ISRO से लेकर NASA तक के सैटेलाइट्स अब रहेंगे सुरक्षित, भारत के वैज्ञानिकों ने डिकोड किया सूर्य का महा-तूफान!

अंतरिक्ष के ऐसे कई रहस्य हैं, जो हमेशा वैज्ञानिकों को परेशान करते हैं. वैज्ञानिक लगातर इन रहस्यों स पर्दा उठाने की कोशिश में लगे रहते हैं. हाल ही में भारत के वैज्ञानिकों ने सूर्य के एक ऐसे बड़े रहस्य से पर्दा उठाया है, जो भविष्य में पृथ्वी के सैटेलाइट्स, इंटरनेट और पावर ग्रिड सिस्टम को तबाह होने से बचा सकता है. वैज्ञानिकों ने सूरज के ऊपरी वायुमंडल में एक बेहद तेजी से घूमने वाली प्रक्रिया का पता लगाया है, जिसने विज्ञान की पुरानी कई थ्योरी को पलट कर रख दिया है.

क्लासिकल फिजिक्स के नियम हुए फेल

एक नई स्टडी के अनुसार, सूरज के चारों ओर घूमने वाला एटमॉस्फीयर सूरज की दिखाई देने वाली सतह की तुलना में बहुत तेजी से घूमता है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सूरज की सतह से ऊंचाई जितनी बढ़ती जाती है, इसके वायुमंडल के घूमने की रफ्तार भी उतनी ही तेज होती जाती है. सूरज का यह व्यवहार क्लासिकल फिजिक्स के स्थापित नियमों और उम्मीदों को सीधी चुनौती देता है.

पृथ्वी के लिए क्यों अहम है यह खोज?

सूरज के बारे में हमारी समझ को बेहतर बनाने के अलावा, ये नतीजे सोलर एक्टिविटी और स्पेस वेदर के मॉडल को बेहतर बनाने में मदद करेंगे, जो पृथ्वी पर सैटेलाइट, कम्युनिकेशन सिस्टम, नेविगेशन नेटवर्क और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रभावित कर सकते हैं.

सूरज को हमारी संस्कृति में सदियों से जीवन और ऊर्जा के प्रतीक ‘सूर्य देव’ के रूप में पूजा जाता रहा है. लेकिन विज्ञान बताता है कि सूरज जितना आसान दिखता है, वास्तव में उतना सरल नहीं है. पृथ्वी की तरह सूरज का भी एक वायुमंडल है और वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि सूरज के घूमने के दौरान उसका विशाल वायुमंडल कैसे व्यवहार करता है.

ऊपर बाईं तस्वीर अंतरिक्ष से सोलर डायनामिक ऑब्ज़र्वेटरी और दाईं तस्वीर ज़मीन पर स्थित नोबेयामा रेडियोहेलियोग्राफ़ से ली गई है. नीचे बायां ग्राफ दिखाता है कि ऊंचाई बढ़ने पर सूरज के घूमने की रफ्तार बढ़ती है, जबकि नीचे दायां ग्राफ बताता है कि सनस्पॉट्स बढ़ने पर यह रफ्तार थोड़ी कम हो सकती है. 

सूरज फिजिक्स के नियम का ही नहीं करता पूरी तरह पालन

इसे ऐसे समझिए जैसे कोई आइस स्केटर एक जगह खड़े होकर घूम रहा हो. जब वह अपनी बाहें शरीर के पास लाता है तो उसकी घूमने की रफ्तार बढ़ जाती है और जब बाहें फैला देता है तो रफ्तार कम हो जाती है. यह फिजिक्स के एक नियम ‘कन्वर्जेशन ऑफ एंगुलर मोमेंटम’ के अनुसार होता है. पृथ्वी का वायुमंडल आमतौर पर इसी नियम का पालन करता है.

लेकिन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत काम करने वाले स्वायत्त संस्थान ARIES, उदयपुर सोलर ऑब्जर्वेटरी (USO), फिजिकल रिसर्च लैब (PRL) और अहमदनगर कॉलेज के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में पता चला है कि सूरज इस नियम का पूरी तरह पालन नहीं करता.

जापान के नोबेयामा रेडियोहेलियोग्राफ से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल करते हुए वैज्ञानिकों ने पाया कि सूरज का वायुमंडल उसकी दिखाई देने वाली सतह की तुलना में ज्यादा तेजी से घूमता है. यह बात क्लासिकल फिजिक्स के नियमों से मेल नहीं खाती.

2D इमेज-कोरिलेशन मेथड का किया इस्तेमाल

चूंकि सूरज ज्यादातर गैसों से बना है और उसकी कोई ठोस सतह नहीं है, इसलिए यह समझना मुश्किल है कि वह पृथ्वी की तरह कैसे घूमता है. इसे जानने के लिए वैज्ञानिकों ने ‘2D इमेज-कोरिलेशन मेथड’ का इस्तेमाल किया. इस तरीके में अलग-अलग दिनों में ली गई सूरज की तस्वीरों के समान हिस्सों को काटकर आपस में मिलाया और तुलना की गई. इससे यह पता लगाया गया कि एक तस्वीर दूसरी के मुकाबले कितनी खिसकी है. इसी बदलाव के आधार पर सूरज के घूमने की रफ्तार यानी रोटेशनल वेलोसिटी का हिसाब लगाया गया.

ARIES की श्रींजना राउथ और वैभव पंत, USO-PRL की अंशु कुमारी और अहमदनगर कॉलेज के जयदीप कांडेकर ने यह रिसर्च की है, जो ‘एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स लेटर्स’ जर्नल में प्रकाशित हुई है.



Prev Post
Next Post