पंजाब कांग्रेस में फिर गुटबाजी, भूपेश बघेल के सामने 'चन्नी जिंदाबाद' के नारे, राजा वड़िंग का भाषण पड़ा फीका
Raisina News Desk- अगस्त 02, 2026 05:59 AM IST

पटियाला:
पंजाब कांग्रेस के अंदर सुलग रही गुटबाजी की आग अब सरेआम तमाशा बनने लगी है. पार्टी में जारी अंदरूनी खींचतान उस वक्त खुलकर सामने आ गई, जब प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल के सामने ही कार्यकर्ताओं ने जमकर बवाल काटा. मामला पटियाला का है, जहां पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भाषण देने के लिए खड़े ही हुए थे कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों ने मंच के सामने ही नारेबाजी शुरू कर दी.
‘चरनजीत चन्नी जिंदाबाद’ और ‘चन्नी लाओ, पंजाब बचाओ’ के नारों से पूरा पंडाल गूंज उठा. बघेल की मौजूदगी में हुई इस नारेबाजी ने कांग्रेस के एकजुटता के दावों की हवा निकाल दी है.
पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी भूपेश बघेल राज्य के दौरे पर हैं, ताकि आगामी चुनावों से पहले संगठन को मजबूत किया जा सके और नेताओं का मूड भांपा जा सके. शनिवार को पटियाला के समाना में एक अहम बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक में चुनावी रोडमैप और संगठन के पुनर्गठन पर चर्चा होनी थी.
समर्थकों ने राजा वड़िंग की बात सुने बिना ही चरणजीत सिंह चन्नी के पक्ष में लगातार नारेबाजी शुरू कर दी. स्थिति यह हो गई कि भारी हंगामे और शोर-शराबे के बीच राजा वड़िंग को अपना भाषण रोकना पड़ा या उनकी आवाज नारों के शोर में दबकर रह गई.
आलाकमान के भेजे प्रतिनिधि भूपेश बघेल के ठीक सामने अपनी ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को इस तरह हुड़दंग का सामना करते देख मंच पर मौजूद वरिष्ठ नेता असहज नजर आए.
यह पहला मौका नहीं है जब भूपेश बघेल के दौरे के दौरान पंजाब कांग्रेस का कलह सामने आया हो. इससे एक दिन पहले (शुक्रवार) जब बघेल फतेहगढ़ साहिब पहुंचे थे, तब भी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन पर गंभीर आरोप लगाए थे.
पंजाब में खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने भूपेश बघेल को कमान सौंपी है. उनका काम सिर्फ चुनाव की रणनीति बनाना नहीं, बल्कि पार्टी के अलग-अलग धड़ों को एक मंच पर लाना भी है.
लेकिन बघेल के दौरे के शुरुआती दो दिनों में जिस तरह से गुटबाजी और कलह खुलकर सामने आई है, उससे साफ है कि उनकी राह आसान नहीं रहने वाली. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब तक कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व पंजाब के इन बड़े चेहरों और उनके समर्थकों की आपसी खींचतान पर लगाम नहीं लगाता, तब तक राज्य में पार्टी का कोई भी अभियान रंग नहीं ला पाएगा.
समाना की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पंजाब कांग्रेस अपने विरोधियों से लड़ने से पहले अपनी ही अंदरूनी कलह से जूझ रही है.