गोंडा के युवा किसान प्रिंस जैविक खाद और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कर रहे गन्ने की खेती, कम लागत में बंपर पैदावार

गोंडा के युवा किसान प्रिंस जैविक खाद और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कर रहे गन्ने की खेती, कम लागत में बंपर पैदावार

गोंडा जिले के विकासखंड झंझरी की ग्राम सभा केशवपुर पहाड़वा में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ जैविक तरीकों और नई तकनीकों को अपनाकर बेहतर पैदावार हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. इसी कड़ी में एक युवक जैविक खाद और आधुनिक तकनीकों की मदद से गन्ने की खेती कर रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि इस तरीके से गन्ने की अच्छी पैदावार होगी और खेती की लागत कम करने में भी मदद मिलेगी. किसान प्रिंस सिंह ने बताया कि गन्ने की अच्छी पैदावार के लिए खेत की मिट्टी का उपजाऊ होना जरूरी है. जैविक खेती में गोबर की सड़ी खाद और अन्य जैविक खादों का इस्तेमाल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है.

गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड झंझरी की ग्राम सभा केशवपुर पहाड़वा में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ जैविक तरीकों और नई तकनीकों को अपनाकर बेहतर पैदावार हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. इसी कड़ी में एक युवक जैविक खाद और आधुनिक तकनीकों की मदद से गन्ने की खेती कर रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि इस तरीके से गन्ने की अच्छी पैदावार होगी और खेती की लागत कम करने में भी मदद मिलेगी.

जैविक तरीके से कर रहे गन्ने की खेती

लोकल 18 से बातचीत के दौरान प्रगतिशील किसान प्रिंस सिंह ने बताया कि गन्ने की अच्छी पैदावार के लिए खेत की मिट्टी का उपजाऊ होना जरूरी है. जैविक खेती में गोबर की सड़ी खाद और अन्य जैविक खादों का इस्तेमाल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है. इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और उसकी उर्वरता बनाए रखने में सहायता मिलती है. उन्होंने बताया कि वह अपने गन्ने के खेत में वर्मी कंपोस्ट और गोबर की खाद का इस्तेमाल करते हैं. इसके साथ ही उन्होंने लेजर विधि से गन्ने की बुवाई की है. वह लगभग पांच बीघा जमीन में गन्ने की खेती कर रहे हैं, जिसमें करीब 20 से 25 हजार रुपये की लागत आई है. उन्हें उम्मीद है कि प्रति बीघा लगभग 80 से 90 क्विंटल गन्ने की पैदावार होगी.

लगाते हैं गन्ने की खेती

प्रिंस सिंह ने बताया कि वह पिछले तीन साल से जैविक खेती कर रहे हैं. गन्ने के अलावा वह दूसरी फसलों की खेती में भी जैविक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. उनका मानना है कि जैविक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है. प्रिंस सिंह ने बताया कि वह अपने खेत में 16201 और 14201 किस्म के गन्ने की खेती कर रहे हैं. उनके अनुसार, ये दोनों किस्में गोंडा के वातावरण के लिए अच्छी मानी जाती हैं. इन किस्मों के गन्ने की लंबाई लगभग 10 से 12 फीट तक हो सकती है. उन्हें उम्मीद है कि जैविक खाद और नई तकनीक के इस्तेमाल से गन्ने की अच्छी पैदावार मिलेगी और खेती से बेहतर आमदनी हो सकेगी.

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