भारत के स्वदेशी कावेरी इंजन ने रूस में दिखाया दम… 48.5 kN थ्रस्ट हासिल

भारत के स्वदेशी कावेरी इंजन ने रूस में दिखाया दम… 48.5 kN थ्रस्ट हासिल

कावेरी इंजन Image Credit source: TV9

भारत के स्वदेशी कावेरी इंजन ने रूस में हुए फ्लाइट ट्रायल के दौरान बड़ी कामयाबी हासिल की है. डीआरडीओ की GTRE लैब की ओर से विकसित कावेरी के ड्राई वर्जन ने टेस्ट के दौरान 48.5 किलोन्यूटन थ्रस्ट दिया है. खास बात ये है कि इंजन का लक्ष्य करीब 46 kN थ्रस्ट हासिल करना था, लेकिन कावेरी ने इससे बेहतर प्रदर्शन किया.

कावेरी का यह ड्राई इंजन आफ्टरबर्नर के बिना काम करता है. इसे भारत के भविष्य के स्टील्थ कॉम्बैट ड्रोन यानी UCAV के लिए विकसित किया जा रहा है. इसका फ्लाइट टेस्ट रूस में CIAM यानी Central Institute of Aviation Motors और Gromov Flight Research Institute की सुविधाओं में किया गया. टेस्ट के लिए Ilyushin IL-76 फ्लाइंग टेस्टबेड का इस्तेमाल हुआ. कावेरी वही जेट इंजन है जिसे कभी एक असफल प्रोजेक्ट माना जाता था. हालांकि, जबरदस्त थ्रस्ट (शक्ति) पैदा करके इसने वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत प्रतिष्ठा को और भी पुख्ता किया है.

तेजस के बाद ड्रोन के लिए कावेरी

कावेरी इंजन को शुरुआत में LCA तेजस के लिए स्वदेशी इंजन के तौर पर विकसित किया गया था. लेकिन उस समय इंजन तेजस की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त थ्रस्ट हासिल नहीं कर पाया. इसके बाद कावेरी की तकनीक को दूसरे प्लेटफॉर्म के लिए इस्तेमाल करने पर फोकस किया गया. अब इसके ड्राई वर्जन को स्वदेशी UCAV प्रोग्राम के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है.

अगला कदम क्या?

48.5 kN थ्रस्ट का सफल फ्लाइट टेस्ट कावेरी प्रोग्राम के लिए अहम पड़ाव है. हालांकि, ऑपरेशनल इस्तेमाल से पहले इंजन को अभी आगे के परीक्षण, प्रमाणन और UCAV के साथ इंटीग्रेशन की प्रक्रिया से गुजरना होगा.

कॉम्बैट ड्रोन क्षमता होगी मजबूत

अगर ये चरण भी सफल रहते हैं, तो भारत को भविष्य के कॉम्बैट ड्रोन के लिए स्वदेशी इंजन मिलने की दिशा में बड़ी बढ़त मिल सकती है. कावेरी का यह ट्रायल भारत की स्वदेशी एयरो-इंजन तकनीक और कॉम्बैट ड्रोन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

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