ED डायरेक्टर राहुल नवीन को मिला एक साल का एक्सटेंशन, इंटरनेशनल टैक्सेशन में हासिल है महारत
Raisina News Desk- अगस्त 09, 2026 11:17 PM IST

प्रवर्तन निदेशालय के डायरेक्टर राहुल नवीन को केंद्र सरकार ने एक साल का और एक्सटेंशन दे दिया है. अब राहुल नवीन 13 अगस्त 2027 तक प्रवर्तन निदेशालय की कमान संभालेंगे. 8 अगस्त 2026 को जारी आदेश के मुताबिक, अपॉइंटमेंट्स कमेटी ऑफ द कैबिनेट ने IRS अधिकारी राहुल नवीन के कार्यकाल को 13 अगस्त 2026 के बाद एक साल के लिए बढ़ाने की मंजूरी दी है.
खास बात यह है कि राहुल नवीन की सुपरएनुएशन यानी रिटायरमेंट की तारीख 31 जुलाई 2027 है. इसके बावजूद सरकार ने उन्हें 13 अगस्त 2027 तक ED डायरेक्टर के पद पर बनाए रखने का फैसला किया है. आदेश में कहा गया है कि उनका कार्यकाल 13 अगस्त 2027 तक या अगले आदेश तक जारी रहेगा, इनमें से जो पहले होगा, वही लागू होगा.
राहुल नवीन 1993 बैच के भारतीय राजस्व सेवा यानी IRS अधिकारी हैं. आयकर विभाग में उन्होंने 30 साल से ज्यादा समय तक काम किया है. उन्हें खास तौर पर इंटरनेशनल टैक्सेशन और सीमा पार होने वाले वित्तीय लेनदेन का विशेषज्ञ माना जाता है.
राहुल नवीन ने IIT कानपुर से B.Tech और M.Tech की पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की Swinburne University of Technology, Melbourne से MBA किया.
उनके करियर का बड़ा हिस्सा इंटरनेशनल टैक्सेशन से जुड़े मामलों में रहा है. 2004 से 2008 के बीच उन्होंने मुंबई के इंटरनेशनल टैक्सेशन डायरेक्टोरेट में काम किया. इस दौरान उन्होंने ऐसे कई ऑफशोर ट्रांजैक्शन से जुड़े मामलों में काम किया, जिनमें संपत्ति भारत में थी लेकिन लेनदेन विदेशों से जुड़ा हुआ था.
CBDT में भी राहुल नवीन ने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं. वह टैक्स पॉलिसी डिवीजन में अंडर सेक्रेटरी रहे और बाद में फॉरेन टैक्स एंड टैक्स रिसर्च डिवीजन के डायरेक्टर बने.
इस दौरान उन्होंने दूसरे देशों के साथ टैक्स और वित्तीय जानकारी साझा करने से जुड़े समझौतों पर बातचीत में हिस्सा लिया. इसके अलावा FATF, OECD, Global Forum on Transparency and Exchange of Information और G20 की बैठकों में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया.
राहुल नवीन नवंबर 2019 में ED में OSD यानी ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी के तौर पर आए थे. उस समय उनकी बड़ी जिम्मेदारियों में FATF की Mutual Evaluation से जुड़ा काम शामिल था.
इसके बाद नवंबर 2020 में उन्हें ED में Special Director (HQ) बनाया गया. इस जिम्मेदारी के दौरान उन्होंने देशभर में चल रही मनी लॉन्ड्रिंग की जांचों के बीच समन्वय, दूसरे देशों के साथ सहयोग और कानूनी समझौतों के तहत विदेशी संपत्तियों की रिकवरी जैसे मामलों की निगरानी की.
यानी ED के डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभालने से पहले ही राहुल नवीन को आर्थिक अपराध, टैक्स चोरी, विदेशी लेनदेन, मनी लॉन्ड्रिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहयोग का लंबा अनुभव था.
अब नए आदेश के बाद वह अगस्त 2027 तक ED की कमान संभालेंगे. यानी आर्थिक अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ ED की मौजूदा कार्रवाई की अगुवाई राहुल नवीन आगे भी करते रहेंगे.
राहुल नवीन के नेतृत्व में ED का फोकस सिर्फ आरोपियों को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं रहा है. एजेंसी का जोर अपराध से कमाई गई रकम यानी Proceeds of Crime को ट्रैक करने और उस पैसे से बनाई गई संपत्ति पर कार्रवाई करने पर भी रहा है.
