अमेरिकी संसद से पास हुआ रूस प्रतिबंध बिल; भारत पर 100% टैरिफ का खतरा बढ़ा, ट्रंप के हस्ताक्षर बाकी

वाशिंगटन:

रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी रणनीति अब नए चरण में पहुंच गई है. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों वाला महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिया है. इस बिल के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है. भारत और चीन जैसे देश, जो रूस के बड़े ऊर्जा खरीदार हैं, इस प्रस्ताव के दायरे में आ सकते हैं. हालांकि फिलहाल भारत पर कोई नया टैरिफ लागू नहीं किया गया है.

प्रतिनिधि सभा से पारित हुआ रूस प्रतिबंध बिल

न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को रूस के अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और उसके आर्थिक क्षेत्रों को निशाना बनाने वाले व्यापक प्रतिबंध पैकेज को मंजूरी दे दी. यह विधेयक 262 के मुकाबले 159 मतों से पारित हुआ. दक्षिण कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में तैयार किए गए इस विधेयक पर एक वर्ष से अधिक समय तक चर्चा और बातचीत चली थी. इसे अंतिम समर्थन तब मिला जब इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मांग के अनुरूप ईरान पर लागू प्रतिबंधों को पांच वर्ष तक बढ़ाने का प्रावधान शामिल किया गया.

अमेरिकी संसद में बिल पर वोटिंग के बाद की तस्वीर

यूक्रेन समर्थन से जुड़ा सबसे बड़ा कदम

ट्रंप के दोबारा व्हाइट हाउस लौटने के बाद यह विधेयक यूक्रेन के समर्थन में अमेरिका की सबसे बड़ी संसदीय पहल माना जा रहा है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी इस कानून के पक्ष में सक्रिय पैरवी की थी. मतदान से पहले उन्होंने अमेरिकी सांसदों से अपील की थी कि मौजूदा हालात में कोई निर्णय न लेने से बेहतर है कि उपलब्ध विकल्पों में से प्रभावी निर्णय लिया जाए.

रूस की ऊर्जा व्यवस्था और “शैडो फ्लीट” निशाने पर

विधेयक में रूस के राजनीतिक नेतृत्व, वित्तीय संस्थानों और बैंकिंग क्षेत्र पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है. इसके साथ ही उन जहाजों को भी निशाना बनाया गया है जिन्हें पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार कर रूसी तेल और ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति जारी रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इन्हें आमतौर पर रूस की “शैडो फ्लीट” कहा जाता है. अमेरिका का मानना है कि रूस का ऊर्जा कारोबार यूक्रेन युद्ध को आर्थिक सहायता प्रदान कर रहा है, इसलिए उस पर दबाव बढ़ाना आवश्यक है.

भारत पर क्या असर पड़ सकता है?

विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह प्रावधान है, जिसके तहत राष्ट्रपति को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पांच प्रमुख आयातक देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जाएगा. भारत और चीन वर्तमान में रूस के सबसे बड़े ऊर्जा खरीदारों में शामिल हैं. इसी कारण विधेयक के समर्थकों ने दोनों देशों को संभावित रूप से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देशों में माना है. हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि बिल पारित होने का मतलब भारत पर स्वतः 100 प्रतिशत टैरिफ लग जाना नहीं है.

राष्ट्रपति को मिलेगा विशेष अधिकार

कानून केवल अमेरिकी प्रशासन को ऐसा कदम उठाने का अधिकार देता है. टैरिफ लागू करना या न करना पूरी तरह राष्ट्रपति और प्रशासन के फैसले पर निर्भर होगा. यानी भारत के खिलाफ कोई भी शुल्क तभी लगाया जा सकेगा जब कानून लागू होने के बाद राष्ट्रपति इस प्रावधान का इस्तेमाल करने का निर्णय लें.

सीनेट से पहले ही मिल चुकी है मंजूरी

इससे पहले अमेरिकी सीनेट 7 अगस्त को इस विधेयक को 86-11 के भारी बहुमत से पारित कर चुकी थी. हालांकि प्रतिनिधि सभा में इसके टैरिफ वाले प्रावधानों को लेकर कुछ मतभेद सामने आए थे, जिसके चलते इसकी प्रक्रिया कुछ समय तक धीमी रही. अब प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक अंतिम चरण में पहुंच गया है.

अब ट्रंप के हस्ताक्षर का इंतजार

प्रतिनिधि सभा की मंजूरी के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा जाएगा. उनके हस्ताक्षर के बाद यह कानून का रूप ले सकता है. यदि ऐसा होता है तो अमेरिकी प्रशासन के पास रूस और उससे ऊर्जा कारोबार जारी रखने वाले देशों पर अतिरिक्त आर्थिक प्रतिबंध और टैरिफ लगाने की नई शक्तियां होंगी.



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