सावन में झमाझम बारिश की 2 वजह, समझें क्यों कमजोर पड़ा अलनीनो; दिल्ली टू यूपी बदला मौसम
Raisina News Desk- अगस्त 08, 2026 07:36 PM IST

सावन के मौसम में दिल्ली-NCR में शुक्रवार को हुई झमाझम बारिश ने 15 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया. इस भारी बारिश की वजह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र है. बड़ी बात यह है कि कम दबाव का क्षेत्र अब पश्चिम की तरफ बढ़ रहा है. ऐसे में राजस्थान में भी अगले कुछ दिनों में भारी बारिश देखने को मिल सकती है.
मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 36 से 48 घंटे में राजस्थान में भारी बारिश हो सकती है. उत्तर प्रदेश में गरज और चमक के साथ तेज बारिश के आसार हैं. हरियाणा में भी आंधी-तूफान देखने को मिल सकता है. दिल्ली-NCR को लेकर भी संभावना जताई गई है कि पूरी तरह बारिश नहीं रुकने वाली है. कुछ समय के लिए बारिश होगी, फिर रुकेगी, यानी रुक-रुककर बरसात होती रहेगी.
लेकिन जैसे ही कम दबाव वाला यह सिस्टम पूरी तरह पश्चिम की तरफ बढ़ेगा, बारिश का फोकस दिल्ली से राजस्थान की तरफ शिफ्ट हो जाएगा. वैसे, कम दबाव वाले इस सिस्टम की वजह से ही इतनी बारिश देखने को मिल रही है. उत्तर भारत में मानसून की पूरी व्यवस्था भी सक्रिय है.
एक तकनीकी शब्द होता है-मानसून ट्रफ. इसका मतलब एक लंबी काल्पनिक पट्टी से है, जिसके आसपास नमी वाली हवाएं और बादल ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं. वर्तमान में यह पट्टी उत्तर-पश्चिम भारत से होकर गुजर रही है जिससे बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं.
इस बारिश की वजह से राजस्थान के किसानों के चेहरों पर भी मुस्कान आ सकती है. बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ेगी और ऐसे में फसलों को फायदा पहुंच सकता है.
जानकारी के लिए बता दें कि पहला लो-प्रेशर 7 अगस्त को दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बना था. इसके बाद दूसरा लो-प्रेशर 8 अगस्त को पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के आसपास देखने को मिला. आने वाले दिनों में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी भारी बारिश देखने को मिल सकती है.
इसके अलावा, पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी 8 से 14 अगस्त के बीच कई जगह बारिश हो सकती है. इस समय दक्षिण भारत में भी मानसून सक्रिय है. तटीय कर्नाटक, केरल, माहे और लक्षद्वीप में 14 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहने वाला है. कुछ इलाकों में भारी बारिश भी हो सकती है.
वैसे, मौसम विभाग के मुताबिक, इंडियन ओशन के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्र के तापमान में भी अंतर देखने को मिल रहा है. इसका असर भारत के मानसून पर पड़ सकता है.