मुंबई के पीपी मार्ग का राजा बना हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल, 16 साल से गणराय की सेवा में जुटा खान परिवार

मुंबई का गणेशोत्सव केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक माना जाता है. इसी भावना को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है मुंबई के कामाठीपुरा इलाके का प्रसिद्ध पीपी मार्ग राजा गणेश मंडल, जहां एक मुस्लिम परिवार वर्षों से गणराय की सेवा में समर्पित है. मंडल के अध्यक्ष अब्बास खान पिछले 16 वर्षों से इस गणेशोत्सव से जुड़े हुए हैं और पूरी श्रद्धा के साथ इसकी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

साल 2009 में मंडल की कमान संभालने के बाद से अब्बास खान ने गणेशोत्सव को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सामाजिक एकता का मंच बनाने का प्रयास किया. मंडल के कार्यक्रमों में सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ शामिल होते हैं. गणेशोत्सव के दौरान मंडल में सेवा, सजावट, दर्शन व्यवस्था और सामाजिक उपक्रमों में हर वर्ग के लोग योगदान देते हैं.

अब्बास खान की पत्नी हसीना खान भी मंडल के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं. गणेशोत्सव की तैयारियों से लेकर विभिन्न आयोजन और व्यवस्थाओं तक वह अपने पति का पूरा सहयोग करती हैं. परिवार की नई पीढ़ी भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है. अब्बास खान के पुत्र साहिल खान भी मंडल में सक्रिय हैं और गणेशोत्सव के आयोजन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि पीपी मार्ग राजा गणेश मंडल केवल एक गणेश मंडल नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की जीवंत मिसाल है. यहां धर्म से अधिक महत्व इंसानियत और सामाजिक सद्भाव को दिया जाता है. मंडल में मुस्लिम समाज के लोग जहां पूरे उत्साह से सहभागिता करते हैं, वहीं बड़ी संख्या में हिंदू समाज के कार्यकर्ता भी कंधे से कंधा मिलाकर आयोजन को सफल बनाते हैं.

देश में समय-समय पर धार्मिक और साम्प्रदायिक मुद्दों पर राजनीति देखने को मिलती है, लेकिन ऐसे माहौल में पीपी मार्ग राजा गणेश मंडल का यह संदेश खास महत्व रखता है. अब्बास खान और उनका परिवार गणराय की सेवा के माध्यम से सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और सर्वधर्म समभाव का संदेश दे रहा है.

मुंबई की पहचान उसकी विविधता और गंगा-जमुनी संस्कृति रही है. पीपी मार्ग का राजा गणेश मंडल उसी संस्कृति को जीवंत रखे हुए है. यह कहानी केवल एक मुस्लिम परिवार की गणेश भक्ति की नहीं, बल्कि उस मुंबई की है जहां धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन दिल और भावनाएं एक होती हैं. गणेशोत्सव के इस मंच से दिया जा रहा हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश आज के दौर में समाज के लिए प्रेरणा बन गया है.



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