आसमान का नया सिकंदर: 'सुपर सुखोई' को मिलेगा स्वदेशी ब्रह्मास्त्र, 350KM दूर से करेगा दुश्मन का खात्मा
Raisina News Desk- जुलाई 20, 2026 03:57 PM IST

भारत रक्षा क्षेत्र में लगातार नए-नए हथियार और टेक्नोलॉजी विकसित कर रहा है. इस लिस्ट में एक और नया नाम जुड़ने जा रहा है. भारतीय वायुसेना के सबसे घातक लड़ाकू विमान सुखोई (Su-30MKI) को अब एक ऐसा ‘देसी’ रडार मिलने वाला है, जो दुश्मनों की नींद उड़ा देगा. यह रडार 350 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के फाइटर जेट को ट्रैक कर लेगा और हमारी मिसाइलें उसे पलभर में तबाह कर देंगी. हम बात कर रहे हैं Hawk-I-2700 रडार सिस्टम की. खास बात यह है कि यह रडार देश की एक प्राइवेट कंपनी बना रही है.
प्राइवेट डिफेंस कंपनी डेटा पैटर्न यह रडार सिस्टम डेवलेप कर रहा है. हॉक आई (Hawk-I-2700) बेहद एडवांस और स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड (GaN) AESA रडार है. इसे भारतीय वायुसेना के सुखोई फाइटर जेट बेड़े में इस्तेमाल किया जाएगा.
Hawk-I-2700 रडार सुखाई (Su-30MKI) जैसे भारत के सबसे शक्तिशाली फाइटर जेट के लिए तो संजीवनी है ही, साथ ही कपंनी ने अब छोटे फाइटर जेट के लिए रडार का छोटा वर्जन तैयार किया है. इस छोटे वर्जन का नाम है ‘Hawk-I 900’. यह रडार मिग-29 और भारत के स्वदेशी तेजस (Mk1/Mk1A) विमानों के लिए डिजाइन किया गया है.
यह रडार भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा. फिलहाल इंडियन एयरफोर्स और नेवी के मिग-29 बेड़े में पुराने रूसी ‘Zhuk-ME’ रडार लगे हैं. इनमें ओवरहीटिंग जैसी समस्याएं आती रहती हैं. लेकिन हॉक आई रडार अब उनको रिप्लेस कर सकते हैं. इनकी सबसे अच्छी बात यह है कि उन्हें विमानों में फिट करने के लिए किसी बदलाव की जरूरत नहीं है.
हॉक-आई मल्टी-फंक्शन रडार है, जो सरफेस टू सरफेस और एयर टू एयर दोनों तरह के मिशन कर सकता है. यह रडार एक ही समय में 20 से ज्यादा अलग-अलग टारगेट पर नजर रख सकता है. बड़े रडार की तरह इसमें भी एक मैकेनिकल ‘स्वैशप्लेट’ दी गई है, जो एंटीना को मैकेनिकली मोड़ने की ताकत देती है. इससे पायलट को 100 डिग्री तक का एक विशाल ‘फील्ड ऑफ व्यू’ मिलता है, जो कि डॉगफाइट के दौरान गेम-चेंजर साबित होगा.