असम में बाढ़ का कहर, सीएम ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति को बताया 'बेहद गंभीर', 100 से ज्यादा लोग अभी भी लापता
Raisina News Desk- जुलाई 23, 2026 02:47 AM IST

गुवाहाटी: असम में लगातार हो रही बारिश के कारण बाढ़ की चपेट में आने से बुधवार को 21 और लोगों की मौत हो गई, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है. राज्य में बाढ़ से लगभग 5.65 लाख लोग प्रभावित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने बिगड़ती स्थिति का आकलन करने, बचाव कार्यों की समीक्षा करने और बाढ़ से विस्थापित परिवारों से मिलने के लिए बाढ़ प्रभावित शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों का दौरा किया.
इस दौरान उन्होंने नज़ीरा के डालबागान हायर सेकेंडरी स्कूल में बने राहत शिविर का निरीक्षण किया, जहां सैकड़ों लोगों ने शरण ली है. उन्होंने बाढ़ से प्रभावित परिवारों से बातचीत की. खाने और पीने के पानी, स्वास्थ्य सेवा और साफ-सफ़ाई की व्यवस्था का जायज़ा लिया. इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि विस्थापित हर परिवार को सभी जरूरी मदद मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा, “जब तक यह संकट खत्म नहीं हो जाता, हम बाढ़ से प्रभावित हर परिवार के साथ खड़े रहेंगे. राहत कैंपों में पर्याप्त भोजन, पीने का सुरक्षित पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और हर जरूरी सुविधा होनी चाहिए. किसी भी परिवार को बिना मदद के नहीं छोड़ा जाना चाहिए.” NDTV से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने ऊपरी असम के हालात को ‘बेहद गंभीर’ बताते हुए कहा कि नागालैंड के मोन जिले में बादल फटने और उसके बाद लगातार भारी बारिश की वजह से बाढ़ आई है.
नागालैंड के मोन ज़िले में बादल फटने और उसके बाद हुई भारी बारिश से खासकर चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट के कई इलाकों में बाढ़ आ गई है. इनमें से कई जगहों पर पहले कभी इतने बड़े पैमाने पर बाढ़ नहीं देखी गई थी. उन्होंने कहा कि बचाव दलों को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि बाढ़ के पानी की वजह से कई गांव कटे हुए हैं. उन्होंने कहा, यह अचानक आई बाढ़ है. कई जगहों पर तो सेना, NDRF और SDRF की टीमें भी नहीं पहुंच पाई हैं. कई मरीज अभी भी फंसे हुए हैं और हजारों परिवार पानी से घिरे हुए हैं. सीएम ने कहा कि सरकार चौबीसों घंटे काम कर रही है, लेकिन तबाही का पूरा अंदाजा बाढ़ का पानी उतरने के बाद ही लग पाएगा.
उन्होंने कहा, “मरने वालों और घायल लोगों की संख्या पहले से ही ज़्यादा है, जान-माल के कुल नुकसान का अंदाज़ा लगाने में कम से कम एक हफ़्ता लग सकता है. कुछ प्रभावित इलाकों में तो हम पीने के पानी की बोतलें भी नहीं पहुंचा पाए हैं. हालात बहुत गंभीर हैं और यह हमारे लिए बहुत चिंता की बात है.