CBI ने विदेशी फंडिंग के बड़े नेटवर्क का किया भंडाफोड़, डेबिट कार्ड से करोड़ों रुपये निकालने के आरोप में FIR
Raisina News Desk- सितंबर 17, 2026 03:23 AM IST

विदेशी फंडिंग से जुड़े एक मामले में CBI ने दिल्ली में FIR दर्ज की है. मामला अमेरिका की संस्था The Timothy Initiative यानी TTI और उससे जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ है. FIR में आरोप लगाया गया है कि अमेरिका से आने वाले फंड को भारत में अलग-अलग जगहों के ATM से विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए निकाला गया और इन पैसों का इस्तेमाल TTI की गतिविधियों में किया गया.
CBI की FIR के मुताबिक यह मामला 2024 से 2026 के बीच का है और इसमें दिल्ली के अलावा कर्नाटक, छत्तीसगढ़, असम समेत कई जगहों का जिक्र है. FIR 27 अगस्त 2026 को दर्ज की गई है. आरोपियों में जोनाथन एस राजन, मीका मार्क, अजीत वर्गीस मथाई, वर्गीस चाको, बब्लू कुर्मी, सुप्रीम जॉय और अमेरिका की द टिमोथी इनिशिएटिव शामिल हैं.
ED की जांच रिपोर्ट के हवाले से MHA के दस्तावेज में कहा गया है कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब 92.55 करोड़ रुपये, यानी करीब 99.95 लाख अमेरिकी डॉलर, विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए निकाले और इस्तेमाल किए गए.
इसके अलावा जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच करीब 44 करोड़ रुपये अलग-अलग राज्यों में विदेशी डेबिट कार्ड से निकाले जाने की बात सामने आई है. ED के मुताबिक ये पैसे FEMA और FCRA के नियमों का पालन किए बिना इस्तेमाल किए गए. इस मामले में जांच एजेंसियों का खास फोकस विदेशी डेबिट कार्ड पर है.
दस्तावेज के मुताबिक 18 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर मीका मार्क को रोका गया. उसके पास ट्रूइस्ट बैंक अमेरिका के 24 विदेशी डेबिट कार्ड मिले. जांच में दावा किया गया कि इन सभी कार्डों पर एक ही नाम संतोष कुमार लिखा था. ED के मुताबिक ऐसा असली इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की पहचान छिपाने और KYC नियमों से बचने के लिए किया गया.
जांच एजेंसी के दस्तावेज में दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में 1000 से ज्यादा ऐसे विदेशी डेबिट कार्ड बांटे गए. इन कार्डों के जरिए अलग-अलग ATM से पैसा निकाला गया। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि कार्ड का इस्तेमाल उस व्यक्ति ने किया जो वास्तविक कार्डधारक नहीं था। एजेंसी का आरोप है कि इस पूरे सिस्टम के जरिए विदेशी पैसे को भारत में कैश के रूप में निकाला गया।
ED की रिपोर्ट में डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़ी एक अहम बात भी सामने आई है. दस्तावेज के मुताबिक 18 अप्रैल 2026 की सुबह Bill.com, QuickBooks और एक HP लैपटॉप में डेटा उपलब्ध था. लेकिन उसी दिन दोपहर के बाद भारत से जुड़े डेटा की पहुंच प्रतिबंधित हो गई और लैपटॉप को पूरी तरह वाइप किए जाने की बात सामने आई.
19 अप्रैल को QuickBooks पर भी भारत से जुड़े डेटा की पहुंच बंद होने का जिक्र है. ED के मुताबिक ये सिस्टम TTI India की वित्तीय प्रबंधन और लेखांकन से जुड़े व्यवसायों में उपयोग किया जाता था. ED के दस्तावेज में कहा गया है कि मीका मार्क से इस बारे में पूछताछ की गई तो उसने बताया कि डेटा क्लाउड पर था और TTI USA की तरफ से उसका एक्सेस ब्लॉक किया गया. इस घटना को जांच एजेंसी ने इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को गायब या उपलब्ध नहीं रहने देने से जोड़ा है.
ED की तलाशी में अजीत मथाई के ठिकाने से 37 लाख रुपये कैश मिलने की बात दस्तावेज में दर्ज है. सीजर मेमो के मुताबिक इसमें 500 रुपये के 7180 नोट, 200 रुपये के 100 नोट और 100 रुपये के 900 नोट शामिल थे. इसके अलावा एक विदेशी कॉरपोरेट कार्ड, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और लैपटॉप भी जब्त किए गए.
ED की रिपोर्ट में जोनाथन राजन को TTI India का ऑपरेशन इन चार्ज बताया गया है. आरोप है कि वह भारत में TTI की गतिविधियों के लिए फंड की जरूरत बताता था और ट्रेनिंग, लोगों के चयन और जगह तय करने जैसे काम देखता था.
अजीत मथाई को दस्तावेज में TTI India का फाइनेंस हेड बताया गया है. आरोप है कि विदेशी डेबिट कार्ड से पैसे निकालने और उन्हें बांटने की व्यवस्था उसकी निगरानी में होती थी. वहीं वर्गीस चाको, सुप्रीम जॉय और बबलू कुर्मी को फील्ड स्तर के कार्यकर्ताओं के तौर पर बताया गया है, जिन पर अलग-अलग ATM से विदेशी कार्ड के जरिए कैश निकालने का आरोप है.
ED की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि करीब 92.55 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल भारत में चर्च से जुड़ी और मिशनरी गतिविधियों के लिए किया गया और इसके लिए FCRA के तहत जरूरी रजिस्ट्रेशन या अनुमति नहीं ली गई तथा पैसा निर्धारित FCRA खाते के जरिए नहीं आया. दस्तावेज में TTI की भारत में करीब 95 करोड़ रुपये से ज्यादा की expenses होने का भी उल्लेख है.
MHA के FCRA विंग ने ED से मिली जानकारी के आधार पर मामले को आगे की जांच के लिए CBI को सौंपा. इसके बाद CBI की आर्थिक अपराध शाखा-II, नई दिल्ली ने FIR दर्ज की. FIR में FCRA की धाराओं के अलावा BNS की आपराधिक साजिश और सबूत गायब करने से जुड़ी धाराएं तथा IT Act की धाराएं लगाई गई हैं.
यानी जांच का फोकस अब इस बात पर है कि अमेरिका से आया पैसा भारत में किस तरीके से पहुंचा, विदेशी डेबिट कार्ड किसने और कितने लोगों को दिए, ATM से निकाले गए करोड़ों रुपये कहां इस्तेमाल हुए और डिजिटल रिकॉर्ड में बदलाव या डेटा हटाने के पीछे किसकी भूमिका थी.