कमरिया टूटत, करेजवा जरत है… जब UP में साउथ इंडियन डॉक्टर ने बोली ठेठ अवधी, VIDEO वायरल
Raisina News Desk- सितंबर 03, 2026 04:28 AM IST

“करेजवा जरत है. जी घबडात है. कमरिया टूटत है. कनवा सनसन होत. गरवा खसखसात है.” बोलने का यह ठेठ देसी अवधी अंदाज डॉक्टर अनीता मिश्रा का है. वह मूल रूप से कर्नाटक के मैंगलोर की रहने वाली हैं, लेकिन इन दिनों उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में तैनात हैं.
दक्षिण भारत में पली-बढ़ी और बचपन से कन्नड़ व अंग्रेजी बोलने वालीं डॉक्टर अनीता मिश्रा ने अवधी बोलते हुए अपना एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जो खूब वायरल हो रहा है. स्थानीय भाषा में उनकी इस बातचीत ने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है.
1 मिनट 41 सेकंड के इस वायरल वीडियो में डॉ. अनीता मिश्रा कहती हैं, “आप सब तो जानते ही हैं कि मैं एक साउथ इंडियन हूं और शादी के बाद ही मैंने हिंदी बोलना सीखा है. मेरी पसंदीदा भाषा अवधी है.”
अवधी भाषा की तारीफ करते हुए डॉ. अनीता मिश्रा आगे कहती हैं, “जब कोई अवधी में मुझसे बात करता है तो मुझे बहुत अच्छा लगता है. जब कोई मरीज अवधी भाषा में मुझे अपनी बीमारी के लक्षण बताता है तो काफी खुशी मिलती है. ऐसा लगता है जैसे कोई कविता सुना रहा हो.”
डॉ. अनीता मिश्रा ने मरीजों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली स्थानीय भाषा के उदाहरण देते हुए बताया कि मरीज अक्सर अपनी परेशानी इस तरह बताते हैं कि “हथवा झनझनात है. मूड पीरात है. गोड़वा टपकत है. पेट मरोड़त है. पेटवा में चिल-चिल दर्द होत है. अंखिया फड़फड़ात है. करेजवा जरत है. जी घबरात है. कमरिया टूटत है. कनवा सनसन होत. गरवा खसखसात है. जीभ मिचलात है. जीभ अकुलात है. हथवा टप-टप पिरात है. माथा भनभनात है.” मरीज कुछ इस तरीके से अवधी में अपनी बीमारी समझाते हैं.
डॉ. अनीता मिश्रा ने आगे कहा, “जब मैं इन सारे शब्दों का मतलब समझने लगी तो मुझे लगा कि मैं भी अवधी समझ जाती हूं. लेकिन एक दिन एक मरीज मेरे पास आई और बोली-‘डॉक्टर साहिबा! मेरा कनवा कुकुआत है और नटी कुकुआत है.’ यह सुनकर मैं फिर फंस गई और मुझे समझ आया कि अवधी जितना सीखो उतना कम है. जितना बोलो उतनी ही खुशी मिलती है. अवधी भाषा कोई कोर्स नहीं है जिसे आप खत्म कर सकते हैं. अवधी सीखना तो पूरे जीवन की एक यात्रा है. जय अवधी… जय गोंडा.”