मणिपुर में सीएम के सामने केसीपी के 46 उग्रवादियों ने डाले हथियार, 28 आधुनिक हथियार भी किए जमा
Raisina News Desk- जुलाई 21, 2026 09:24 PM IST

मणिपुर में लंबे समय से जारी उग्रवाद और हिंसा के बीच शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया है. प्रतिबंधित संगठन कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (पीपुल्स वॉर ग्रुप) यानी केसीपी (पीडब्ल्यूजी) के 46 सक्रिय उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है. यह कार्यक्रम इंफाल ईस्ट जिले के मणिपुखरी स्थित असम राइफल्स मुख्यालय में आयोजित किया गया, जहां उग्रवादियों ने हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की घोषणा की.
आत्मसमर्पण समारोह में मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह मौजूद रहे. उनके सामने उग्रवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ने का संकल्प लिया. कार्यक्रम में राज्य के गृह मंत्री, कला, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री के साथ कई वरिष्ठ प्रशासनिक और सुरक्षा अधिकारी भी शामिल हुए. मणिपुर सरकार, पुलिस, असम राइफल्स, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भी इस मौके पर भाग लिया.
मणिपुर में उग्रवादियों ने किया आत्मसमर्पण
आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों ने केवल संगठन छोड़ने की घोषणा ही नहीं की बल्कि अपने पास मौजूद हथियार भी सुरक्षा बलों को सौंप दिए. कुल 28 आधुनिक हथियार जमा कराए गए जिनमें एके राइफल, इंसास राइफल, सेल्फ लोडिंग राइफल, कार्बाइन मशीन गन, .303 राइफल, पिस्तौल, डबल बैरल और सिंगल बैरल राइफल शामिल हैं. इसके अलावा एक रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड लॉन्चर भी सुरक्षा एजेंसियों को सौंपा गया. बड़ी मात्रा में गोलियां, मैगजीन और अन्य विस्फोटक सामग्री भी जमा कराई गई.
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इस आत्मसमर्पण की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये उग्रवादी किसी औपचारिक शांति समझौते का हिस्सा नहीं थे. उन्होंने अपनी इच्छा से हिंसा छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामान्य जीवन को अपनाने का निर्णय लिया है. यही कारण है कि इसे मणिपुर में शांति प्रक्रिया के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
46 उग्रवादियों ने किया आत्मसमर्पण
केसीपी की स्थापना 14 अप्रैल 1980 को हुई थी और समय के साथ यह कई गुटों में बंट गया. इनमें पीपुल्स वॉर ग्रुप को सबसे सक्रिय और हिंसक गुट माना जाता रहा है. इस संगठन पर उगाही, हिंसा और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप लगते रहे हैं. पिछले वर्षों में इसके कुछ सदस्य आत्मसमर्पण करते रहे हैं लेकिन उनकी संख्या आमतौर पर पांच से 12 के बीच रही. एक साथ 46 सक्रिय उग्रवादियों का हथियार छोड़ना संगठन के इतिहास की सबसे बड़ी घटना माना जा रहा है.
अधिकारियों का कहना है कि यह सफलता सुरक्षा बलों के लगातार अभियान, स्थानीय लोगों के सहयोग और सरकार की पुनर्वास नीति का परिणाम है. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आत्मसमर्पण करने वाले लोगों का सफल पुनर्वास किया जाता है और उन्हें रोजगार तथा सम्मानजनक जीवन के अवसर मिलते हैं तो मणिपुर में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में यह कदम बेहद अहम साबित हो सकता है. सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से अन्य उग्रवादी भी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित होंगे.