धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर देशभर में सियासी बयानबाजी शुरू, किसी ने बताया युवाओं की जीत तो किसी ने कहा अभी लड़ाई बाकी

नीट पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देशभर के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए लंबे प्रदर्शन के बाद आए इस फैसले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अलग-अलग संदेश दिए हैं. जिसमें कांग्रेस ने इसे युवाओं कि जीत बताया है. वहीं सत्ता पक्ष इसे सम्मान में लिया हुआ फैसला बता रहा है. 

कांग्रेस ने बताया युवाओं की जीत

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि यह देश के युवाओं, छात्रों और बेरोजगारों की जीत है. उन्होंने दावा किया कि केवल एक व्यक्ति के जाने से समस्या खत्म नहीं होगी क्योंकि व्यवस्था में व्यापक बदलाव की जरूरत है.

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही से हमेशा बचा नहीं जा सकता. उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और संस्थागत जवाबदेही की आवश्यकता पर भी जोर दिया.

प्रियंका गांधी ने इसे युवाओं की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि यह उन लोगों के लिए सबक है जो जनता की आवाज दबाने की कोशिश करते हैं. उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी.

सरकार बोली, छात्रों की भावनाएं सर्वोपरि

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार युवाओं एवं विद्यार्थियों की भावनाओं का सम्मान करती है. उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का गंभीरता से समाधान किया जा रहा है.

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने किसी दबाव में इस्तीफा नहीं दिया बल्कि यह उनका स्वयं का निर्णय था. उन्होंने छात्रों और अभिभावकों से पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील भी की.

क्षेत्रीय नेताओं ने भी दी प्रतिक्रिया

तेलंगाना के मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने कहा कि यह इस्तीफा पहले ही हो जाना चाहिए था. उन्होंने इसे छात्रों की एकजुटता की जीत बताया. वहीं पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह भारत के युवाओं की जीत है और युवाओं ने लोकतांत्रिक ताकत का परिचय दिया है.

कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने कहा कि इस्तीफा पर्याप्त नहीं है और पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा. पंजाब सरकार के मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने कहा कि इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि संविधान से ऊपर कोई नहीं है.


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