बेंच को क्यों नहीं बताया? केस हटाने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, जजों ने रजिस्ट्री को लगाई फटकार

बेंच को क्यों नहीं बताया? केस हटाने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, जजों ने रजिस्ट्री को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट Image Credit source: PTI (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने CAPF से जुड़े एक केस की लिस्टिंग को लेकर गहरी नाराजगी जताई. कोर्ट ने रजिस्ट्री के अजीब व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई. जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल चन्दुरकर की रेगुलर बेंच के सामने होने वाले इस केस को अचानक लिस्ट से हटा दिया गया. सबसे हैरानी की बात यह है कि मामले की सुनवाई के लिए तय बेंच को इस बदलाव के बारे में बताया तक नहीं गया.

इसके अलावा, सरकारी वकील के उस तरीके पर भी गंभीर सवाल उठाए गए, जिसमें उन्होंने दूसरी पार्टी को बताए बिना सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के सामने मामला उठाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बेंच बदलने का इस तरह का पिछले दरवाजे वाला तरीका सिस्टम की पारदर्शिता पर सीधा शक पैदा करता है. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि मामले को स्पेशल बेंच में भेजने से पहले ओरिजिनल बेंच को क्यों नहीं बताया गया?

सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री से मांगी थी सफाई

इस मामले की सुनवाई बुधवार को जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की स्पेशल बेंच ने की. शुरुआत में इसे जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अतुल चन्दुरकर की बेंच के सामने लिस्ट किया गया था, लेकिन सुनवाई शुरू होने से ठीक पहले इसे अचानक लिस्ट से हटा दिया गया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री से इस बारे में सफाई मांगी थी. बाद में, सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर एक नोटिस आया, जिसमें बताया गया कि मामले को एक स्पेशल बेंच को ट्रांसफर कर दिया गया है.

कानून की वैधता को चुनौती

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुयान वाली यह स्पेशल बेंच उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जो उस कानून की वैधता को चुनौती देती हैं जिसका असर अवमानना ​​मामले पर पड़ सकता है. जब बुधवार को यह मामला स्पेशल बेंच के सामने आया, तो कोर्ट ने रजिस्ट्री की तरफ से दी गई सफाई पर ध्यान दिया.

15 अक्टूबर को होगी सुनवाई

उनके मुताबिक, मामले को जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अतुल चन्दुरकर की बेंच से अचानक इसलिए हटाया गया था, क्योंकि सरकारी वकील ने पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से कहा था कि इस मामले को उस स्पेशल बेंच के सामने लिस्ट किया जाना चाहिए जो उसी विषय पर कानून की वैधता की जांच कर रही है. आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना ​​मामले की सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर की तारीख तय की, साथ ही उस याचिका पर भी सुनवाई होगी जो संबंधित कानून की वैधता को चुनौती देती है.

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