कर्नाटक में धूमधाम से मनेगा मैसूर दशहरा… कांग्रेस सरकार के फैसले ने BJP के राजनीतिक पैटर्न को दी चुनौती



बेंगलुरु:

कर्नाटक के कुछ इलाकों में सूखे की आशंका के बावजूद मैसूर दशहरा को पूरी भव्यता के साथ आयोजित करने के फैसले ने प्रदेश के नेताओं के बीच एक और बहस छेड़ दी है. राज्य में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी, आस्था से जुड़े मुद्दों पर बीजेपी के लंबे समय से चले आ रहे रुख का मुकाबला करने की कोशिश कर रही है.

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने घोषणा की है कि राज्य के कुछ हिस्सों में पानी की कमी की चिंता के बावजूद मैसूर दशहरा का आयोजन किया जाएगा. पर्यटन को बढ़ावा देने और रोज़गार के अवसर पैदा करने के लिहाज़ से एक अहम सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधि होने के कारण, कांग्रेस सरकार ने मैसूर दशहरा को एक महत्वपूर्ण उत्सव करार किया है.

मैसूर के पूर्व शाही परिवार की याद में हर साल मनाया जाने वाला दशहरा उत्सव देश-विदेश से लाखों लोगों को आकर्षित करता है. यह कर्नाटक के प्रमुख सांस्कृतिक उत्सवों में से एक है. इस त्योहार के मौसम में होटलों, परिवहन सेवाओं, कलाकारों, परफ़ॉर्मर्स और अन्य छोटे कारोबारियों की कमाई में बढ़ोतरी होती है.

राजनीतिक मुद्दा बना मैसूर दशहरा आयोजन

बीजेपी खुद को ऐसी मुख्य पार्टी के तौर पर पेश करती रही है जो हिंदू त्योहारों, मंदिरों और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े लोगों के सभी धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को अपनी राजनीतिक सोच के ज़रिए उठाती है. वहीं, कर्नाटक में कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि धर्म, आस्था और संस्कृति समाज के सभी वर्गों से जुड़े हैं और इन्हें किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं किया जा सकता.

इस तरह, बिना किसी देरी के दशहरा का आयोजन करके, कांग्रेस सरकार ये साफ़ संदेश देने की कोशिश कर रही है कि विकास और कल्याणकारी नीतियों को आगे बढ़ाते हुए भी सांस्कृतिक गतिविधियों का समर्थन किया जा सकता है. यह फ़ैसला कर्नाटक में कांग्रेस की उस बढ़ती इच्छा को देखते हुए लिया गया है, जिसके तहत वह कल्याणकारी कार्यक्रमों और आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दों को भी उठाना चाहती है.

बीजेपी हमेशा कांग्रेस पर सांस्कृतिक मुद्दों से जुड़े मामलों में चुनिंदा रवैया अपनाने का आरोप लगाती रही है, लेकिन कांग्रेस इस आरोप को खारिज करती है और राज्य में कांग्रेस के शासन के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लगातार दिए जा रहे समर्थन का हवाला देती है.

कर्नाटक की राजनीति में मैसूर दशहरा पर हो रही बहस, खुद उस कार्यक्रम से कहीं ज़्यादा बड़ी है. इसमें यह व्यापक बहस भी शामिल है कि क्या किसी समाज की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को पूरी तरह से किसी पार्टी विशेष का मुद्दा बनाया जा सकता है.

कई दशकों से कर्नाटक समेत कई जगहों पर चुनावी राजनीति में यह एक अहम मुद्दा रहा है. मैसूर दशहरा को लेकर कर्नाटक सरकार का साफ संदेश ये है कि यह कर्नाटक की विरासत का एक अहम हिस्सा है.

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