सिंधु जल समझौते पर कभी नरम नहीं पड़ेगा भारत, बस दो शर्त पर पाकिस्तान को मिलेगी राहत: सूत्र



बीते साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंध जल संधि को रोक दिया था. दशकों तक खून और पानी साथ बहता रहा था, लेकिन भारत ने कठोर कदम उठाते हुए सिंधु जल समझौते को रोक दिया था. अब सूत्रों का कहना है कि अब यह संधि पहले की तरह शायद ही कभी भारत मानेगा. भारत का रुख स्पष्ट है कि इस संधि पर पुनर्विचार तभी किया जा सकता है, जब पाकिस्तान आतंकवाद से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए. फिलहाल स्थिति ऐसी है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठन और उससे जुड़े लोग खुलेआम घूम रहे हैं. यहां तक कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी ऐसे तत्व दिखते हैं. भारत के सरकारी सूत्रों का कहना है कि इन तत्वों से निपटने के लिए पाकिस्तान ने कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाए हैं.

सूत्रों का कहना है कि अपने मौजूदा रूप में यह संधि भारत के लिए कभी काम नहीं करेगी. भारत सिंधु जल संधि पर दोबारा बातचीत करने में तभी दिलचस्पी लेगा, जब पाकिस्तान आतंकवाद छोड़ने के लिए ठोस कदम उठाए. 

पाकिस्तान के विक्टिम कार्ड की काट क्या

सूत्रों का कहना है कि भारत न्यूट्रल एक्सपर्ट्स के लेवल पर पाकिस्तान की कार्रवाई को नजरअंदाज करता रहेगा. भारत इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में पाकिस्तान की कार्रवाई को भी मान्यता नहीं देता है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की तरफ से सिंधु जल संधि को रोके जाने के एक साल बाद भी, इस्लामाबाद सिंधु जल संधि पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन पाने के लिए ‘विक्टिम कार्ड’ खेल रहा है. पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि से जुड़ी अपनी चिंताओं को लेकर एक ही समय में ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ और न्यूट्रल एक्सपर्ट्स (तटस्थ विशेषज्ञों) दोनों से संपर्क किया है. प्रक्रिया के हिसाब से यह गलत है, क्योंकि अपील के कई चरण होते हैं.

अपने किए की गलती भुगत रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान तर्क दे रहा है कि उसके देश में 24 करोड़ लोग पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि ये बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात है; क्योंकि पाकिस्तान में बहने वाला पानी सिंधु जल में भारत के कुल हिस्से से कहीं ज्यादा है. असल वजह है कि पाकिस्तान ने दशकों से पानी जमा करने के लिए कोई बड़ा स्टोरेज नहीं बनाया है. उल्टा भारत ने नदी के पानी से जुड़े जिन भी बड़े प्रोजेक्ट्स को शुरू करने की कोशिश की है, पाकिस्तान ने उन सभी पर आपत्ति जताई है. मौजूदा सिंधु जल संधि पर 1950 के दशक में बातचीत हुई और 1960 में पूरी हुई, मगर वह दशकों पुरानी टेक्नोलॉजी पर आधारित है. तब से हाइड्रोलॉजी टेक्नोलॉजी में बुनियादी बदलाव आ चुके हैं. सिंधु जल संधि के मानकों के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर या बांध बनाने की पुरानी तकनीकें अब भारत के लिए कारगर नहीं हैं.

बाढ़ आने पर जानकारी दे सकता है भारत

इसके अलावा, संधि की प्रस्तावना में कहा गया है कि यह ‘सद्भावना और दोस्ती की भावना’ के साथ की गई थी. पाकिस्तान ने आतंकवाद को बढ़ावा देकर इसका उल्लंघन किया है. अब कोई ‘सद्भावना’ नहीं बची है. सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान जितना पानी निकालता है, उसका लगभग 50% बर्बाद हो जाता है. पानी का एक बड़ा हिस्सा बहकर समुद्र में चला जाता है. हां, अगर पश्चिमी नदियों में बाढ़ आती है, तो भारत इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के जरिए जानकारी देगा. मगर ये भी सच है कि जब से सिंधु जल संधि को रोक दिया गया है, भारत कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है और उसने पाकिस्तान के साथ कोई डेटा या जानकारी साझा नहीं की है.

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