ASEAN: फिलीपींस में राजनाथ सिंह की कूटनीतिक धमक, अमेरिका-रूस-चीन के बीच भारत रखेगा अपना मजबूत पक्ष
Raisina News Desk- अक्टूबर 26, 2026 04:00 PM IST
Rajnath Singh in Philippines: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आसियान रक्षा मंत्रियों की 13वीं बैठक (एडीएमएम-प्लस) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे. यह बैठक फिलीपींस के सेबू में 28 और 29 अक्टूबर को होनी है. यहां आतंकवाद के खिलाफ सहयोग में भी भारत की अहम भूमिका रहेगी. भारत इस मंच पर केवल एक भागीदार देश के रूप में ही नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है.
वर्ष 2024 से 2027 के कार्यकाल के लिए भारत और मलेशिया आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्यसमूह की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं. अब फिलीपींस में होने वाली इस बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होगी. यहां राजनाथ सिंह सुरक्षा चुनौतियों पर भारत का पक्ष रखेंगे. इस दौरान वह विभिन्न देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर रक्षा संबंधों को मजबूत बनाने के रास्ते भी तलाशेंगे.
इस बैठक का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि इसमें दक्षिण-पूर्व एशिया के 11 आसियान सदस्य देशों के साथ भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल होंगे. यह मंच इन देशों को रक्षा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सीधे विचार-विमर्श करने का अवसर देता है. राजनाथ सिंह बैठक के दौरान ‘क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करेंगे. इसके अलावा, वह भाग लेने वाले देशों के अपने समकक्षों से मुलाकात करेंगे. इन बैठकों में मौजूदा रक्षा सहयोग की समीक्षा के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा होगी.
आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक का विस्तारित स्वरूप एडीएमएम-प्लस क्षेत्रीय रक्षा सहयोग का प्रमुख मंच है. इसकी पहली बैठक 12 अक्टूबर 2010 को वियतनाम की राजधानी हनोई में हुई थी. भारत वर्ष 1992 में आसियान का संवाद साझेदार बना था. वर्ष 2017 से इस मंच के रक्षा मंत्री हर साल बैठक कर रहे हैं, ताकि सदस्य देशों और उनके साझेदारों के बीच रक्षा सहयोग को लगातार आगे बढ़ाया जा सके.
फिलीपींस वर्ष 2026 में इस बैठक की अध्यक्षता कर रहा है. भारत की भागीदारी दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत बनाने की उसकी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का हिस्सा है. इस नीति के तहत भारत क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और शांति, स्थिरता तथा साझा विकास को प्रोत्साहित करने पर जोर देता है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सेबू में होने वाली बैठक भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण रखने और विभिन्न देशों के साथ रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने का अवसर देगी.