Exclusive: कारगिल युद्ध में इजरायल से मिली 'सीक्रेट' मदद की अनसुनी कहानी
Raisina News Desk- जुलाई 27, 2026 09:11 AM IST

कारगिल युद्ध को 27 साल पूरे हो चुके हैं. इस युद्ध में भारतीय सेना के शौर्य ने पाकिस्तान को पस्त कर दिया था. लेकिन यह बात कम ही लोग जानते हैं कि इस युद्ध में भारत के करीबी दोस्त इजरायल ने भी एक अहम भूमिका निभाई थी. इजरायली वायुसेना के दो पूर्व अधिकारियों ने पहली बार एनडीटीवी से खास बातचीत में बताया है कि आखिर कारगिल युद्ध के दौरान कैसे इजरायल ने भारत की गुप्त मदद की थी.
एनडीटीवी ने इस बारे में राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स के पूर्व प्रोग्राम मैनेजर एमी और इजरायली वायुसेना के पूर्व फाइटर पायलट शलोमो से खास बात की है. एमी ने बातचीत के दौरान बताया है कि 1996 में भारत और इजरायल के बीच में एक अहम करार हुआ था जिसके तहत मिराज 2000 लड़ाकू विमानों में लाइटनिंग टारगेटिंग पॉड लगाना था. इस तकनीक के जरिए ही ठिकानों पर अचूक निशाना लगाने में मदद मिलनी थी.
इस बारे में एमी ने कहा कि 1996 से मार्च 1999 तक इजरायल के कई इंजीनियरों ने भारत के डीआरडीओ और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के अधिकारियों के साथ कई मुलाकातें की थीं. लंबे समय तक एक नए सिस्टम की टेस्टिंग की जा रही थी. एमी के मुताबिक मार्च 1999 में इस सिस्टम के शुरुआती परीक्षण हो चुके थे, लेकिन अभी भी कुछ काम बाकी था.
एमी बताते हैं कि टेस्टिंग के दौरान उन्हें एक शुक्रवार रात इजरायल में ही मौजूद भारत के तत्कालीन रक्षा प्रतिनिधि ग्रुप कैप्टन एन.ए.के. ब्राउन का फोन आया. आगे चलकर ब्राउन ही भारतीय वायुसेना के प्रमुख बने थे. ये कॉल भी ऐसे समय आया था जब इजरायल में काम बंद चल रहा था, वो शब्बात का महीना था.
एमी के मुताबिक उस एक फोन कॉल के बाद रविवार सुबह तक इंजीनियरों की एक फौज भारत के लिए रवाना हो चुकी थी. भारत पहुंचते ही एयरबेस के कमांडिंग ऑफिसर ने सिर्फ एक बात कही थी- स्थिति हमारी उम्मीद से कहीं ज्यदा गंभीर है. इसके बाद तो इजरायल के इंजीनियर और भारत के कई अधिकारी दिन-रात काम करते रहे.
उस वक्त को याद करते हुए इजरायली वायुसेना के पूर्व फाइटर पायलट शलोमो ने भी अपना अनुभव साझा किया है. वे कहते हैं कि उस दौदरान हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि आखिर तीन अलग-अलग देशों की तकनीक को साथ में कैसे लाया जाए. उनके मुताबिक भारत के पास इजरायल का लाइटनिंग टारगेटिंग पॉड था, फ्रांस का मिराज 2000 विमान मौजूद था और इसके अलावा अमेरिका के लेजर-गाइडेड बम भी ताकत बढ़ा रहे थे.
शलोमों के मुताबिक ये तीनों ही तकनीक बेहतर तालमेल के साथ कैसे साथ में इस्तेमाल की जाएं, यही बात एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई थी. शलोमो बताते हैं कि इस एक चुनौती से पार पाने के लिए उन्हें तब भारत के कई दौरे करने पड़े थे. कई प्रकार की तकनीकी समस्याओं को दूर करना था, कई स्तर की टेस्टिंग करनी थी.
एनडीटीवी से बातचीत के दौरान दोनों ही इजरायली ऑफिसर्स ने भारत के कुछ अधिकारियों की जमकर तारीफ की है. उनकी तरफ से खास तौर पर स्क्वाड्रन लीडर गर्शन अरोड़ा, राजीव कुमार दास (जो बाद में ग्रुप कैप्टन बने), एयर मार्शल रघुनाथ नांबियार और एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी का नाम लिया गया है. शलोमो बताते हैं कि टाइगर हिल पर भारतीय वायुसेना ने जो कार्रवाई की थी, वो अप्रत्याशित थी, हमले काफी सटीक थे. उनके मुताबिक उस ऑपरेशन ने ही इस युद्ध की दिशा बदल दी थी.
भारत के साथ अपने रिश्ते पर एमी ने भी खुलकर बात की है. उनका कहना है कि 1996 से 2004 के बीच उन्होंने भारत के 100 से ज्यादा दौरे किए थे. शलोमो के अनुसार वर्तमान में उनके बेटे इजरायल की रक्षा कंपनी एल्बिट सिस्टम्स में काम करते हैं. महीने में एक बार उनका भारत दौरा जरूर हो जाता है. ऐसे में दोस्ती का जो रिश्ता कई साल पहले कायम हुआ था, वो आज भी जारी है.
वैसे शलोमो पहली बार कारगिल आने वाले हैं. वे वहां पर कारगिल वॉर मेमोरियल और उन पहाड़ियों को देखेंगे जहां पूरा युद्ध लड़ा गया था. उनके मुताबिक ऐसा कर वे समझ पाएंगे कि कैसे हजारों किलोमीटर दूर बैठकर शुरू किए गए इस मिशन ने भारत की तब बड़ी मदद की थी.