेकर रणनीति बनाएगा. इसी बैठक में तय होगा कि इस बिल पर विपक्ष को क्या रुख अपनाना है.

सरकार का क्या है एजेंडा?

पेपर लीक के खिलाफ दो साल पहले आए कानून में अब संशोधन किया जा रहा है, ताकि इस कानून को और सख्त बनाया जा सके. संशोधित बिल को सोमवार को पेश किया जाएगा. केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इसे पेश करेंगे.

सोमवार को लोकसभा में पेश किए जाने वाले ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ में हर राज्य में पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का प्रस्ताव है.

इस बिल में पेपर लीक या अनुचित साधनों का प्रयोग करने वालों को कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. संगठित अपराधों के लिए बिल में कम से कम 7 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.

मौजूदा कानून में व्यक्तिगत रूप से शामिल लोगों के लिए 3 से 5 साल तक की कैद का प्रावधान है, जबकि संगठित रूप से धोखाधड़ी और पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए 5 से 10 साल तक की कैद और कम से कम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है.

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क्या विपक्ष का मिलेगा साथ?

यह बिल सोमवार को लोकसभा में पेश करने, उस पर विचार करने और पास करने के लिए लिस्ट किया गया है. आमतौर पर किसी बिल को एक ही दिन पेश करने और पास करने के लिए लिस्टेड नहीं किया जाता है. इसका मतलब हुआ कि सरकार सोमवार को ही इस बिल को संसद से पास कराने की तैयारी कर रही है.

हालांकि, नए बिल पर विपक्ष का रुख अब तक साफ नहीं है. यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस प्रस्तावित कानून का समर्थन करेगी? राहुल गांधी ने शनिवार को कहा था कि पार्टी अकेले इस पर फैसला नहीं ले सकती और फैसला विपक्षी दलों की सहमति के आधार पर होगा.

उन्होंने कहा था, ‘कांग्रेस पार्टी का एक मूल सिद्धांत है. हम विपक्षी दलों की बैठक में इस पर फैसला करेंगे और फैसला विपक्ष की सहमति के आधार पर लिया जाएगा. संसद में यही हमारा अनुशासन और काम करने का तरीका है.’

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राहुल गांधी ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक चिट्ठी लिखी है. राहुल गांधी ने शाह को पत्र लिखकर दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित ‘बर्बर हमले’ की जवाबदेही तय करने की मांग की है.

गांधी ने शाह से सवाल किया कि क्या छात्रों के खिलाफ ‘पैलेट गन’ समेत ‘‘घातक हथियारों” के इस्तेमाल की अनुमति उन्होंने दी थी? उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान सैकड़ों छात्र घायल हुए और दावा किया कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिसकर्मियों ने मारपीट की.

उन्होंने पत्र में कहा, ‘मीडिया और सोशल मीडिया पर आई खबरों से साफ है कि एक पत्रकार समेत कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. मैं 19 साल के छात्र साहिल लोचाब से मिला जो इस समय पीड़ा में है और ‘पैलेट गन’ का छर्रा लगने के कारण उसकी एक आंख की रोशनी तक जाने का खतरा है.’

उन्होंने यह सवाल भी किया कि प्रदर्शनकारी छात्रों को लाठियों से पीटते दिखाई दे रहे सादे कपड़ों में मौजूद लोग पुलिसकर्मी थे या स्वयंसेवक? गांधी ने पत्र में कहा, ‘किसी भी लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार अत्यंत महत्वपूर्ण है. प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा करना और संवाद के माध्यम से उनके मुद्दों का समाधान करना सरकार का कर्तव्य है.’

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प्रधानमंत्री से माफी मांगने की मांग

कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों की जीत बताया है और कहा है कि प्रधानमंत्री को भी छात्रों से माफी मांगनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री की बारी है कि वह माफी मांगें और आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ लाठियों, डंडों और ‘पैलेट गन’ का इस्तेमाल करने वाले सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कथित ज्यादती के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग दोहराते हुए कहा, ‘यह अंत नहीं है. हमें प्रधानमंत्री से माफी मांगे जाने का अब भी इंतजार है.’

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रविवार को प्रधानमंत्री मोदी से नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के लिए माफी मांगने की मांग की और कहा कि यह मुद्दा 27 जुलाई को संसद में उठाया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की बेरहमी से पिटाई की गई और इस घटना पर प्रधानमंत्री की चुप्पी ‘बेहद शर्मनाक’ है.

वहीं, तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने सोमवार को राज्यसभा में दिनभर के कामकाज को स्थगित करने की मांग करते हुए नियम 267 के तहत नोटिस दिया है, ताकि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती के मामले पर तत्काल चर्चा हो सके.

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हंगामे-प्रदर्शन में गुजर गया पहला हफ्ता

संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था. 20 जुलाई को ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में ‘संसद मार्च’ निकाला गया था. इस दौरान हिंसा और झड़प भी देखने को मिली थी. प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े थे और लाठीचार्ज करना पड़ा था.

नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का मुद्दा संसद में भी उठा था. इस कारण संसद की कार्यवाही भी सही से चल नहीं पाई थी और बार-बार इसे स्थगित करना पड़ा था. 

हालांकि, शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद और सारी मांगें मान लिए जाने के बाद जंतर-मंतर पर तो 36 दिन से चल रहा विरोध प्रदर्शन खत्म हो गया है. लेकिन संसद में अभी भी हंगामा खत्म होने की संभावना नहीं है. 

बहरहाल, अगर सरकार और विपक्ष संसद के दोनों सदनों में जारी गतिरोध खत्म करने में कामयाब होते हैं तो पेपर लीक के मुद्दे पर तीखी बहस होने की संभावना है.

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