देश में कचरा प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, DM कुमार गौरव बोले-कचरा फैलाने वालों की कर रहे पहचान

देश में कचरा प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश आया है. कोर्ट ने कहा कि कचरा पैदा करने वाला हर व्यक्ति, परिवार और संस्थान उसके सही निपटारे के लिए भी जिम्मेदार है. यह जिम्मेदारी सिर्फ सफाई कर्मचारियों की नहीं हो सकती. आदेश के बाद जिला कलेक्टरों ने खास तैयारियां शुरू कर दी हैं. कचरा फैलाने वालों की पहचान से लेकर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई तक की तैयारी की जा रही है.

NDTV से खास बातचीत में बिहार के मुजफ्फरपुर डीएम IAS कुमार गौरव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन को लेकर सभी संबंधित विभागों को विशेष निर्देश दिए गए हैं. विभाग प्रमुखों से कहा गया है कि मॉल, होटल, अस्पताल, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और बड़ी आवासीय सोसायटियों जैसे बड़े कचरा उत्पादकों द्वारा अगर कचरे का सही डिस्पोजल नहीं किया जाता है, तो उनकी पहचान की जाए ताकि उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकें.

डीएम ने कहा कि पहले भी प्रशासन के पास ऐसे अधिकार मौजूद थे, लेकिन उनका विधिवत उपयोग नहीं हो पा रहा था. अब न्यायालय के आदेश के बाद सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं और तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

बिजली-पानी कनेक्शन काटने तक की कार्रवाई

कचरा निस्तारण के नियमों का पालन नहीं करने वाले बड़े कचरा उत्पादकों के खिलाफ पानी और बिजली की आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद की जा सकती है. हालांकि, नियमों का पालन करने का प्रमाण देने के बाद यह सुविधाएं फिर से बहाल की जा सकेंगी.

6 हफ्ते में होगी पहचान

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी को निर्देश दिया गया है कि राज्यों के मुख्य सचिवों के जरिए जिला कलेक्टर अपने-अपने इलाके में छह हफ्तों के भीतर बड़े कचरा उत्पादकों की पहचान करें. इसके बाद उन्हें नियमों के पालन को लेकर नोटिस और दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे.

कोर्ट ने स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों को भी कचरा प्रबंधन की शिक्षा को पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण का हिस्सा बनाने के निर्देश दिए हैं. अदालत का मानना है कि बच्चे अपने परिवारों में इस बारे में जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

डिजिटल निगरानी और नदी प्रदूषण पर फोकस

सुप्रीम कोर्ट ने कचरे के ढेरों की जियो-टैग्ड तस्वीरें और मासिक रिपोर्ट डिजिटल पोर्टल के जरिए साझा करने पर जोर दिया है. साथ ही SCMC को नदियों में ठोस कचरे से होने वाले प्रदूषण पर खास नजर रखने और उसका डेटा कोर्ट के सामने पेश करने को कहा गया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत जिला कलेक्टरों को विशेष शक्तियां दी जाएं. इससे वे ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सीधे दंडात्मक कार्रवाई कर सकेंगे.



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