ED ने PMLA के तहत मामलों की पहचान और जांच के लिए अपने Risk-Based Approach को भी मजबूत किया है. इसके लिए Risk Assessment Management Committee के जरिए मामलों का आकलन किया जाता है.
इसके अलावा PMLA, FEMA और FEOA से जुड़े कामकाज के लिए विस्तृत मैनुअल तैयार किए गए हैं, ताकि अलग-अलग मामलों में जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित बनाया जा सके.
आर्थिक अपराधों का तरीका तेजी से बदल रहा है और इसे देखते हुए ED ने अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया है. ED की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक एजेंसी ने फॉरेंसिक लैब, डेटा सेंटर और इंटेलिजेंस सिस्टम जैसी सुविधाओं को मजबूत किया है.
इसके साथ ही देशभर में ED के क्षेत्रीय, जोनल और सब-जोनल कार्यालयों के नेटवर्क और वहां उपलब्ध तकनीकी और मानव संसाधन को भी मजबूत किया गया है.
राहुल नवीन के अनुभव का एक बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराध और दूसरे देशों की एजेंसियों के साथ सहयोग का रहा है. ED ने भी दूसरे देशों की जांच एजेंसियों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है.
मार्च 2025 में ED और मॉरीशस की Financial Crimes Commission के बीच वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए सहयोग का समझौता हुआ था. इसके बाद सितंबर 2025 में मॉरीशस में Financial Crimes Commission के अधिकारियों के लिए ED ने मनी लॉन्ड्रिंग और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस पर पांच दिन का क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी आयोजित किया.
राहुल नवीन के कार्यकाल में ED ने बैंक फ्रॉड, निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड, अवैध खनन और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े कई मामलों में कार्रवाई की है.
हाल के एक मामले में ED के लखनऊ जोनल ऑफिस ने फर्जी डिग्री और फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों से जुड़े केस में करीब 25.44 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अटैच की हैं.
एक अन्य मामले में ED ने Bhasin Infotech and Infrastructure और उससे जुड़े मामलों में 389 अचल संपत्तियां अटैच कीं. इनकी कीमत करीब 240.03 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि ED के मुताबिक इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत 700 करोड़ रुपये से ज्यादा है.
बैंक फ्रॉड के एक अन्य मामले में एजेंसी ने करीब 92.91 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कीं. वहीं डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों में नकदी, विदेशी मुद्रा, सोना-आभूषण, वाहन और डिजिटल उपकरणों समेत कई तरह की संपत्तियों को जब्त या फ्रीज किया गया.
आर्थिक अपराधों का तरीका अब तेजी से बदल रहा है. पहले जहां बैंक फ्रॉड और हवाला जैसे पारंपरिक तरीके सामने आते थे, वहीं अब डिजिटल अरेस्ट, शेल कंपनियां, क्रिप्टोकरेंसी, विदेशी बैंक अकाउंट, ऑनलाइन फ्रॉड और जटिल अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन के जरिए भी पैसों को इधर-उधर किया जा रहा है.
ऐसे समय में राहुल नवीन का इंटरनेशनल टैक्सेशन, FATF, दूसरे देशों के साथ वित्तीय जानकारी साझा करने और मनी लॉन्ड्रिंग जांच का अनुभव ED के लिए अहम माना जा सकता है.
नए एक्सटेंशन के बाद राहुल नवीन अगले एक साल तक ED की कमान संभालेंगे. उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बदलते हुए आर्थिक अपराधों से निपटना, डिजिटल और सीमा-पार मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर शिकंजा कसना और अपराध से अर्जित संपत्ति तक पहुंचना होगी.
8 अगस्त 2026 के सरकारी आदेश के मुताबिक राहुल नवीन का कार्यकाल 13 अगस्त 2027 तक बढ़ाया गया है. यह एक्सटेंशन उनकी 31 जुलाई 2027 की सुपरएनुएशन तारीख के बाद की सेवा को भी कवर करता है.
राहुल नवीन की अब तक की प्रोफेशनल यात्रा को देखें तो इंटरनेशनल टैक्सेशन, FATF, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहयोग, मनी लॉन्ड्रिंग जांच और ED के प्रशासनिक नेतृत्व का उनका अनुभव काफी लंबा रहा है. ऐसे में सरकार का एक साल का यह एक्सटेंशन ED में मौजूदा नेतृत्व और आर्थिक अपराधों के खिलाफ एजेंसी की रणनीति को अगले एक साल तक जारी रखने का संकेत माना जा सकता है.