कौन थे नरेंद्र मोदी के गुरु लक्ष्मणराव इनामदार? वडनगर में पहली मुलाकात, अहमदाबाद की RSS 'पाठशाला' ने बदल दी उनकी जिंदगी
Raisina News Desk- सितंबर 05, 2026 02:51 PM IST

नई दिल्ली:
आरएसएस के एक साधारण कार्यकर्ता से प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे नरेंद्र मोदी के जीवन में भी उनके गुरु का काफी प्रभाव रहा है. बहुत कम ही लोगों को मालूम है कि उनके गुरु कौन थे, जो उन्हें समाजसेवा और देश सेवा के रास्ते पर आगे बढ़ने को प्रेरित किया. पीएम मोदी के गुरु, पथ प्रदर्शक के तौर पर लक्ष्मणराव इनामदार का नाम लिया जाता है. वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित स्वयंसेवक और स्वतंत्रता सेनानी थे.उन्हें वकील साहब कहकर सब बुलाते थे. रिपोर्ट के मुताबिक, नरेंद्र मोदी कम उम्र में गुजरात के वडनगर में का आरएसएस से पहली बार संपर्क में आए. वडनगर में मोदी अपने पिता की चाय की दुकान पर मदद करने के साथ आरएसएस शाखा में जाते थे. संघ के तब प्रांत प्रचारक लक्ष्मणराव इनामदार से उनकी पहली मुलाकात वहीं हुई. वकील साहब के विचारों ने नरेंद्र मोदी के मन में राष्ट्र प्रेम, सेवा और अनुशासन का भाव जगाया.
किशोरावस्था के बाद 1969 में नरेंद्र मोदी घर छोड़कर करीब दो सालों तक हिमालय, बेलूर मठ और देश के दूसरे आश्रमों में आध्यात्मिक शांति की तलाश में घूमते रहे और फिर अहमदाबाद लौटे.यहीं इनामदार ने अहमदाबाद संघ कार्यालय हेडगेवार भवन में नरेंद्र मोदी के रहने का प्रबंध कराया. इनामदार ने नरेंद्र मोदी की प्रतिभा, संगठन कौशल और नेतृत्व क्षमता को पहचाना. उनकी भाषण शैली को निखारा और संघ के लिए सब कुछ न्योछावर करने के संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने का मंत्र दिया.
मुखोपाध्याय ने किताब में लिखा कि नरेंद्र मोदी उस वक्त अपने भविष्य को लेकर उलझन में थे, लेकिन इनामदार की प्रेरणा और मार्गदर्शन ने उनकी सारी उलझनें दूर कर दीं. हेडगेवार भवन में चाय बनाने, साफ-सफाई से लेकर संघ के कामकाज में उन्होंने खूब मेहनत की. इनामदार के साथ संघ के हजारों युवा कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करने में मोदी ने अहम भूमिका निभाई. अहमदाबाद में संघ के प्रचारक के तौर पर हेडगेवार भवन RSS ऑफिस में कमरा नंबर 3 से कभी नरेंद्र मोदी काम करते थे. वहीं इनामदार के सान्निध्य में उन्हें संघ के मूलमंत्र संगठन, अनुशासन और समर्पण के साथ आगे बढ़ने का मौका मिला.
Narendra Modi guru Lakshmanrao Inamdar
लक्ष्मणराव इनामदार पुणे से के करीब खाटव गांव में 1917 में हुआ था. उनके पिता बड़े राजस्व अधिकारी थे, जिनके 10 पुत्र पुत्रियों में एक इनामदार थे. इनामदार ने 1943 में पुणे यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई और आरएसएस से जुड़ गए.उन्होंने आजादी के संघर्ष में भी हिस्सा लेने के साथ भारत में विलय से इनकार करने वाले हैदराबाद में निजाम के खिलाफ खिलाफ मुहिम छेड़ी.संघ प्रचारक के तौर पर उन्होंने भी आजीवन शादी नहीं करने का संकल्प निभाया.
हमेशा सफेद धोती-कुर्ता इनामदार खाली समय में किताबें पढ़ने के साथ रेडियो पर देश-दुनिया की जानकारी लेते थे. शाखा में मोदी अन्य स्वयंसेवकों के साथ कबड्डी और खो-खो और योग प्राणायाम भी सीखा. सादगी के साथ संगठन के लिए सब कुछ झोंक देने की इनामदार की शैली मोदी के मन में भी रच बस गई. 10-12 की मेहनत के बाद 1972 में नरेंद्र मोदी को संघ प्रचारक बनाया गया.
इनामदार ने ही मोदी को आगे की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया. किताब ‘नरेंद्र मोदीः ए पॉलिटिकल बायोग्राफी’ के लेखक एंडी मरीनो ने भी जिक्र किया है कि लक्ष्मणराव इनामदार गुजरात में संघ की जड़ों को मजबूत करने के साथ विशाल वृक्ष में बदलकर तस्वीर बदल दी, जिसने उसे हिन्दुत्व का अभेद्य गढ़ बना दिया. मोदी जब भी उलझन में होते थे तो पिता की तरह इनामदार ने उन्हें राह दिखाई.
“He used to teach us always to try to discover the other person’s virtues and qualities and try work on them…Don’t focus on the deficiencies. Each and every person has so many deficiencies, but you have to focus on his (positive) qualities,” @narendramodi once remarked while… pic.twitter.com/iTc1Uo1oYR
— Modi Archive (@modiarchive) July 21, 2024
देश में 1975 में आपातकाल लगने के साथ आरएसएस पर भी प्रतिबंध लगा. संघ कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बीच मोदी और उनके गुरु इनामदार भी भूमिगत हो गए. वेश-भूषा बदलकर इधर-उधर रहे. मोदी ने भी कई बार सिख और संन्यासी का भेष धारण कर खुद को पकड़े जाने से बचाया. आरएसएस के कई समर्पित कार्यकर्ताओं के घरों में समय गुजारा. इमरजेंसी के दौर में भी संघ को सक्रिय रखने की उनकी कोशिशों का ही असर हुआ कि उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गई. मोदी को वडोदरा जिले का विभाग प्रचारक बनाया गया. फिर 1979 में वो पंचमहल,नादियाड़, डांग जिलों के प्रचारक रहे.
इनामदार को 1980 के दशक कैंसर का पता चला और 1984 में उनका निधन हो गया, लेकिन वो जीवनपर्यंत संघ के लिए जी जान से जुटे रहे. नरेंद्र मोदी ने अपने गुरु की लिखी कई किताबें अपने पास संभाल कर रखीं.नरेंद्र मोदी 2014 में पीएम बनने के पहले 2001 में प्रधानमंत्री आवास आए थे. तब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे और मोदी दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव पद पर थे. 18 अगस्त 2001 तब नरेंद्र मोदी को अपने गुरु लक्ष्मणराव इनामदार की किताब के विमोचन में प्रधानमंत्री आवास गए थे. 13 साल बाद उसी प्रधानमंत्री आवास में वो पीएम बनकर पहुंचे.
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