अगस्त में ही क्यों रूठा मॉनसून, अल नीनो के असर क्या सितंबर में भी बारिश का सूखा, जानें यूपी-दिल्ली से बिहार-झारखंड तक मौसम का हाल

नई दिल्ली:

जून और जुलाई में केरल से लेकर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक भारी मॉनसून बारिश देखने को मिली. लेकिन अगस्त के दूसरे हफ्ते से ही मॉनसून सुस्त पड़ने लगा है. दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद से लेकर मध्य भारत और राजस्थान, पंजाब, हरियाणा के इलाकों में बस कुछ दिन ही तेज बारिश देखने को मिली है. बादल तो छा रहे हैं, लेकिन बूंदें नहीं गिर रहीं. दरअसल, मॉनसून को कमजोर करने वाला अल नीनो नवंबर की बजाय अगस्त में ही शक्तिशाली हो गया है. भारत में मॉनसून को मदद देने वाला इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) भी कमजोर पड़ रहा है और अगस्त के दूसरे हफ्ते में न्यूट्रल लेवल में पहुंच गया है. वहीं प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Nino) बेहद सक्रिय होते हुए बारिश की उम्मीदों पर पानी फेर रहा है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आगे बारिश की संभावना बेहद कमजोर है.

1. मॉनसून क्यों कमजोर पड़ रहा?

हिंद महासागर में पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल के हालात बनते हैं तो प्रशांत महासागर के अल नीनो के असर को धीमा कर देता है. इससे भारतीय उपमहाद्वीप में अच्छी मॉनसून बारिश होने के आसार बनते हैं. लेकिन नए ओशन मॉनिटरिंग डेटा बताता है कि IOD इंडेक्स गिरकर (+0.18°C) रह गया है. इससे मॉनसून के बाकी बचे हफ्तों में IOD के सक्रिय होने की संभावनाएं कम ही बन रही हैं. 

2. अल नीनो सुपर एक्टिव मोड में

प्रशांत महासागर के मौसमी संकेतों को मानें तो अल नीनो सुपर एक्टिव मोड में पहुंच चुका है. अल नीनो 2015-16 के बाद सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच चुका है, जो मॉनसून की धार और रफ्तार को कुंद कर रहा है. आमतौर पर अल नीनो नवंबर या दिसंबर में चरम पर पहुंच सकता है. लेकिन इस बार अगस्त में ही इसका टेंपरेचर असामान्य लेवल पर है. आने वाले महीनों में अल नीनो और ज्यादा गर्म हो सकता है.

3. देश में बारिश का अलग-अलग असर

देश भर में पिछले ढाई महीनों में मौसमी बारिश सामान्य औसत से लगभग 13% कम रही है. बंगाल की खाड़ी से उठ रहे कम दबाव के कारण ओडिशा, बंगाल, बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून सक्रिय बना है और बारिश हो रही है. जबकि देश के उत्तर पश्चिमी और मध्य हिस्सों में लंबे समय से बारिश का सूखा है. 

4. सितंबर में क्या होगी बारिश

मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि मॉनसून के दूसरे चरण में अल नीनो के इतने शक्तिशाली होने और IOD कमजोर होने के उदाहरण कम ही मिलते हैं. ऐसे में मॉनसून में सितंबर का महीना खेती और जल संसाधनों के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित होगा. बंगाल की खाड़ी में नए मौसमी बदलाव मदद मॉनसून के अनुकूल नहीं हुए तो कई राज्यों में सूखे की स्थिति के साथ खेती और जल संकट की स्थिति गंभीर हो सकती है.

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मॉनसून दूसरे चरण में कमजोर पड़ेगा

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान की मानें तो दक्षिण पश्चिम मॉनसून के दूसरे चरण अगस्त से सितंबर में देश भर में सामान्य से कम (Below Normal) बारिश होने की संभावना जताई गई है. अगस्त और सितंबर के दौरान सामान्य के मुकाबले 94% से कम बारिश का अनुमान है. निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर ने तो सितंबर में बारिश घटाकर औसत के 89% तक कर दिया है. प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति लगातार मजबूत होने से मॉनसूनी हवाएं कमजोर पड़ रही हैं.

कहीं भारी बारिश कहीं सूखा

देश भर में बारिश का स्तर भी अलग-अलग है. पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र के कुछ हिस्से में मौसम शुष्क होने के साथ और बारिश के बीच लंबे समय तक अंतराल देखने को मिल रहा है. इससे फसलों और नदी-तालाब जैसे जलाशयों के जलस्तर पर असर पड़ सकता है. हालांकि बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बंगाल की खाड़ी से बनने वाले कम दबाव से अगस्त के बाकी बचे दिनों में अच्छी बारिश होगी.

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