अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का आज कश्मीर दौरा, 6 साल बाद किसी बड़े US राजनयिक की यात्रा क्यों है अहम?

नई दिल्ली:

अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर बुधवार को भारत पहुंच रहे हैं. वे 19 अगस्त को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दो दिन के दौरे पर श्रीनगर पहुंच रहे हैं. सर्जियो गोर, पिछले साल हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद कश्मीर का दौरा करने वाले पहले अमेरिकी राजनयिक हैं. सर्जियो गोर दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत हैं. वे जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात करेंगे. इस क्षेत्र में हाल के दिनों में रणनीतिक गतिविधियों के बढ़ने के बीच, इस दौरे को अमेरिका की एक अहम राजनयिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने बार-बार दावा किया कि उन्होंने पिछले साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच जंग रुकवाई और लाखों लोगों की जान बचाई. यह एक ऐसा दावा है, जिससे भारत सहज नहीं रहा है और नई दिल्ली की तरफ से कई बार खारिज किय गया है.

भारत का रुख साफ है कि यह टकराव पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर की अपील के बाद रुका था.

कश्मीर से जुड़े फैसले पर अमेरिका का क्या रुख?

अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का स्पेशल स्टेटस खत्म किए जाने के बाद, सरकार द्वारा आयोजित कई देशों के डिप्लोमेटिक डेलिगेशन के हिस्से के तौर पर भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत केनेथ जस्टर ने जनवरी 2020 में श्रीनगर का दौरा किया था. दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों के चलते अमेरिका ने जम्मू-कश्मीर पर भारत के फैसले का समर्थन किया था, क्योंकि भारत की कुशल कूटनीति की वजह से पाकिस्तान कूटनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गया था. 

इस बार सर्जियो गोर का दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब ईरान और अमेरिका के बीच हालिया युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद राष्ट्रपति ट्रंप और पाकिस्तान के हाइब्रिड सिविल-मिलिट्री नेतृत्व के बीच नजदीकियां बढ़ी हैं.

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच NATO जैसे त्रिपक्षीय रक्षा समझौते की ट्रंप द्वारा की गई तारीफ भी भारत के लिए चिंता का विषय रही है. इसलिए, अमेरिकी राजदूत के इस दौरे पर गहरी दिलचस्पी के साथ नजर रखी जा रही है.

उमर अब्दुल्ला के साथ गोर की तय मीटिंग एक अहम कूटनीतिक संदेश भी है. आर्टिकल 370 को हटाने को लेकर भारत की आलोचना हुई थी. अब जब वहां चुनी हुई सरकार है, तो भारत में अमेरिकी राजदूत जम्मू-कश्मीर के चुने हुए मुख्यमंत्री से मिलने वाले हैं.

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उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करके जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा बहाल करने की मांग की थी. आर्टिकल 370 हटाए जाने की सातवीं बरसी पर, जम्मू-कश्मीर की सभी प्रमुख पार्टियों ने भी विरोध प्रदर्शन किया और 5 अगस्त को ‘काला दिवस’ के तौर पर मनाया.

गुरुवार को सर्जियो गोर के लद्दाख जाने की उम्मीद है. जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच हुई झड़प के बाद किसी अमेरिकी राजदूत का हिमालयी क्षेत्र का यह पहला दौरा होगा. इन झड़पों में सेना के 20 जवान मारे गए थे. अमेरिका ने भारत का पुरजोर समर्थन किया था. अमेरिका ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर यथास्थिति बदलने की चीन की कोशिश की निंदा की थी. इसके साथ ही, दोनों देशों के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी के तहत, अमेरिका ने भारत को रियल-टाइम इंटेलिजेंस और सैनिकों के लिए ऊंचे पहाड़ी इलाकों में काम आने वाले उपकरण मुहैया कराकर मदद की थी.

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