सीमा पर शांति फिर कौन सी 'जंग' में लाखों करोड़ स्वाहा कर रहा भारत, नोमुरा की चौंकाने वाली रिपोर्ट
Raisina News Desk- जुलाई 28, 2026 07:54 AM IST

नई दिल्ली:
सीमा पर शांति बनी हुई है फिर ये कौन सी जंग’ है, जो देश को अंदर ही अंदर खाये जा रही है, जिसमें भारत को हर साल लाखों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. भारत में जंग की वजह से हर साल सरकारी खजाने के लाखों करोड़ रुपये स्वाहा हो रहे हैं. अगर इस जंग का समाझान निकल आए तो देश को कितना फायदा होगा, क्या आपको पता है? देश को जंग लगने से कितना नुकसान होता है, इस बात का खुलासा नोमुरा ने एक रिपोर्ट में किया गया है. नोमुरा की रिपोर्ट के मुताबिक, जंग लगने की वजह से हर साल भारत की अर्थव्यवस्था को अनुमानित करीब 14 लाख करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ता है. अगर जंग का समाधान निकाल लिया जाए तो देश की जीडीपी में 1.5 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है.
जंग की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान देश के इलेक्ट्रिसिटी इंफ्रास्ट्रक्चर, बिल्डिंग्स, हाईवे, रेलवे, पुल और औद्योगिक संपत्तियों को नुकसान उठाना पड़ता है. फिर इनके रख रखाव पर सरकार को पैसा खर्च करना पड़ता है. इससे न सिर्फ राष्ट्रीय संपत्तियों की उत्पादकता कम होती है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और सरकारी खजाने पर भी बहुत बोझ बढ़ जाता है.
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नोमुरा की रिपोर्ट का अनुमान है कि जंग लगने से सबसे ज्यादा नुकसान बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन सेक्टर पर होता है, इसके बाद टेलीकॉम, ऑटोमोटिव, इंफ्रास्ट्रक्चर और रेलवे भी नुकसान झेलते हैं.
| सेक्टर | नुकसान | GDP पर असर |
| इंफ्रास्ट्रक्चर | 1,41,657 | 2.9% |
| पावर | 53,860 | 10.1% |
| टेलीकॉम | 38,320 | 3.8% |
| रेलवे | 23,788 | 2.8% |
| ऑटोमोटिव | 87,098 | 3.0% |
नोमुरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर जंग से बचाव के प्रभावी उपाय अपनाए जाएं तो देश की GDP में 1.5% तक का इजाफा किया जा सकता है. भारत को हर साल अनुमानित 14 लाख करोड़ रुपये का नुकसान जंग लगने की वजह से झेलना पड़ता है, जो कि जीडीपी के 4.3% के बराबर है.इसकी वजह से देश का इन्फ्रास्ट्रक्चर समय से पहले ही खराब हो जाता है और फिर इसको ठीक करने के लिए सरकारी खजाने पर एक्स्ट्रा बोझ पड़ता है.
नोमुरा की रिपोर्ट में जंग के नुकसान से बचाव के लिए जापान और अमेरिका का उदाहरण दिया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कई विकसित देश पर्यावरण के हिसाब से इन्फ्रास्ट्रक्चर को कैटेगराइज कर जंग से बचाव के तरीके तय करते हैं. लेकिन भारत में ऐसा नहीं होता है. हमारे देश में अलग-अलग मौसमी स्थितियों के बावजूद एक जैसे नियम ही ज्यादातर अपनाए जाते हैं. मॉनसून में जंग से बचाव के कोई खास उपाय अपनाए ही नहीं जाते हैं. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि देश में लंबे समय तक चलने वाली प्रॉपर्टीज को मजबूत बनाने के लिए सबसे बढ़िया तरीकों के पालन के लिए भारतीय स्टैंडर्ड को ग्लोबल स्टैडर्ड के मुताबिक बनाना बहुत जरूरी है.
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