आसमान का नया सिकंदर: 'सुपर सुखोई' को मिलेगा स्वदेशी ब्रह्मास्त्र, 350KM दूर से करेगा दुश्मन का खात्मा



भारत रक्षा क्षेत्र में लगातार नए-नए हथियार और टेक्नोलॉजी विकसित कर रहा है. इस लिस्ट में एक और नया नाम जुड़ने जा रहा है. भारतीय वायुसेना के सबसे घातक लड़ाकू विमान सुखोई (Su-30MKI) को अब एक ऐसा ‘देसी’ रडार मिलने वाला है, जो दुश्मनों की नींद उड़ा देगा. यह रडार 350 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के फाइटर जेट को ट्रैक कर लेगा और हमारी मिसाइलें उसे पलभर में तबाह कर देंगी. हम बात कर रहे हैं Hawk-I-2700 रडार सिस्टम की. खास बात यह है कि यह रडार देश की एक प्राइवेट कंपनी बना रही है.

कौन बना रहा यह रडार? क्या खासियतें

प्राइवेट डिफेंस कंपनी डेटा पैटर्न यह रडार सिस्टम डेवलेप कर रहा है. हॉक आई (Hawk-I-2700) बेहद एडवांस और स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड (GaN) AESA रडार है. इसे भारतीय वायुसेना के सुखोई फाइटर जेट बेड़े में इस्तेमाल किया जाएगा.

  • यह रडार करीब 350 किलोमीटर की दूर से दुश्मन को ट्रैक कर सकता है. यानी यह हमारी सीमा के अंदर से ही पाकिस्तान और चीन के भीतर नजर रख सकता है. वहीं 2 वर्ग मीटर तक के छोटे विमानों को यह 250 किलोमीटर दूर से डिटेक्ट कर सकता है.
  • इस रडार में गैलियम नाइट्राइड (GaN) टेक्नोलॉजी है. पुराने रडार सिस्टम की तुलना में यह सेमीकंडक्टर तकनीक कम बिजली की खपत में बेहतरीन थर्मल मैनेजमेंट प्रदान करती है, जिससे रडार बिना ओवरहीट हुए लंबे समय तक काम कर सकता है.
  • यह रडार X-बैंड फ्रीक्वेंसी रेंज (8 से 12 GHz) पर ऑपरेट करता है और इसका पीक पावर आउटपुट 25.28 kW है. इसमें 2,400 से 2,700 तक ट्रांसमिट और रिसीव मॉड्यूल्स (TRMs) लगे हैं.
  • रडार में एक ‘Swash Controller Unit’ भी शामिल है, जो इसे और अधिक चौड़ा वाइडर फील्ड व्यू और बेहतर मल्टी-टार्गेट ट्रैकिंग क्षमता प्रदान करता है.

छोटे फाइटर जेट्स को बना देगा ‘सुपर जेट्स’

Hawk-I-2700 रडार सुखाई (Su-30MKI) जैसे भारत के सबसे शक्तिशाली फाइटर जेट के लिए तो संजीवनी है ही, साथ ही कपंनी ने अब छोटे फाइटर जेट के लिए रडार का छोटा वर्जन तैयार किया है. इस छोटे वर्जन का नाम है ‘Hawk-I 900’. यह रडार  मिग-29 और भारत के स्वदेशी तेजस (Mk1/Mk1A) विमानों के लिए डिजाइन किया गया है.

रडार के क्षेत्र में भारत बनेगा आत्मनिर्भर

यह रडार भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा. फिलहाल इंडियन एयरफोर्स और नेवी के मिग-29 बेड़े में पुराने रूसी ‘Zhuk-ME’ रडार लगे हैं. इनमें ओवरहीटिंग जैसी समस्याएं आती रहती हैं. लेकिन हॉक आई रडार अब उनको रिप्लेस कर सकते हैं. इनकी सबसे अच्छी बात यह है कि उन्हें विमानों में फिट करने के लिए किसी बदलाव की जरूरत नहीं है.

एक साथ कई शिकार करने में सक्षम

हॉक-आई मल्टी-फंक्शन रडार है, जो सरफेस टू सरफेस और एयर टू एयर दोनों तरह के मिशन कर सकता है. यह रडार एक ही समय में 20 से ज्यादा अलग-अलग टारगेट पर नजर रख सकता है. बड़े रडार की तरह इसमें भी एक मैकेनिकल ‘स्वैशप्लेट’ दी गई है, जो एंटीना को मैकेनिकली मोड़ने की ताकत देती है. इससे पायलट को 100 डिग्री तक का एक विशाल ‘फील्ड ऑफ व्यू’ मिलता है, जो कि डॉगफाइट के दौरान गेम-चेंजर साबित होगा.





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