मानसून गया नहीं कि पानी के लिए हैदराबाद में हाहाकार, अक्टूबर में ही 233% बढ़ी पानी के टैंकरों की मांग
Raisina News Desk- अक्टूबर 26, 2026 09:45 AM IST
हैदराबाद में अभी गर्मियों का मौसम आया भी नहीं है और पानी के लिए लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है. मानसून खत्म हुए महज 17 दिन बीते हैं लेकिन शहर में पानी के टैंकरों की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. आमतौर पर मार्च और अप्रैल में टैंकरों की बुकिंग तेजी पकड़ती थी. इस बार अक्टूबर में ही हर दिन करीब 8 हजार टैंकर बुक हो रहे हैं. जल बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक इस महीने अब तक 62,565 टैंकरों की बुकिंग हो चुकी है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 18,806 था. यानी मांग में 233 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आने वाले महीनों में शहर की प्यास कैसे बुझेगी?
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पानी की कमी का असर अब घरों से लेकर संस्थानों तक दिखने लगा है. तेलंगाना के बासर स्थित यूनिवर्सिटी में पानी की किल्लत के चलते सोमवार से ऑनलाइन क्लास शुरू करने का फैसला लिया गया है. यहां रोजाना करीब 25 लाख लीटर पानी की जरूरत होती है जबकि आपूर्ति सिर्फ 10 लाख लीटर हो पा रही है. दूसरी तरफ शहर के कई इलाकों में अपार्टमेंट और आईटी दफ्तर टैंकरों पर निर्भर होते जा रहे हैं. करीब 20 हजार बोरवेल सूखने की जानकारी भी सामने आई है. कम बारिश और तेजी से गिरते भूजल स्तर ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं. अब जल बोर्ड ने लोगों से पानी की खपत 20 फीसदी तक कम करने की अपील की है.
हैदराबाद के तेजी से विकसित होते रिहायशी इलाकों में पानी की किल्लत ज्यादा महसूस की जा रही है. बोडुप्पल में पिछले साल के मुकाबले टैंकरों की मांग 22 गुना तक बढ़ने की जानकारी दी गई है. अपार्टमेंट और दफ्तरों में रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए टैंकर मंगाने पड़ रहे हैं. जल बोर्ड के लिए बढ़ती मांग के साथ आपूर्ति बनाए रखना चुनौती बन गया है. हालात को देखते हुए लोगों से पानी का इस्तेमाल सोच-समझकर करने को कहा गया है.
पानी की कमी के बीच अवैध बिक्री का मामला भी सामने आया है. सुन्नम चेरुवु झील के आसपास कुछ घरों में बिस्तर के नीचे और रसोई के अंदर बोरवेल लगाए जाने की जानकारी मिली. बताया गया कि पाइपलाइन के जरिए पानी स्टोरेज टैंकों तक पहुंचाया जाता था और फिर बड़े टैंकरों में भरकर बेचा जाता था. ड्रोन की मदद से कथित नेटवर्क का पता लगाया गया. इसके बाद 15 बोरवेल और उनसे जुड़ी पाइपलाइनें हटाई गईं.
इस साल हैदराबाद में बारिश भी औसत से काफी कम रही. शहर में सामान्य 627 मिलीमीटर के मुकाबले सिर्फ 458 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. यह करीब 27 फीसदी कम है. शहर के 16 में से 13 मंडलों में सामान्य से कम बारिश हुई. चारमीनार में बारिश की कमी 39 फीसदी और सैदाबाद में 38 फीसदी रही. इसका असर भूजल पर भी दिख रहा है. सितंबर 2025 की तुलना में सितंबर 2026 में ग्रेटर हैदराबाद और आसपास के शहरी क्षेत्रों में भूजल स्तर औसतन 22.5 फीट नीचे जाने की जानकारी दी गई है.
हैदराबाद को पानी उपलब्ध कराने वाले सिंगूर जलाशय की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है. इसकी कुल क्षमता 29.91 टीएमसी है. 17 अक्टूबर को यहां सिर्फ 3.416 टीएमसी पानी बचा था. यानी जलाशय अपनी क्षमता के करीब 11 फीसदी पर आ गया था. आकलन के मुताबिक मौजूदा दर से पानी निकाला गया तो सामान्य आपूर्ति के लिए भंडार 9 नवंबर तक ही पर्याप्त हो सकता है. विशेष पंपों से पानी निकालने पर आपूर्ति 10 दिसंबर तक बढ़ाए जाने की संभावना बताई गई है.
पानी का संकट केवल हैदराबाद तक सीमित नहीं है. केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक देश के 178 प्रमुख जलाशयों में करीब 123.2 अरब घनमीटर पानी उपलब्ध है. यह कुल क्षमता का लगभग 67 फीसदी है. पिछले साल इसी अवधि में जलाशयों में पानी का स्तर करीब 93 फीसदी था. दक्षिण भारत में स्थिति ज्यादा गंभीर बताई गई है. आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के 50 जलाशयों में उपलब्ध पानी उनकी कुल क्षमता का करीब 42 फीसदी है. अगर बारिश और जल भंडारण की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में कई शहरों के लिए पानी की आपूर्ति बड़ी चुनौती बन सकती है.