मोदी से मिल रहे बादल, राहुल अमरिंदर के कायल, पंजाब की सियासत में गजब हलचल
Raisina News Desk- अगस्त 08, 2026 07:25 AM IST

अगले साल पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सभी दलों ने अपने अपने ढंग से कमर कसनी शुरू कर दी है. राहुल गांधी एक वीडियो में कांग्रेस छोड़ गए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को हैलो अंकल कह रहे हैं और उन्हें कूल बता रहे हैं. इससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई. राहुल गांधी के इस वीडियो के कई राजनीतिक मतलब लगाए जा रहे हैं. इसके पहले भी कैप्टन अमरिंदर राहुल गांधी की तारीफ कर चुके हैं कि राहुल गांधी उनसे संपर्क में रहते हैं और उन्हें फोन पर मैसेज भी भेजते हैं. अब राहुल गांधी के कैप्टन को अंकल और कूल कहने को इस रूप में देखा जा रहा है कि क्या राहुल गांधी पंजाब कांग्रेस के नेताओं को कुछ संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं. क्या राहुल गांधी बंटी हुई पंजाब कांग्रेस को कुछ इशारा कर रहे हैं कि सब एक हो जाइए, वरना मेरे पास प्लान बी भी है.
दूसरी तरफ पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी से निपटने की कोशिश लगी है, मगर यह खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है. पंजाब कांग्रेस नेताओं का झगड़ा अब मीटिंग में भी दिखने लगा. जहां चन्नी और राजा वाडिंग समर्थक आपस में भिड़ जाते हैं. वहीं एक जगह तो पंजाब के कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल को जनरल डायर के रूप में दिखाते हुए पोस्टर लगा दिए. इन सब रिपोर्टों के बाद कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने चरणजीत सिंह चन्नी से मुलाकात की है.
वैसे कांग्रेस आलाकमान को पंजाब में पार्टी में जो कुछ हो रहा है, उस पर कुछ कड़े कदम उठाने होंगे. मगर कांग्रेस नेतृत्व के सामने दिक्कत ये है कि चरणजीत सिंह चन्नी, सुखविंदर सिंह रंधावा और अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग तीनों सांसद हैं और तीनों मुख्यमंत्री बनने का सपना पाले हैं और तीनों इस चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा बनना चाहते हैं. मगर इसके लिए कांग्रेस आलाकमान तैयार नहीं है.
दूसरी तरह पंजाब की राजनीति को लेकर एक बड़ा अपडेट बीजेपी में भी है. शुक्रवार को संसद भवन में अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात प्रधानमंत्री से हुई है. आधिकारिक रूप से पंजाब में कानून व्यवस्था पर बात हुई है, ऐसा बताया गया है. मगर इस मुलाकात को पंजाब में अकाली और बीजेपी को साथ आने के रूप में देखा जा रहा है.
यहीं पर बीजेपी की दुविधा है. वह पंजाब में अपने बल पर पार्टी खड़ी करना चाहती है और हर जिले में वो ड्रग्स के खिलाफ आंदोलन करने जा रही है. ऐसे में अकाली दल के साथ जाना कितना उचित होगा. इस पर बीजेपी को विचार करना होगा. वैसे बीजेपी और अकाली दल को नेचुरल सहयोगी माना जाता रहा है, क्योंकि शहर में बीजेपी और गांवों में अकाली मजबूत मानी जाती रही है.
मगर किसान आंदोलन के बाद अकाली दल की पंजाब में पकड़ कमजोर हुई है. इसका असर लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिला. जहां कांग्रेस के 7 सांसद, आम आदमी पार्टी के 3 और अकाली दल के पास केवल एक सांसद हैं. अब बीजेपी को यह तय करना है कि उसे अकाली दल के साथ जाना है या नहीं, इसलिए प्रधानमंत्री और सुखबीर बादल की बैठक को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. कुल मिलाकर पंजाब को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी अपनी रणनीति बनाने में जुट गई है और आने वाले दिनों में यह और भी गरमाने वाली है.
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