कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर रक्षा मंत्री बोले- भारतीय सेनाएं हर चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार
Raisina News Desk- जुलाई 26, 2026 03:06 AM IST

नई दिल्ली:
“दुश्मन की मंशा आज भी नहीं बदली है. वह अब भी घुसपैठ और प्रॉक्सी वॉर जैसी साजिशें कर रहा है. लेकिन भारतीय सशस्त्र बल हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.” यह बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर द्रास में आयोजित कार्यक्रम में कही.रक्षा मंत्री ने 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में सैनिकों ने जो साहस, संकल्प और देशभक्ति दिखाई, वह आज भी पूरे देश और सेना को प्रेरित करती है. राजनाथ सिंह ने कहा कि जब तक भारतीय सैनिकों का साहस और देशभक्ति अटल है, तब तक कोई भी भारत की ओर बुरी नजर डालने की हिम्मत नहीं कर सकता. सैनिकों की वजह से देश का हर नागरिक बिना डर अपने सपने पूरे कर सकता है.
रक्षा मंत्री ने सैनिकों के साथ ‘बराखाना’ में बातचीत भी की. उन्होंने कहा कि कारगिल की जीत पर हमें गर्व है, लेकिन देश के सामने सुरक्षा चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं. इसलिए सरकार लगातार सेना को और मजबूत बनाने पर काम कर रही है.उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार सैनिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. साथ ही सेना के आधुनिकीकरण पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है. आधुनिक हथियार और बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है.
द्रास के विश्वनाथन स्टेडियम में आयोजित ‘शौर्य भोज’ कार्यक्रम में ड्रोन, रोबोटिक म्यूल और सेना के मार्शल आर्ट का प्रदर्शन किया गया. इसके साथ ही लद्दाख की संस्कृति पर आधारित रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया.इस कार्यक्रम में लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, उत्तरी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक, वीर नारियां, शहीदों के परिजन और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए.
इससे पहले कारगिल युद्ध स्मारक पर ‘शौर्य संध्या’ का आयोजन हुआ. यहां देशभक्ति गीतों के बीच ऑपरेशन विजय के वीरों को श्रद्धांजलि दी गई. कारगिल युद्ध में शहीद हुए 10 सैनिकों के परिजनों को सम्मानित किया गया. रक्षा मंत्री को ‘वीरों की मिट्टी’ से भरा कलश भी भेंट किया गया. इसके बाद सर्वधर्म प्रार्थना हुई. ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह और राष्ट्रगान के बाद रक्षा मंत्री ने द्रास में युद्ध स्मारक पर दीप जलाकर शहीदों को नमन किया.दिन की शुरुआत ‘युद्ध संस्मरण’ कार्यक्रम से हुई. यह कार्यक्रम लामोचेन व्यू प्वाइंट पर आयोजित किया गया. इसमें कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक, शहीदों के परिजन और अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए. इस दौरान ऑपरेशन विजय के 40 वीरों की बहादुरी पर आधारित फिल्म और विशेष वीडियो भी दिखाया गया.
दोपहर में ‘गौरवमय संस्कृति’ कार्यक्रम आयोजित हुआ. लद्दाख स्काउट्स रेजिमेंटल सेंटर बैंड ने देशभक्ति धुनें प्रस्तुत कीं. इसके बाद सेना की ‘श्वेत अश्व’ मोटरसाइकिल टीम ने शानदार प्रदर्शन किया. स्कूली बच्चों ने राष्ट्रीय एकता पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया. सेना की अत्याधुनिक तकनीकों की भी झलक दिखाई गई. कारगिल विजय दिवस का मुख्य समारोह 26 जुलाई को होगा. इस अवसर पर रक्षा मंत्री ‘श्रद्धांजलि समारोह’ में ऑपरेशन विजय के वीरों को राष्ट्र की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे.कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए 545 वीरों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था. इनमें भारतीय सेना के 537, भारतीय वायुसेना के 5, सीमा सुरक्षा बल के 1 जवान और 2 नागरिक शामिल थे. उनके बलिदान ने भारत की जीत सुनिश्चित की और देश की सीमाओं की रक्षा की.