अनशन कर रहे अभिजीत दीपके पर फेंकी गई स्याही, जंतर-मंतर पर हंगामा
Raisina News Desk- जुलाई 18, 2026 02:19 PM IST

नई दिल्ली:
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर आज यानी 18 जुलाई को लगातार हंगामा होता दिख रहा है. अब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके पर हमले का मामला सामने आया है. एक महिला ने अभिजीत दिपके पर स्याही फेंकी. दिल्ली पुलिस ने अब उस महिला को हिरासत में ले लिया है. सीजेपी ने दावा किया है कि ये बीजेपी द्वारा भेजे गए गुंडे थे. जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी का प्रोटेस्ट चल रहा है.
अभिजीत दीपके पर हमले से पहले, NEET पेपर लीक मुद्दे पर भूख हड़ताल कर रहे शिक्षाविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन की जगह से हटा दिया गया. दिल्ली पुलिस उन्हें सुबह-सुबह अस्पताल ले गई और प्रदर्शनकारियों से जगह खाली करने को कहा. सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद अभिजीत दीपके ने भूख हड़ताल का ऐलान किया. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “”मैं अभी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर रहा हू.”
I am starting an indefinite hunger strike beginning right now.
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) July 18, 2026
सोनम वांगचुक और उनके समर्थक करीब 20 दिनों से ज्यादा वक्त से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और अनशन पर बैठे थे. वे भारत के टॉप मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन लेने की चाहत रखने वाले लाखों छात्रों की मुश्किलों की ओर ध्यान खींचने की कोशिश कर रहे थे.
पिछले दिनों दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि वह सोनम वांगचुक की जान बचाने के लिए ‘हर संभव कदम’ उठाए. पुलिस की यह कार्रवाई डॉक्टरों द्वारा उनकी हालत को इमरजेंसी बताने और उनके ऑर्गन्स फेल होने के डर के एक दिन बाद हुई.
जंतर-मंतर पर वांगचुक की हंगर स्ट्राइक के बाद क्या-क्या हुआ?
28 जून: सोनम वांगचुक ने शिक्षा और लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर जंतर-मंतर पर अपनी भूख हड़ताल शुरू की. सैकड़ों समर्थक उनके साथ शामिल हुए, जिनमें ज्यादातर छात्र थे.
29 जून: शुरुआत में यह विरोध प्रदर्शन छात्रों का एक स्थानीय मुद्दा बना रहा और इसमें भीड़ भी कम थी. वांगचुक ने राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षा प्रणालियों में पारदर्शिता और जवाबदेही की अपनी मांगों को बताने के लिए वीडियो संदेशों का इस्तेमाल किया.
3 जुलाई: वांगचुक ने लद्दाख से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन कहा कि वह अपनी भूख हड़ताल से पीछे नहीं हटेंगे, जो मुख्य रूप से शिक्षा में जवाबदेही के बड़े मुद्दे पर थी.
4 जुलाई: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के सातवें दिन सीजेपी ने उनकी स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताजनक जानकारी जारी की. दिल्ली की भीषण गर्मी के कारण वह कमजोर और थके हुए लग रहे थे.
5 जुलाई: आठवें दिन, उनका वजन 6 किलो घटकर करीब 60 किलो रह गया. वीडियो में उन्हें खड़े होने में संघर्ष करते हुए देखा गया. उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट किया, “जिंदा तो हूं, पर ठीक नहीं हूं,” और बताया कि उस दिन करीब 7,000 लोग उनके विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए.
6 जुलाई: उनका कुल वजन करीब 7 किलो कम हो गया और ब्लड ग्लूकोज का स्तर गिरकर 72 हो गया.
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11 जुलाई: वांगचुक की सेहत लगातार बिगडती गई, जबकि सियासी चर्चा तेज हो गई और नेता उनके विरोध स्थल पर पहुंचने लगे.
15 जुलाई: दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें उनके स्वास्थ्य की निगरानी और वांगचुक को जबरदस्ती खाना खिलाने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई. कोर्ट ने अगले दिन याचिका पर सुनवाई करने का फैसला किया. तब तक उनका वजन 8 किलो से ज्यादा कम हो चुका था.
16 जुलाई: वांगचुक के विरोध प्रदर्शन का 19वां दिन था. दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि उनकी जान बचाने के लिए जो भी जरूरी हो, वह करे. कोर्ट ने उनकी मेडिकल स्थिति की निगरानी के लिए देखरेख की कमी पर भी सवाल उठाए. समाज के अलग-अलग वर्गों से उन्हें लगातार समर्थन मिल रहा था.
17 जुलाई: अपने उपवास के 20वें दिन, वांगचुक ने कहा कि वह सोमवार तक किसी भी कीमत पर जिंदा रहेंगे, जब संसद का मॉनसून सत्र फिर से शुरू होगा. उन्होंने अपनी मांगों को मनवाने के लिए संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया. हालांकि, दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अभी तक कॉकरोच जनता पार्टी ने अभी तक संसद मार्च के लिए अनुमति नहीं मांगी है.
18 जुलाई: दिल्ली पुलिस तड़के जंतर-मंतर पहुंची और वांगचुक को ‘जरूरी मेडिकल देखभाल’ के लिए अस्पताल ले गई. इसके साथ ही, प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर खाली करने को कहा गया.