धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का ऐलान और 3 घंटे 14 मिनट में सीजेपी का आंदोलन समाप्त, कैसे बदली पूरी कहानी

शनिवार को सीजेपी नेताओं और केंद्र सरकार के बीच तीसरे दौर की बातचीत तय थी. सुबह ही खबर आई कि अभिजीत दीपके को टायफायड हो गया है, पर वो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े नजर आए. राजनीतिक प्रेशर भी सरकार पर बढ़ता जा रहा था. राहुल गांधी का भी बयान आया कि धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलना भी कांग्रेस को मंजूर नहीं है. दोपहर ढाई बजे केंद्रीय मंत्रियों से वार्ता से पहले सीजेपी ने साफ किया कि धर्मेंद्र प्रधान नहीं हटे तो 20 जुलाई से भी कई गुना बड़ा आंदोलन होगा. 

इस्तीफे के बाद भी बढ़ गई टेंशन

लगभग इसी समय 2 बजकर 18 मिनट पर धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा देने की घोषणा सोशल मीडिया एक्स पर दो पेज में लिखकर की. हालांकि, उन्होंने पीएम को इस्तीफा कब भेजा है. जाहिर है, धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा एक दिन पहले या कम से कम सुबह पीएम मोदी को भेजा होगा. मगर इसकी योजना उन्होंने उससे भी पहले बना ली होगी. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ऐसा लगा कि अब जंतर-मंतर पर चल रहा धरना-प्रदर्शन समाप्त हो जाएगा. मगर पहले अभिजीत दीपके और फिर राहुल गांधी के बयानों से ऐसा लगा कि आंदोलन और आगे बढ़ेगा. अभिजीत दीपके ने नई मांग रखते हुए कहा कि जिन सुरक्षाकर्मियों ने 20 तारीख को छात्रों को पीटा है, वो सार्वजनिक रूप से छात्रों से माफी मांगे. वहीं राहुल गांधी ने सीधे पीएम मोदी से माफी की मांग कर दी.

Add image caption here

चार बजे तक आने लगी गुड न्यूज

चार बजे तक खबर आई कि दिल्ली मेट्रो ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बंद किए गए 18 स्टेशनों में से राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन के एंट्री गेट दोबारा खोल दिए हैं.  वहीं दिल्ली पुलिस ने युवाओं से अपील की कि वे जंतर मंतर को खाली करें और घर लौट जाएं. साढ़े पांच बजे तक जंतर-मंतर पर भी असमंजस की स्थिति रही. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कई युवा घर लौटने लगे थे और कई आगे की रणनीति के ऐलान का इंतजार कर रहे थे.

आखिर ऐसे खत्म हुआ जंतर मंतर प्रदर्शन

ठीक 5 बजकर 32 मिनट पर कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में चल रही वार्ता में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह और सीजेपी प्रतिनिधिमंडल में संगठन के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका प्रेस के सामने पहुंचे. यहीं पर सीजेपी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन वापस लेने की घोषणा की. सौरव दास ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी यह ऐलान करती है कि हम अच्छी नीयत से आंदोलन वापस ले रहे हैं, इस समझ के साथ कि तय शर्तों को तय टाइमलाइन के अंदर पूरा किया जाएगा. उनकी बातों से साफ लगा कि किसी भी पक्ष के पास अब अड़ने का कोई कारण नहीं था. सरकार ने किसी भी शर्त पर प्रदर्शन समाप्त करने का मन बना लिया था. खुद पीएम मोदी के दो-दो वीडियो से ये पहले ही साफ हो गया था. वहीं प्रधान के इस्तीफे के बाद भी अगर सीजेपी प्रदर्शन नहीं करती तो इससे अब तक उन्हें मिल रहा जन-समर्थन खत्म होने का अंदेशा था. क्योंकि ज्यादातर प्रदर्शनकारी मुद्दों पर जंतर-मंतर पहुंचे थे और अगर कोई राजनीतिक मांग वहां से उठती तो जाहिर है उसे सपोर्ट धीरे-धीरे नहीं मिलता.

किसको क्या मिला इस प्रदर्शन से

कुल-मिलकार इसमें सरकार ने चतुराई से काम लिया और पेपरलीक मामले को गंभीर मानते हुए प्रदर्शनकारियों की मांगों को मान लिया. अगर सरकार अपनी जिद पर अड़ी रहती तो जाहिर है ये प्रदर्शन लंबे समय तक खींचता और दिन-प्रतिदिन सरकार को मुश्किल का सामना करना पड़ता. अब सरकार की सबसे बड़ी कोशिश यही रहेगी कि युवाओं से किए वादों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए और एजुकेशन सिस्टम को दुरुस्त किया जाए. इन कामों को करके सरकार अपनी पीठ भी संसद में थपथपा सकती है. वहीं विपक्षी दलों को भी इस मुद्दे से संजीवनी मिल गई है. हालांकि, सरकार की तरफ से सारी मांगे मान लेने के बाद अब उनके पास बहुत ज्यादा ऑप्शन नहीं रह गया है. मगर, इस मुद्दे पर जनता, युवा, सरकार और विपक्ष की भूमिका साबित हो गई है और यही लोकतंत्र की खूबसूरती है.

वो लम्हा जब अभिजीत दीपके को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर मिली-Video

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर किसने क्या कहा? AAP से कांग्रेस तक ने कुछ यूं दी प्रतिक्रिया

फडणवीस की पत्नी बोलीं- मैं चाहती हूं वो महाराष्ट्र में ही रहें, संजय राउत के दावे के बाद अहम बयान



Prev Post
Next Post