छात्रों को परेशान करना बंद नहीं क‍िया तो जल्‍द होगा विरोध-प्रदर्शन, CJP संस्‍थापक अभि‍ज‍ीत द‍िपके ने फ‍िर दी चेतावनी

नई द‍िल्‍ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने छात्रों के उत्पीड़न को लेकर एक बार फि‍र एक बड़े व‍िरोध-प्रदर्शन की चेतावनी दी है. सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर एक पोस्ट के जरिए उन्‍होंने कहा क‍ि अगर पुलिस की तरफ से छात्रों को परेशान करने का सिलसिला जारी रहा, तो कॉकरोच जनता पार्टी जल्द ही एक बड़े और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के जरिए इसका जवाब देगी. उन्‍होंने कहा क‍ि सरकार को छात्रों को निशाना बनाना और उन्हें परेशान करना बंद करना चाहिए. 

उधर, सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने एक्‍स पर ल‍िखा, CJP विरोध प्रदर्शन से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से पूरे देश में चिंता की घंटी बजनी चाहिए. खासकर निर्देश नंबर 4, जो सरकारों को मौजूदा एफआईआर पर आगे बढ़ने और जांच करने की इजाजत देता है. यह बहुत गंभीर चिंता का व‍िषय है. 

दास ने कहा क‍ि यह निर्देश भारत सरकार द्वारा 25 जुलाई 2026 को देश के युवाओं को दिए गए उस भरोसे और गारंटी के बिल्कुल उलट है, जिसमें कहा गया था कि सभी एफआईआर वापस ले ली जाएंगी और शांतिपूर्ण आंदोलन में हिस्सा लेने वाले किसी भी प्रदर्शनकारी को सीधे या परोक्ष रूप से निशाना नहीं बनाया जाएगा. इसी भरोसे के बाद सीजेपी ने अपना देशव्यापी विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया था. अब हमें शक है कि भारत सरकार और BJP-शासित राज्य, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के इस आदेश का इस्तेमाल और उसे हथियार बनाकर, प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर जारी रख सकते हैं और उन्हें बहुत परेशान कर सकते हैं. शुरू से ही हमारी यही चिंता थी कि शांतिपूर्ण विरोध को निशाना बनाकर राजनीतिक मकसद पूरे करने के लिए अदालतों का इस्तेमाल सीधे या परोक्ष रूप से किया जा सकता है. 

कोर्ट आदेश पूरी तरह अस्‍वीकार्य

च‍िंता इस बात की भी है क‍ि सरकार के वकीलों ने इस अंतरिम आदेश का विरोध नहीं किया, जबकि केंद्र सरकार को अच्छी तरह पता था कि सीजेपी के साथ बातचीत और आश्वासन का दौर कल देर रात तक जारी रहा था और 25 जुलाई को ही एक पक्का समझौता हो चुका था. इसलिए अदालत का जानकारी के बिना दिया गया आदेश पूरी तरह से अस्वीकार्य है. दास ने कहा क‍ि किसी भी स्थिति में अंतरिम आदेश में ऐसी कोई बात नहीं है जो भारत सरकार या संबंधित बीजेपी शासित राज्य सरकारों को FIR वापस लेने या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई न करने का फैसला करने से रोके, जैसा कि बिहार और असम की सरकारों ने किया है. ऐसे मामलों को वापस लेने या उन पर आगे कार्रवाई न करने का अधिकार कार्यपालिका के पास ही रहता है. सरकार को 25 जुलाई को किए गए अपने वादे से पीछे हटने के लिए कोर्ट के आदेश का बहाना नहीं बनाना चाहिए. 

सरकार के ल‍िए अपने वादों को पूरा करने की समय-सीमा हो रही खत्‍म

भारत सरकार के लिए अपने वादों को पूरा करने की समय-सीमा आज खत्म हो रही है. हम एक बार फिर सरकार से अपील करते हैं कि वह अपने हर वादे को पूरा करे. FIR वापस ले, यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो और उस आश्वासन का अक्षरशः और उसकी मूल भावना के अनुरूप सम्मान करे, जिसके कारण यह प्रदर्शन समाप्त हुआ था. अगर ऐसा नहीं हुआ तो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के पास उन छात्रों और युवा प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के लिए अपना देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन फिर से शुरू करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा, जो न सिर्फ़ अपने लिए बल्कि इस देश के भविष्य के लिए खड़े हुए थे. 



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