हरीश रावत के सामने पहाड़ सा संकट-OSD पर रेड के बाद कितना साथ देगी कांग्रेस?
Raisina News Desk- सितंबर 12, 2026 07:30 PM IST

Harish Rawat resignation: उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कांग्रेस से समस्त पदों से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने सबसे पहले सोशल मीडिया पर लिखा, “सामने टीवी पर खबर आ रही है कि देहरादून में हरीश रावत के पीए के पास भारी मात्रा में कैश और ज्वैलरी आदि पकड़ी गई या पकड़ाई गई, इस तथ्य का खुलासा तो आने वाले समय में होगा और यह सत्य है कि श्री जीना मेरे ओएसडी रहे हैं और मैं जितने भी पदों पर रहा, चाहे पार्टी में रहा या सरकार में रहा, वह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते रहे हैं. श्री जीना एक निहायती सज्जन, विनम्र और काम करने वाले व्यक्ति हैं..यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ की और यदि इस तरीके की कोई भी गलती उन्होंने की है, उसके प्रमाण हैं तो उनके इस तथाकथित दुस्साहसिक कृत्य के लिए मैं लज्जित हूं. परंतु मुझे इस आरोप पर बिल्कुल विश्वास नहीं है.”
“पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी मेरी वजह से नहीं आनी चाहिए”
हरीश रावत फिर आगे लिखते हैं कि “मैं किसी सरकारी पद पर तो हूं नहीं, की उससे त्यागपत्र दूं. हां मैं, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी का सदस्य हूं और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति का स्थाई आमंत्रित सदस्य हूं और मैं बहुत विनम्रता पूर्वक इन दोनों पदों से हटना चाहूंगा, क्योंकि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी मेरी वजह से नहीं आनी चाहिए. फिर 11 घंटे बाद हरीश रावत का सोशल मीडिया पर फिर एक पोस्ट आता है जिसमें वो लिखते हैं कि “कांग्रेस पार्टी की सदस्यता मेरे खून और हड्डियों में है, हरीश रावत जो कुछ भी है, उस सबका निर्माण करती है। वह तो मेरे साथ ही स्वर्ग में भी जाएगी.
हां, यदि कल-परसों देहरादून में ईडी का जो पाखंडपूर्ण चकल्लस हुई है और मैंने यह कहा है कि यदि उससे कांग्रेस पार्टी के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के नैरेटिव पर कोई असर पड़ता है, तो पार्टी के जो पद मेरे पास हैं. प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और एआईसीसी की वर्किंग कमेटी के सदस्य मैं उन पदों से त्यागपत्र देना चाहूंगा. अतः मीडिया के दोस्तों से मेरा आग्रह है कि मेरे पोस्ट/ट्वीट को ज़रा संपूर्णता में पढ़ें और अपने समाचार को करेक्ट करें”
दो बार दिग्गज बीजेपी नेता को दे चुके हैं शिकस्त
78 साल के हरीश रावत उत्तराखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पांच बार लोकसभा के सांसद भी. उन्होंने अल्मोड़ा से बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी को दो बार शिकस्त दी है. मगर अब उत्तराखंड की राजनीति में हाशिए पर हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में हरीश रावत लाल कुआं से चुनाव लड़े थे और उनकी बेटी अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण से लड़ी थी. अनुपमा तो जीत गई मगर हरीश रावत हार गए थे. जबकि हरीश रावत के बेटे वीरेंद्र रावत और पत्नी रेणुका रावत हरिद्वार से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं, जबकि एक और बेटे आनंद रावत उत्तराखंड यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष और महासचिव रहे हैं. यही नहीं पिछले चुनाव में हरीश रावत ने कुछ दर्जन भर टिकट भी बांटे थी.
कई जानकार यह भी कहने से नहीं हिचकते कि इन्हीं टिकटों की वजह से कांग्रेस उत्तराखंड में हार गई थी. अब सवाल है कि क्या पिछली बार की तरह इस बार भी हरीश रावत परिवार से दो लोग चुनाव लड़ेंगे या केवल एक. इस बारे में जब जब एनडीटीवी ने उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, “जहां तक टिकट की बात है तो उस पर कांग्रेस आलाकमान विचार करेंगे मगर जहां तक हरीश रावत की बात है उन्होंने जो कहा है वो कांग्रेस को मजबूत करने के लिए ही कहा है.पार्टी को असहता से बचाने के लिए कहा है.”
हरीश रावत ने दिल्ली में फिर एक प्रेस कांफ्रेंस की. जिसमें उन्होंने कहा कि वो यहां बैठे हैं और सीबीआई और ईडी या किसी और भी जांच के लिए तैयार हैं.यह इसलिए भी जरूरी था कि बीजेपी इसे मुद्दा बनाएगी खासकर देहरादून में छात्रों की गूंज और हल्द्वानी में शुद्धिकरण के मामले के बाद बीजेपी बैकफुट पर है और अब उसे यह मुद्दा हाथ लगा है. इस सब के बीच देखना है कि कांग्रेस पार्टी हरीश रावत का कितना साथ देती है.वैसे कई लोग मानते हैं कि यह तो महज शुरुआत है जैसे जैसे चुनाव नजदीक आएंगे ऐसे मामले और भी सामने आते जाएंगे.