जंतर मंतर विवाद: क्या पुलिस को अपनी पहचान छिपाने का हक है |Explained
Raisina News Desk- जुलाई 23, 2026 04:35 PM IST

जंतर मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच पुलिस कार्रवाई विवादों में है. विरोध कर रहे छात्रों का आरोप है कि कई पुलिसकर्मियों ने सादे कपड़ों में आकर उनके साथ मारपीट की, उन पर लाठियां बरसाईं गईं. इस घटना के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए. वायरल वीडियो के बाद दिल्ली पुलिस को निर्देश जारी करने पड़े कि जो भी पुलिसकर्मी ड्यूटी पर होंगे, उन्हें यूनिफॉर्म में रहना होगा.
इस बीच सभी के मन में सवाल है- क्या पुलिस कभी बिना वर्दी के भी ड्यूटी कर सकती है, क्या पुलिस अधिकारी को अपनी पहचान छिपाने का हक होता है? आइए आसान भाषा में इन सवालों के जवाब जानते हैं-
पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में तैनात किए जा सकते हैं. इसके लिए कोई अलग नियम नहीं है, लेकिन जरूरत पड़ने पर ऐसा देखने को मिल सकता है. असल में जब पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में तैनात होते हैं तो उनका मकसद बल प्रयोग करना नहीं होता, बल्कि खुफिया जानकारी जुटाना होता है. कई कारणों की वजह से पुलिस सादे कपड़ों में भी ड्यूटी करती है. उदाहरण के लिए, जब हिंसा करने वालों की पहचान करनी होती है, तब भी पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में आते हैं. इसी तरह, अगर पुलिस को कभी सीक्रेट इंफॉर्मेशन चाहिए हो या फिर इंटेलिजेंस गैदरिंग का काम करना हो, तब भी सादी वर्दी पहनी जाती है. कई बार जरूरी साक्ष्य जुटाने के लिए भी पुलिस को यह कदम उठाना पड़ता है.
सभी राज्यों के अपने-अपने पुलिस मैनुअल होते हैं. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र समेत हर राज्य का अपना पुलिस मैनुअल होता है. अगर कोई पुलिस अधिकारी सादे कपड़ों में ड्यूटी देता है, तो उसके भी स्पष्ट नियम होते हैं. डीसीपी, एसपी या फिर कमिश्नर जैसे वरिष्ठ अधिकारी ही विशेष परिस्थितियों में सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती का आदेश जारी कर सकते हैं.
वैसे, सार्वजनिक व्यवस्था और शांति बनाए रखने से जुड़े नियम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के अध्याय 11 में दिए गए हैं. हालांकि, इसमें यह स्पष्ट रूप से नहीं लिखा है कि क्या पुलिसकर्मी अपनी पहचान छिपा सकते हैं या नहीं. लेकिन जानकारों का कहना है कि किसी मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी को ही भीड़ हटाने का अधिकार होता है. यानी सामने मौजूद शख्स की पहचान एक पुलिस अधिकारी के रूप में होना जरूरी है. अगर हथियारबंद व्यक्ति बिना अपनी पहचान बताए आदेश देंगे, तो लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो जाएगा कि वह वास्तव में पुलिसकर्मी हैं या नहीं. इसी वजह से उनके आदेश को कानूनी मान्यता देना भी मुश्किल हो सकता है. इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए आपराधिक मामलों की एक वकील ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति की यह जिम्मेदारी है तो यूनिफॉर्म पहने पुलिस अधिकारी की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए.
वैसे, सुप्रीम कोर्ट ने डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1997) मामले की सुनवाई के दौरान हिरासत और गिरफ्तारी की स्थिति में पुलिस की पहचान को लेकर कुछ जरूरी बातें कही थीं. फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है या हिरासत में लेती है तो वह अपनी पहचान नहीं छिपा सकती. इस बात पर जोर दिया गया था कि उनकी पहचान साफ तौर पर दिखाई देनी चाहिए, यानी उनका नाम स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए. हालांकि, यह मामला गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़ा था, भीड़ नियंत्रण से नहीं.
उधर, कानून के जानकार यह भी कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ जैसे इलाकों में पुलिस को कई बार अपनी पहचान छिपानी पड़ती है. अपने परिवार की सुरक्षा और खुद की सुरक्षा के लिए ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं.