समाज सेवा और चैरिटी को लेकर सोच बदलने का वक्त: अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी
Raisina News Desk- अगस्त 25, 2026 11:33 PM IST

नई दिल्ली:
अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा है कि समाज सेवा और चैरिटी को लेकर सोच बदलने का वक्त आ गया है. परोपकारी संस्थाओं को आम लोगों को सिर्फ किसी छोटी अवधि की योजना का फायदा उठाने वाला ‘लाभार्थी’ मानना बंद कर देना चाहिए. इसके बजाय उन्हें ऐसे बराबर के पार्टनर के रूप में देखना चाहिए, जो अपने समाज और जीवन में बदलाव की बागडोर खुद संभाल सकें.
भारत मंडपम में एवीपीएन ग्लोबल कॉन्फ्रेंस 2026 के वेलकम डिनर में डॉ. प्रीति अदाणी ने परोपकार के क्षेत्र में इस वैचारिक बदलाव को ‘क्षमता के लिए पूंजी’ का नाम दिया. उन्होंने कहा कि फंड देने वाली संस्थाओं को अपना पैसा संस्थानों, कौशल विकास और एक मजबूत सिस्टम के निर्माण में लगाना चाहिए, न कि ऐसी एकमुश्त परियोजनाओं पर खर्च करना चाहिए जो फंडिंग का दायरा खत्म होते ही ठप पड़ जाती हैं.
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, “परोपकार का मतलब लोगों की जिंदगी बदलना नहीं है. इसका मतलब है उन्हें अपनी जिंदगी खुद बदलने का जरिया और मौका देना.”
डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि आज के वक्त में भारत में सोशल वर्क के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है. देश के भीतर चैरिटी की परंपरा और सोशल कैपिटल अब तक के रिकॉर्ड स्तर पर है. असली समस्या यह है कि उस पैसे का इस्तेमाल किस तरह और कहां किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि फंडर्स को संस्थाओं के निर्माण, सामाजिक और व्यवहारिक बदलाव, स्किल डेवलपमेंट, क्लाइमेट एक्शन, नए इनोवेशन और सोशल नेटवर्क को मजबूती देने में निवेश करना चाहिए. यही वे बुनियादी निवेश हैं जिनकी मदद से कोई भी अच्छा सोशल प्रोग्राम लंबे समय तक टिक सकता है और बड़े पैमाने पर आगे बढ़ सकता है.
जमीनी स्तर पर आ रहे बदलावों का जिक्र करते हुए डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि आज उद्यमिता और इनोवेशन सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है.
उन्होंने कहा, “मेट्रो से लेकर मंडियों तक, कैंपस से लेकर छोटे शहरों तक, आज भारत में हर जगह नए प्रयोग और इनोवेशन हो रहे हैं.”
डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा, “युवा, महिलाएं और स्थानीय उद्यमी आज स्वास्थ्य सेवा, पीने के पानी, कृषि, कचरा प्रबंधन और जलवायु संकट जैसे गंभीर मुद्दों पर खुद आगे आकर काम कर रहे हैं. ऐसे में उन्हें किसी छोटी अवधि के कार्यक्रम की नहीं, बल्कि खुद को लगातार आगे ले जाने वाली क्षमता की दरकार है.”
इस सोच की मिसाल के तौर पर डॉ. प्रीति अदाणी ने खुद अदाणी फाउंडेशन के सोशल वर्क को सामने रखा. 1996 में स्थापित अदाणी फाउंडेशन आज शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण, आजीविका, जलवायु और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में काम कर रहा है. फाउंडेशन आज 22 राज्यों के 7,247 गांवों और शहरी वार्डों में सक्रिय है और इससे 1.33 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन पर पॉजिटिव असर पड़ा है.
इसी बदलाव की एक मिसाल देते हुए उन्होंने महाराष्ट्र की किरण हरिनखेड़े की कहानी शेयर की. फाउंडेशन के पशुधन प्रोग्राम से जुड़ने के बाद किरण को बेहतर मवेशी नस्ल और पशु स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी मिली, जिससे उनके दूध उत्पादन में बढ़ोतरी हुई.
आगे चलकर वह महिलाओं की ओर से संचालित एक डेयरी उद्यम से जुड़ीं. इससे उनके घर की आय बढ़ी और साथ ही उनके सामने तरक्की के नए रास्ते खुले.
डॉ. अदाणी ने बताया कि लाखों महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता कोई किताबी या काल्पनिक विचार नहीं है. यह ‘पसंद की आजादी, अवसरों की आजादी और ऊपर बढ़ने यानी तरक्की की आजादी है.
डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा, “विकसित भारत का निर्माण केवल बड़े बजट से नहीं होगा. यह मजबूत संस्थानों के निर्माण से ही होगा.”
उन्होंने कहा, “भारत के पास बड़ा संकल्प है. हमारे समुदायों के पास विचार हैं. हमारे युवाओं में ऊर्जा है. हमारे गैर-सरकारी संगठनों के पास लोगों का भरोसा और पहुंच है. अब चैरिटेबल संस्थाओं को आगे आकर बस उस क्षमता का निर्माण करना होगा.”
25 अगस्त से 27 अगस्त तक चलने वाले इस तीन दिवसीय एवीपीएन सम्मेलन में पूरे एशिया से निवेशक, नीति निर्माता, फंडर्स और डेवलपमेंट सेक्टर के दिग्गज नेता हिस्सा ले रहे हैं. एशियन वेंटर फिलैंथ्रोपी नेटवर्क (AVPN) की ओर से आयोजित इस सम्मेलन की थीम ‘अ ब्लूप्रिंट फॉर एक्शन इन एशिया’ रखी गई है. साल 2011 में स्थापित AVPN आज दुनिया के 43 बाजारों में 700 से अधिक संगठनों को आपस में जोड़ता है.
(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)