CJP झारखंड में क्यों नहीं दिख रही एक्टिव, क्या पूरी हो पाई छात्रों की मांगें? जानिए NDTV पर क्या बोले GEN-Z

झारखंड की राजधानी रांची में चल रहे छात्रों के प्रदर्शन को 13 दिन हो चुके हैं. यह प्रदर्शन JPSC और JSSC CGL जैसी सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित धांधली, पेपर लीक और भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्र आंदोलन कर रहे हैं, छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत कई प्रदर्शनकारी रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर है. इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोज जनता पार्टी CJP और छात्रों ने प्रदर्शन किया था. जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी हुआ था. छात्रों के आंदोलन को लेकर NDTV के स्पेशल शो ‘GEN-Z की महापंचायत’ में छात्रों, राजनीतिक जानकारों और पार्टी के प्रवक्ताओं ने भी अपनी राय रखी है. जिसमें अलग-अलग बातें निकलकर सामने आई हैं. 

GEN-Z झारखंड में एक्टिव क्यों नहीं दिख रही CJP: छात्र 

‘GEN-Z की महापंचायत’ शो में छात्रों ने कहा ‘जिस तरह से दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोज जनता पार्टी एक्टिव थी. उसी तरह से झारखंड में यह पार्टी एक्टिव नहीं है. जबकि छात्रों के मुद्दे दोनों जगह एक ही तरह के हैं. GEN-Z छात्रों ने यह मुद्दा भी उठाया कि CJP धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी जीत मान रही है. लेकिन हमें इस मामले में यह भी देखना होगा कि छात्रों को हर मुद्दा उठाना होगा. केवल एक आंदोलन से कुछ नहीं होगा. GEN-Z छात्रों का कहना है कि पेपर लीक समेत छात्रों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना होगा. क्योंकि हर साल छात्र आंदोलन ही करत रहेंगे ?. इस शो में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता विवेक साइलस, हुडा गरिवाला और अभिजीत अय्यर मित्रा जुड़े थे. जबकि सीनियर पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी भी शामिल रहे. 

‘क्या राजनीतिक पार्टी के रुप में आएगी CJP’

छात्रों ने मुद्दा भी उठाया क्या कॉकरोज जनता पार्टी राजनीतिक पार्टी के रुप में भी सामने आएगी. इस पर GEN-Z छात्रों की अलग-अलग राय दी थी. वहीं कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि क्या आंदोलन में जब तक वॉयलेंस नहीं होगा तब तक छात्रों की मांगे नहीं मानी जाएगी. 

जंतर-मंतर और रांची के छात्र आंदोलन में क्या फर्क है

जंतर-मंतर और रांची के छात्र आंदोलन में क्या फर्क है. इस पर जानकारों की अपनी-अपनी राय आई है. उनका कहना है कि यह आंदोलन एक ही तरह का है. लेकिन इसमें सोशल मीडिया का भी अहम रोल रहा है. लेकिन छात्रों को आंदोलन को आंदोलन की तरह रहना चाहिए. इसे प्रेशर कुकर नहीं बनाना चाहिए. 

छात्रों ने शायरी में पूछे

छात्रों ने एक्सपर्ट से शायरी के अंदाज में भी सवाल पूछे. एक छात्र ने कहा ‘कौन आबाद हुआ कौन बर्बाद हुआ शिक्षा के मसले में…बस एक विद्यार्थी बर्बाद हुआ परिवार के खर्चे में.’ दूसरी तरफ एक और छात्र ने कहा ‘उसी को हक इस जमाने में जीने का गालिब..जो इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए.’ झारखंड की रीच भले ही सोशल मीडिया पर जंतर मंतर की तरह नहीं है. लेकिन उसकी पहचान तो होनी चाहिए. 

झारखंड, कर्नाटक और पंजाब का मुद्दा भी उठा 

GEN-Z छात्रों ने झारखंड, कर्नाटक और पंजाब के मुद्दे को भी उठाया है. क्योंकि इन राज्यों में भी कथित पेपर लीक को लेकर विवाद होता रहा है. छात्रों का कहना है कि पेपर लीक एक बड़ी समस्या है. इसलिए इस पर केवल एक दो राज्यों में काम करने से कुछ नहीं होगा. कुछ ऐसा करना होगा कि छात्रों को पूरी तरह से न्याय मिले और पेपर लीक पर भी पूरी तरह से रोक लगना चाहिए.

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