मायावती से टकराव, सपा के पाले में गए चंद्रशेखर आजाद तो यूपी की इन सीटों पर होगी हलचल | mayawati vs chadrashekhar azad clash Akhilesh Yadav benefit know how
Raisina- जुलाई 12, 2026 10:34 AM IST

लखनऊ:
कभी बसपा सुप्रीमो मायावती दलित वोटों पर एकाधिकार रखने वाली नेता के तौर पर जानी जाती थीं. लेकिन अब नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी भी इसमें हिस्सेदारी रखती है. दोनों के बीच इसे लेकर खींचतान की स्थिति भी रही है, लेकिन पहली बार दोनों आमने-सामने आ गए हैं. मायावती ने मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम के घर चंद्रशेखर आजाद के पहुंचने और विरोध प्रदर्शन को लेकर टिप्पणी की थी. उनका कहना था कि चंद्रशेखर आजाद मगरमच्छी आंसू बहाते हैं. इतना कहना था कि अब तक मायावती को सम्मान से संबोधित करने वाले चंद्रशेखर आजाद भी के सुर भी तल्ख हो गए.
उन्होंने कहा कि अगर वाकई मायावती को दलितों के दर्द का एहसास होता तो घर में बैठकर बयान न देती. मेरठ में आकर पीड़ित परिवार से मिलती. पुलिस के जुल्म का विरोध करती. चंद्रशेखर ने कहा कि उन्होंने कभी मायावती पर पर्सनल कमेंट नहीं किया, लेकिन आज मायावती ने जिस तरह उन पर निजी टिप्पणी की, उससे वो निराश हैं. ऐसे में सवाल यह भी है कि यूपी विधानसभा चुनाव में चंद्रशेखर आजाद यदि सपा के साथ गए तो फिर क्या बदलेगा. चंद्रशेखर आजाद पश्चिम उत्तर प्रदेश में ही सक्रिय हैं, जिसे मायावती के लिए मजबूत गढ़ माना जाता था.
ऐसे में नगीना, बिजनौर, मेरठ, सहारनपुर, गाजियाबाद, आगरा समेत कई इलाकों में असर दिख सकता है. समाजवादी पार्टी इन इलाकों में कमजोर है, लेकिन बसपा मजबूत रही है. अब चंद्रशेखर आजाद और मायावती के बीच टकराव की स्थिति है. ऐसे में यदि चंद्रशेखर आजाद ने सपा का साथ दिया तो पश्चिम के इन इलाकों में सपा को ताकत मिल सकती है. इसके अलावा कई इलाकों में चंद्रशेखर आजाद भी अपनी पैठ जमा सकते हैं.
उदाहरण के तौर पर देखें तो गाजियाबाद सदर और लोनी जैसी सीटों पर आमतौर पर भाजपा ही जीतती रही है, लेकिन बसपा ने भी यहां से जीत हासिल की है. सपा कई सीटों पर तीसरे नंबर पर रहा करती थी. अब यदि दलित वोटों का बड़ा खेमा आजाद समाज पार्टी के चलते साथ आता है तो सपा को निश्चित तौर पर फायदा मिलेगा. फिलहाल दलित मतदाताओं में भी मायावती की कम सक्रियता के चलते विकल्प की तलाश है और वे चंद्रशेखर आजाद की ओर रुख कर सकते हैं. हालांकि अब तक गठबंधन को लेकर कोई गंभीर चर्चा शुरू नहीं हुई है, लेकिन कयास जोरों पर हैं कि अखिलेश और चंद्रशेखर इस बार साथ आ सकते हैं.