रांची में भी खड़ा हो रहा जंतर-मंतर, 32 की उम्र में बेरोजगार एक युवती का दर्द देखिए
Raisina News Desk- अगस्त 03, 2026 03:38 PM IST

“मेरी उम्र 32 साल की हो गई, मैंने 7 साल दिल्ली में रहकर तैयारी की और यहां आई तो पेपर में ही धांधली हो गई. मैं लड़की होकर इस उम्र में बेरोजगार हूं. समाज का कितना दबाव है मुझ पर, आप समझ नहीं सकते.”
यह कहना है अर्चना कुमारी का, जो झारखंड के पलामू की रहने वाली हैं. वैसे तो अर्चना झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की अभ्यर्थी हैं, लेकिन इस समय अपनी तरह के हजारों अभ्यर्थियों के साथ रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हो रहे विरोध-प्रदर्शन में बैठी हैं. यहां भी अपने तरह का एक जंतर-मंतर खड़ा हो रहा है. यहां नौकरी की तलाश करने वाले छात्र झारखंड सरकार के सिस्टम से सवाल कर रहे हैं.
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रांची के इस स्टेडियम में सोमवार, 3 अगस्त को भी हजारों छात्रों ने 14वीं JPSC परीक्षा, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार छठे दिन अपना विरोध-प्रदर्शन जारी रखा. ये CBI जांच और भर्ती एजेंसियों में सुधार की मांग कर रहे हैं. इन छात्रों के हाथ में बैनर हैं और उन पर 14वीं JPSC की प्रारंभिक परीक्षा और JSSC-CGL को रद्द करने की मांग लिखी है. जैसे जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक अनशन पर बैठे थे, उसी तरह छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है. CJP ने भी इस आंदोलन को अपना सपोर्ट दे दिया है.
रांची में रविवार को प्रदर्शनकारी छात्रों ने मशाल जुलूस निकाला (फोटो -पीटीआई)
झारखंड के अभ्यर्थियों का यह गुस्सा हाल ही में हुए कई विवादों की वजह से है, जिनमें परीक्षा के पेपर लीक होना, प्रशासन के अजीब फैसले और व्यवस्थागत गड़बड़ियां शामिल हैं. इन छात्रों का कहना है कि इन सबने उनके नौकरी पाने की संभावनाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है. जब इन छात्रों से बात की जाती है तो यह राज्य के शिक्षा और सरकारी भर्ती सिस्टम की बेहद खराब तस्वीर पेश करता है. वे कई परीक्षाओं के दौरान हुई भारी अव्यवस्था का जिक्र करते हैं. JPSC परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) छात्रों के निशाने पर है.
अभ्यर्थियों का गुस्सा उस समय फूटा, जब महीने की शुरुआत में 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद एक ऐसे अभ्यर्थी की OMR शीट सामने आई, जो रिजल्ट में तो पास हो गया, लेकिन OMR घोटाले की ओर इशारा कर रही थी. जंतर-मंतर के NEET आंदोलन से प्रेरित होकर रांची की बापू वाटिका में एक छोटी-सी सभा के तौर पर शुरू हुआ यह विरोध अब एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले चुका है. 29 जुलाई को यह विरोध-प्रदर्शन बड़े आंदोलन में बदल गया, जब आयोजकों ने “महा आंदोलन” और संविधान मार्च का आह्वान किया और हर जिले के उम्मीदवारों से राज्य की राजधानी में इकट्ठा होने की अपील की. इसके बाद छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जमा होने लगे और 6 दिन बीतने के साथ इनकी संख्या हजारों में पहुंच चुकी है. रविवार को यहां स्टूडेंट्स ने विशाल मशाल जुलूस निकाला.
