गहरे समंदर में 'अदृश्य' होकर हमला करेगी चीन की 'काली मिसाइल', क्या भारतीय नौसेना के पास है इसका तोड़?
Raisina News Desk- अगस्त 31, 2026 05:11 PM IST

चीन अपने एडवांस डिफेंस सिस्टम और हथियारों के लिए जाना जाता है. चीन लगातार नए-नए हथियारों पर काम कर रहा है. इस बीच चीन ने अपनी नई स्टील्थ एंटी-शिप क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया है. यह मिसाइल रडार से बचकर हमला कर सकती है. यह मिसाइल YJ-18A का नया वैरिएंट है. चीन ने इसे स्पेशल स्टील्थ कोटिंग के साथ तैयार किया है. आखिर यह मिसाइल भारत की कितनी टेंशन बढ़ा सकती है? क्या भारत के पास इसका तोड़ है? आइए समझते हैं.
हांगकांग स्थित ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ ने डिफेंस एक्सपर्ट्स के हवाले से बताया कि काले रंग की परत वाली यह मिसाइल वाईजे-18ए का नया वैरिएंट है, जो समुद्र के ऊपर मिसाइल की मारक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ गहरे पानी में खुद को छिपा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, अज्ञात समुद्री क्षेत्र में मिसाइल परीक्षण के दौरान नौसेना के एक जहाज से एक मिसाइल दागी गई. यह परीक्षण इस स्टील्थ मिसाइल की क्षमता परखने के लिए किया गया. चीन के सरकारी चैनल ‘सीसीटीवी’ ने इसका वीडियो जारी किया था जिसमें मिसाइल पर काली परत स्पष्ट रूप से दिख रही थी.
एक्सपर्ट्स ने इस मिसाइल को वाईजे-18ए का एक वैरिएंट बताया है. यह स्टील्थ मिसाइल पहले धीमी गति से उड़ान भरती है और लक्ष्य के पास पहुंचने पर सुपरसोनिक यानी आवाज की स्पीड से कहीं अधिक तेज गति से हमला करती है. रिपोर्ट के अनुसार, इसे अक्सर 7,500 टन वजनी टाइप-052डी और 12,000 टन वजनी टाइप-055 विध्वंसक युद्धपोतों पर तैनात किया जाता है.
चीनी सैन्य मामलों के टिप्पणीकार और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पूर्व ट्रेनर सोंग झोंगपिंग ने ‘पोस्ट’ को बताया कि काली परत एक तरह की स्टील्थ परत है जिसमें रडार की तरंगों को सोखने की मजबूत क्षमता होती है. इससे दुश्मन के रडार की ओर वापस जाने वाली एनर्जी कम हो जाती है और मिसाइल का पता लगाना मुश्किल हो जाता है.
सोंग ने कहा कि काली परत का एक अन्य उद्देश्य भी है. उन्होंने कहा, ‘यह मान लेना ठीक नहीं है कि समुद्र हमेशा नीला होता है. वास्तव में, गहरे समुद्र का रंग काफी गहरा, यहां तक कि काला भी हो सकता है. इसलिए समुद्र के रंग से मिलती-जुलती यह मिसाइल रडार से बचाव के साथ-साथ नजरों से छिपने में भी मदद करती है.’
मूल वाईजे-18 की मारक क्षमता 540 किलोमीटर है. वहीं सरकारी अखबार ‘चाइना डेली’ की एक खबर के अनुसार, यह 966 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरती है और लक्ष्य के करीब पहुंचने पर इसका वारहेड मैक-3 की गति पकड़ सकता है.
चीनी सेना हाल के वर्षों में लड़ाकू विमानों और नौसैनिक फ्रिगेट सहित स्टील्थ टेक्नोलॉजी पर अधिक ध्यान दे रही है. स्टील्थ का मतलब ऐसी तकनीक से है, जिससे किसी विमान, ड्रोन, जहाज या मिसाइल को रडार और अन्य निगरानी प्रणालियों की मदद से पकड़ना मुश्किल होता है. इसमें छठी पीढ़ी के स्टील्थ विमान के साथ-साथ स्टील्थ ड्रोन, नौसैनिक विमानन और दुश्मन के स्टील्थ विमानों का पता लगाने या उन्हें निष्क्रिय करने के लिए विकसित प्रौद्योगिकियां शामिल हैं.
भारत भी अपनी डिफेंस क्षमता को लगातार बढ़ा रहा है. भारत के पास कई बेहद खतरनाक मिसाइल और डिफेंस सिस्टम हैं.
1. ब्रह्मोस मिसाइल: भारत की ब्रह्मोस मिसाइल पहले से ही दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है. इसकी स्पीड मैक 2.8 से मैक 3 तक है. साथ ही यह समुद्री और जमीनी दोनों लक्ष्यों पर हमला कर सकती है.
2. बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम: भारतीय नौसेना के कोलकाता क्लास डेस्ट्रॉयर्स, विशाखापत्तनम क्लास डेस्ट्रॉयर्स और नीलगिरि क्लास के युद्धपोत पर तैनात बराक-8 मिसाइलें आने वाली एंटी-शिप मिसाइलों को रोकने में सक्षम हैं.
3. MF-STAR और आधुनिक रडार: इसके अलावा भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर लगे MF-STAR AESA Radar, Revathi Radar और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ने वाली मिसाइलों का पता लगाने की क्षमता रखते हैं.