कहां और कैसा है गांधी स्मृति, जहां NEET लीक के खिलाफ प्रदर्शन को पहुंचे राहुल गांधी और विपक्षी सांसद

नई दिल्ली:

नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्रों का प्रदर्शन अब सियासी रंग लेता जा रहा है. चार दिन से दिल्ली में हंगामा और बवाल हो रहा है. गुरुवार को भी लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में कई विपक्षी सांसद ‘गांधी स्मृति’ पहुंचे. हालांकि, उनके गांधी स्मृति पहुंचने से पहले काफी बवाल भी हुआ.

बस में चढ़ते हुए राहुल गांधी ने कहा कि छात्र सड़क पर हैं तो सभी विपक्षी सांसदों को लगा कि हमें सड़क पर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम पहले इंडिया गेट जाना चाहते थे लेकिन मना कर दिया तो हम गांधी स्मृति जा रहे थे.

इससे पहले X पर एक पोस्ट कर उन्होंने बताया कि इंडिया ब्लॉक के सांसद और नेता शांतिपूर्ण तरीके से गांधी स्मृति जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम उन छात्रों को याद करने जा रहे हैं, जिन्हें हमने खो दिया- वे बच्चे जिन्हें NEET पेपर लीक के बाद अपनी जान देने के लिए मजबूर होना पड़ा. उन्होंने कहा कि ‘भारत के छात्र अकेले नहीं हैं. पूरा विपक्ष उनके और उनकी मांगों के साथ खड़ा है.’

कहां है गांधी स्मृति?

‘गांधी स्मृति’ 30 जनवरी लेन पर स्थित है. इसे पहले बिरला हाउस या बिरला भवन कहा जाता है. अब इस जगह को म्यूजियम में तब्दील कर दिया गया है. 

यह वही जगह है जहां महात्मा गांधी ने अपने जीवन के आखिरी 144 दिन बिताए थे. इसी जगह पर 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. मूल रूप से यह घर भारतीय उद्योगपति बिरला परिवार का था. 

अब यहां ‘गांधी म्यूजियम’ है, जिसे 2005 में बनाया गया था. यह म्यूजियम सोमवार को छोड़कर हर दिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है.

Photo Credit: gandhismriti.gov.in

क्या है इसका इतिहास?

इस घर को 1928 में भारतीय उद्योगपति घनश्यामदास बिरला ने बनवाया था. इस घर में 12 बेडरूम हैं. सरदार वल्लभ भाई पटेल और महात्मा गांधी अक्सर बिरला परिवार के मेहमान हुआ करते थे. 

आजादी के बाद 9 सितंबर 1947 से लेकर 30 जनवरी 1948 तक महात्मा गांधी यहीं रुके थे. तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने घनश्यामदास बिरला को पत्र लिखकर बिरला हाउस के एक हिस्से को स्मारक में बदलने का अनुरोध किया था. हालांकि, वह इस घर और इससे जुड़ी यादों को छोड़ने के लिए बहुत इच्छुक नहीं थे. 

महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी अपनी किताब ‘Let’s kill Gandhi!’ में लिखते हैं कि 1966 में 1966 में केके बिरला ने ये घर सरकार को बेच दिया था. इसके बदले में सरकार ने बिरला परिवार को 54 लाख रुपये और दिल्ली की प्राइम लोकेशन पर 7 एकड़ जमीन दी थी. इतना ही नहीं, इस घर को बेचते समय बिरला परिवार ने आंगन के पेड़ों पर लगे फलों की कीमत भी लगाई थी.

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गांधी स्मृति में क्या-क्या है?

15 अगस्त 1973 को इसे आम जनता के लिए खोला गया और इसका नाम ‘गांधी स्मृति’ कर दिया गया.

यहां वह कमरा भी है, जहां महात्मा गांधी रहते थे और वह प्रार्थना स्थल जहां बड़ी सभाएं होती थीं. यही वह जगह है जहां नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की जान ली थी. इस इमारत और आसपास के इलाके को आज भी वैसा ही बनाए रखा गया है, जैसा उन दिनों में था.

गांधी स्मृति में गांधीजी के कमरे को ठीक वैसा ही रखा गया है जैसा वह उनकी हत्या के दिन था. उनकी सभी चीजें यहां रखी हुई हैं. उनका चश्मा, चलने की छड़ी, चाकू, कांटा और चम्मच, और साबुन की जगह इस्तेमाल किया जाने वाला खुरदरा पत्थर. उनका बिस्तर जमीन पर बिछा एक सादा सफेद गद्दा था, जिसके बगल में लकड़ी की एक नीची मेज रखी थी. यहां गीता की एक पुरानी और काफी इस्तेमाल की हुई प्रति भी रखी है.

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जिस जगह पर महात्मा गांधी की हत्या हुई थी, वहां एक ‘शहीद स्तंभ’ खड़ा है. इसके चारों ओर परिक्रमा के लिए एक फुटपाथ बनाया गया है. इस स्तंभ पर ‘हे राम’ और वह वक्त लिखा है, जब गांधीजी को गोली मारी गई थी.

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पूरी इमारत को अब अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है. साउथ विंग में काले-सफेद फोटोग्राफ के पैनल और सरल विवरण के जरिए मोहनदास करमचंद गांधी से महात्मा गांधी बनने तक के सफर को दिखाया गया है.

वहीं, नॉर्थ विंग में पांच अलग-अलग हिस्से हैं. पहला हिस्सा, यानी उस कमरे की ओर जाने वाली गैलरी जहां गांधीजी ने अपने जीवन के आखिरी 144 दिन बिताए थे. इसके बगल में दूसरा हिस्सा है, जो एक और कमरा है और जिसमें उनके जीवन के आखिरी 48 घंटों पर विशेष ध्यान दिया गया है. इस हिस्से में एक ऑडिटोरियम भी है जहां महात्मा गांधी पर फिल्में दिखाई जाती हैं.


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