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन करतीं आरती कुमारी (फोटो- NDTV, आशुतोष कुमार सिंह)
अर्चना कुमारी बस यही चाहती हैं कि 90 दिन के अंदर जांच पूरी हो और 14वीं JPSC की प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किया जाए. उनके लिए हर बीतता दिन मुश्किल होता जा रहा है. हर हाल में जल्दी नौकरी पाने का दबाव है. उन्होंने कहा, “सरकार कहती है कि जांच चल रही है, लेकिन यह जांच कब तक चलेगी? हम इस माटी से जुड़े हैं और यहीं नौकरी करना चाहते हैं. हमारी किसी सरकार से दुश्मनी नहीं है. सरकार तो आएगी-जाएगी, लेकिन हमारे लिए नौकरी पाने का यह मौका दोबारा नहीं मिलेगा. 32 साल की उम्र में भी तैयारी कर रही हूं. पापा तो सपोर्ट करते हैं, लेकिन समाज बातें बनाता है. उसे लगता है कि हम पढ़ाई नहीं, मौज कर रहे हैं.”
जैसे-जैसे दिन बीत रहा, रांची में आंदोलन का आकार बढ़ता जा रहा है (फोटो- पीटीआई)
29 साल की सविता कुमारी आंदोलन स्थल पर खाने की जिम्मेदारी संभाल रही हैं और पहले दिन से ही प्रदर्शन में शामिल हैं. पिछले 8 साल से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहीं सविता पर भी अब नौकरी पाने का दबाव बढ़ गया है. वे कहती हैं, “हम लोग शौक से यहां नहीं हैं. अभी हमें लाइब्रेरी में होना चाहिए था, लेकिन हम यहां धरना दे रहे हैं. शारीरिक और मानसिक, दोनों तरह का दबाव है. हम पर शादी का दबाव भी है. एक लड़की अगर प्रदर्शन करने बाहर निकली है, तो समझ जाइए कि दबाव कितना ज्यादा है.”
सविता कुमारी ने CGL से लेकर सिपाही और होमगार्ड तक की परीक्षाएं दी हैं, लेकिन उनका कहना है कि सिस्टम उन्हें मात दे रहा है. ये प्रदर्शनकारी सिर्फ राजनीतिक या प्रशासनिक स्तर पर नुकसान की भरपाई नहीं, बल्कि पूरे ढांचे में आमूल-चूल बदलाव की मांग कर रहे हैं. देवेंद्र नाथ महतो का कहना है, “सबसे पहले हम यह सुनिश्चित करेंगे कि 14वीं JPSC की प्रारंभिक परीक्षा रद्द हो और TDPL एजेंसी के जरिए हुई परीक्षाओं की जांच हो. हम JPSC और JSSC परीक्षाओं में सुधार के लिए दबाव डालेंगे.”
JPSC के चेयरमैन एल खियांग्ते का इस्तीफा हो चुका है. झारखंड CID ने सोमवार को राज्यभर में बड़ी कार्रवाई शुरू की और 20 से ज्यादा जगहों पर एक साथ छापेमारी की. CID की टीमों ने रांची, धनबाद, बोकारो, देवघर, गोड्डा, रामगढ़, हजारीबाग और पलामू जिलों में तलाशी अभियान चलाया. इन छापों में कई कोचिंग संस्थान और जांच के दायरे में आए लोगों से जुड़ी जगहें शामिल थीं, जिनमें रांची के धुर्वा और नामकुम इलाके भी शामिल हैं.
इसी जांच के तहत JPSC के पूर्व चेयरमैन और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांगते से पहले भी कई बार पूछताछ की जा चुकी है. उन्हें सोमवार को फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया है.
स्टेडियम में बैठे इन युवाओं के लिए यह सिर्फ एक परीक्षा या नौकरी का सवाल नहीं है, बल्कि उनके सपनों, संघर्ष और बीते कई सालों की मेहनत का सवाल है. कोई 35 की उम्र पार कर चुका है तो कोई शादी और परिवार के दबाव से जूझ रहा है. कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने अपनी जवानी का सबसे अहम दौर किताबों और कोचिंग सेंटरों में बिताया, लेकिन अब उन्हें अपने भविष्य को लेकर डर सताने लगा है. रांची के इस आंदोलन में सिर्फ नाराजगी नहीं, बल्कि उन हजारों सपनों की बेचैनी भी दिखाई दे रही है, जो एक निष्पक्ष मौके का इंतजार कर रहे हैं.