सड़क हादसे के 10 मिनट के भीतर पहुंचेगी एंबुलेंस; थोड़ी भी देरी हुई तो लगेगी पेनाल्टी… NHAI का बड़ा फैसला
Raisina News Desk- अगस्त 12, 2026 10:52 PM IST

नेशनल हाइवे पर सफर करने वालों की सुरक्षा को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है. अब हाइवे पर दुर्घटना होने के बाद एंबुलेंस के देर से पहुंचने का बहाना नहीं चलेगा. NHAI ने इमरजेंसी रिस्पांस टाइम को लेकर बेहद सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं, जिनके तहत एंबुलेंस को हादसे की सूचना मिलते ही 10 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचना होगा.
नियमों का पालन न करने पर ठेकेदारों और एंबुलेंस चालकों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा. इस नए फैसले का सबसे बड़ा मकसद सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को जल्द से जल्द डॉक्टरी इलाज मुहैया कराना है, ताकि ‘गोल्डन आवर’ (हादसे के बाद का पहला घंटा) में लोगों की जान बचाई जा सके.
नए नियमों के अनुसार, अब NHAI प्रोजेक्ट्स पर तैनात सभी इमरजेंसी गाड़ियों के लिए ‘NHAI केयर/इंसिडेंट मैनेजमेंट सिस्टम’ का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है. 1 मिनट में रिस्पांस करना होगा. कंट्रोल रूम से इमरजेंसी मैसेज मिलने के 1 मिनट के भीतर एंबुलेंस टीम को उसे स्वीकार करना होगा. यदि इसमें 1 मिनट से ज्यादा की देरी होती है, तो प्रति मिनट 5,000 रुपये का जुर्माना लगेगा.
टिकट स्वीकार करने के बाद अगले 2 मिनट के भीतर एंबुलेंस को घटनास्थल के लिए रवाना होना पड़ेगा. देरी होने पर फिर से 5,000 रुपये प्रति मिनट का जुर्माना ठोंका जाएगा. कोई भी एंबुलेंस या ऑन-रोड यूनिट इमरजेंसी टिकट को रिजेक्ट नहीं कर सकती. अगर किसी ने टिकट रिजेक्ट किया, तो सीधे 10,000 रुपये का जुर्माना लगेगा.
केवल हादसे की जगह पर पहुंचना ही काफी नहीं होगा. NHAI ने यह भी तय किया है कि इमरजेंसी टिकट मिलने के 1 घंटे के भीतर घायल व्यक्ति को नजदीकी अस्पताल पहुंचाना होगा. यदि मरीज को अस्पताल ले जाने में देरी होती है, तो इसके लिए भी 10,000 रुपये प्रति मामला जुर्माना वसूला जाएगा.
एंबुलेंस हर समय तैयार रहे, इसके लिए हर 24 घंटे में कम से कम 5 किलोमीटर का मॉक ड्रिल या ड्राय रन करना अनिवार्य होगा. हालांकि, यदि उस दिन एंबुलेंस किसी हादसे में जाकर पहले ही 5 किमी से ज्यादा चल चुकी है, तो ड्राय रन की जरूरत नहीं होगी.
इसके अलावा, यदि किसी पड़ोसी हाइवे स्ट्रैच पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है, तो आपात स्थिति में एंबुलेंस को अपने तय इलाके (प्रोजेक्ट एरिया) से बाहर जाकर भी मरीज की मदद करनी होगी.