Explainer: परिसीमन बिल क्या है, महिला आरक्षण कानून से इसका क्या कनेक्शन?
Raisina News Desk- अगस्त 09, 2026 10:15 PM IST

नई दिल्ली:
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच शनिवार को सोशल मीडिया पर बहस देखने को मिली. बहस भी परिसीमन बिल और महिला आरक्षण को लेकर हुई. राहुल के एक वीडियो पर रिजिजू ने जब लिखा कि उम्मीद है कि कांग्रेस महिला आरक्षण बिल का समर्थन करेगी तो राहुल ने भी जवाब देते हुए लिखा कि महिला आरक्षण बिल तो 2023 में ही पास हो चुका है.
इसके बाद रिजिजू ने फिर पोस्ट कर राहुल गांधी को जवाब दिया. किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के ‘महिला आरक्षण बिल तो 2023 में कांग्रेस के समर्थन से पास हो गया था’ के जवाब में लिखा कि महिला आरक्षण तब लागू होगा जब परिसीमन हो जाएगा.
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है. ये तब लागू होगा जब परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. उन्होंने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन को जल्द से जल्द करना जरूरी है.
अब जब सोशल मीडिया पर किरेन रिजिजू और राहुल गांधी बहस कर रहे हैं तो जानना जरूरी है कि आखिर परिसीमन का महिला आरक्षण से क्या लेना-देना है? अगर परिसीमन नहीं हुआ तो 2029 के आम चुनाव में महिला आरक्षण क्यों नहीं मिलेगा? लेकिन उससे पहले समझते हैं कि महिला आरक्षण क्या है?
सितंबर 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पास हुआ था. ये कानून लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान करता है.
इस कानून में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सिर्फ लोकसभा और विधानसभाओं में ही लागू होगा. राज्यसभा और विधान परिषद में ये आरक्षण लागू नहीं होगा.
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‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में कहा गया है कि महिलाओं को आरक्षण तब मिलेगा, जब परिसीमन होगा और परिसीमन तब होगा जब जनगणना होगी.
आजादी के बाद हर 10 साल में होने वाली जनगणना के बाद परिसीमन होता था. आखिरी बार परिसीमन 1973 में हुआ था. फिर दक्षिण के राज्यों ने आपत्ति जताई तो तत्कालीन इंदिरा गांधी की सरकार ने 1976 में संविधान संशोधन कर परिसीमन पर 2001 तक रोक लगा दी. फिर 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में 2026 तक रोक लगा दी गई.
यही कारण है कि सरकार संविधान में संशोधन करना चाहती है, ताकि परिसीमन पर लगी इस रोक को हटाया जा सके और महिलाओं को आरक्षण मिल सके. क्योंकि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहता है कि परिसीमन 2023 के बाद होने वाली जनगणना के आधार पर होगा.
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सरकार ने अप्रैल में 131वां संविधान संशोधन बिल पेश किया था. बिल में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन का प्रावधान है.
हालांकि, चूंकि यह बिल संविधान में संशोधन करता है, इसलिए इसे पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है. अप्रैल में जब इस बिल को पेश किया गया था तो इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे, जबकि इसे पास कराने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी.
केंद्र सरकार ने मई में महिला आरक्षण पर एक बुकलेट जारी कर कहा था कि अगर सरकार 2026 के बाद होने वाली जनगणना और फिर परिसीमन का इंतजार करती तो कानून बन जाने के बावजूद महिलाओं को 2029 के चुनाव से यह हक नहीं मिल पाता. सरकार का कहना है कि 2029 के चुनाव से ही महिला आरक्षण लागू करने के लिए संशोधन करना जरूरी है.
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परिसीमन बिल अगर पास हो जाता है तो इससे 3 बड़े बदलाव होंगे.
परिसीमन बिल पास होने के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 850 हो जाएंगी. इसमें 815 सीटें राज्यों में और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों में होंगी. आरक्षण लागू होने के बाद महिलाओं के लिए लोकसभा में 281 सीटें आरक्षित हो जाएंगी.
चूंकि, महिला आरक्षण बिल में साफ है कि परिसीमन के बाद ही आरक्षण लागू होगा. इसलिए परिसीमन इसमें सबसे जरूरी प्रक्रिया है.
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