साइबर ठगी के 100 फ्रीज खाते खुलवाने के आरोप में वकील गिरफ्तार, ऐसे खुला था राज!
Raisina News Desk- अक्टूबर 26, 2026 06:08 PM IST
देशभर में साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने वाले नेटवर्क से जुड़े एक वकील को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान मुंबई के वकील रशेश भरतकुमार उपाध्याय उर्फ रशेश शाह के रूप में हुई है. ED का आरोप है कि वह साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क के फ्रीज बैंक खातों को रिश्वत के जरिए दोबारा खुलवाने में मदद करता था. आरोपी ने करीब 100 बैंक खातों को दोबारा चालू करवाने का दावा किया है.
एक मामले में 60 लाख रुपये से ज्यादा की रिश्वत दिए जाने का आरोप भी है. ईडी के अनुसार, आरोपी 24 अक्टूबर को मुंबई एयरपोर्ट पर दिल्ली जाने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट से निकलने की कोशिश कर रहा था. उसे विमान में चढ़ने से पहले पकड़ लिया गया. इस मामले में यह सातवीं गिरफ्तारी है. गोवा की विशेष PMLA अदालत ने आरोपी को 29 अक्टूबर तक ED की हिरासत में भेज दिया है.
ईडी की जांच गोवा पुलिस में दर्ज डिजिटल अरेस्ट ठगी के एक मामले से शुरू हुई थी. आरोप है कि साइबर ठगों ने खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बताकर गोवा की एक महिला और उसके पति को डराया. महिला को लगातार वीडियो निगरानी में रखा गया और सुप्रीम कोर्ट का फर्जी आदेश दिखाया गया. ठगों ने दंपती को कथित तौर पर यह विश्वास दिलाया कि वे एक गंभीर मामले में फंसे हैं.
इसके बाद उनसे करीब 2.6 करोड़ रुपये ऐसे बैंक खातों में ट्रांसफर कराए गए, जिन्हें सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट बताया गया था. ईडी अब इस रकम के आगे के लेन-देन और इससे जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है.
ईडी की जांच में सामने आया कि ठगी की रकम 400 से ज्यादा म्यूल बैंक खातों के जरिए आगे भेजी गई. म्यूल खाते वे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल अपराध से मिले पैसे को प्राप्त करने और दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है. इन खातों से रकम कमोडिटी, ट्रैवल और विदेशी मुद्रा कारोबार से जुड़ी कंपनियों तक पहुंचने का आरोप है.
जांच एजेंसी के मुताबिक, इन कंपनियों को फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद डमी निदेशकों के जरिए नियंत्रित कर रहे थे. ईडी का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए करीब 28,000 करोड़ रुपये के बैंक लेन-देन हुए और लगभग 2,900 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए. नेटवर्क से जुड़े बैंक खाते 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 300 से ज्यादा शिकायतों और 160 से अधिक FIR में सामने आए हैं.
इन मामलों में 400 करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान की शिकायतें हैं. इन आंकड़ों के आधार पर ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था और ठगी की रकम को किन-किन माध्यमों से आगे भेजा गया. ईडी के मुताबिक, रशेश उपाध्याय कथित तौर पर इस नेटवर्क की अहम कड़ी था. साइबर ठगी की शिकायतों के बाद जब जांच एजेंसियां नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज करती थीं, तो आरोपी कथित तौर पर संबंधित अधिकारियों तक रिश्वत पहुंचाने और खाते दोबारा खुलवाने की व्यवस्था करता था.
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस काम में हवाला या नकदी पहुंचाने वाले बिचौलियों, जिन्हें अंगड़िया कहा जाता है, की मदद ली जाती थी. आरोपी कथित तौर पर रिश्वत की रकम तय करने, नकदी पहुंचाने की जगह निर्धारित करने और भुगतान का इंतजाम करने में भूमिका निभाता था.
ईडी का दावा है कि आरोपी ने करीब 100 बैंक खातों को दोबारा चालू करवाने की बात स्वीकार की है. इनमें एक मामले में 60 लाख रुपये से अधिक की रकम का भुगतान शामिल बताया गया है. एजेंसी के अनुसार, फ्रीज खातों के दोबारा चालू होने से नेटवर्क को ठगी की रकम तक फिर पहुंच मिल जाती थी और पैसे को आगे भेजने का सिलसिला जारी रह सकता था.
ईडी का आरोप है कि जांच एजेंसी की छापेमारी के बाद भी रशेश उपाध्याय ने कथित गतिविधियां बंद नहीं कीं. वह ED की ओर से फ्रीज किए गए कुछ खातों को दोबारा खुलवाने के प्रयास में भी शामिल था. जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी ने सह-आरोपियों के साथ हुई बातचीत के चैट डिलीट कर दिए और अपने ज्ञात मोबाइल नंबर बंद कर लिए. इसके बाद उसने मुंबई से निकलने की कोशिश की. ईडी ने मुंबई कस्टम्स और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की मदद से उसे एयरपोर्ट पर पकड़ लिया.
ईडी के मुताबिक, रशेश उपाध्याय वकील के तौर पर पंजीकृत था, लेकिन उसने नेटवर्क से जुड़े सह-आरोपियों या उनकी कंपनियों की ओर से अदालत में पेशी नहीं की थी और न ही उनका वकालतनामा दाखिल किया था. जांच एजेंसी का आरोप है कि उसने अपनी पेशेवर पहचान का इस्तेमाल कथित तौर पर रिश्वत के लेन-देन और फ्रीज खातों को खुलवाने के लिए किया.
ईडी का कहना है कि गैरकानूनी गतिविधियों में मदद करने या अपराध से जुड़े संवाद को वकील-मुवक्किल के बीच गोपनीय बातचीत का संरक्षण नहीं दिया जा सकता. इस मामले में एजेंसी पहले ही छह लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनमें नेटवर्क को नियंत्रित करने के आरोपी फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद के अलावा बैंक खातों की व्यवस्था करने और फ्रीज खाते खुलवाने में मदद करने के आरोपी एजेंट शामिल हैं.
फिलहाल ईडी इस बात की जांच कर रही है कि कथित रिश्वत किन अधिकारियों तक पहुंचाई गई, इसमें कौन-कौन से अंगड़िया और अन्य बिचौलिए शामिल थे और अपराध से अर्जित आय का कुल दायरा कितना है. करीब 28,000 करोड़ रुपये के बैंक लेन-देन और 2,900 करोड़ रुपये नकद जमा होने के दावों के बीच जांच एजेंसी की नजर पूरे नेटवर्क की वित्तीय कड़ियों पर है.