हाईकोर्ट में वकीलों की हिंसा पर इलाहाबाद HC सख्त, आपराधिक अवमानना और FIR की सिफारिश
Raisina News Desk- नवंबर 02, 2026 09:34 PM IST
इलाहाबाद हाईकोर्ट के कोर्ट नंबर 49 में 28 अक्टूबर को हुए हंगामे, मारपीट और तोड़फोड़ के मामले में हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने घटना को न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर हस्तक्षेप और आपराधिक अवमानना का प्रथम दृष्टया मामला माना है. साथ ही संबंधित वकीलों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने और FIR दर्ज कराने के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष मामला रखने का निर्देश दिया है.
दरअसल, 28 अक्टूबर की सुबह जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की पीठ जब कोर्ट रूम पहुंची तो वहां पहले से मौजूद वकीलों का एक समूह नारेबाजी और हंगामा कर रहा था. शोर-शराबे और आक्रामक व्यवहार के चलते अदालत को अपनी कार्यवाही रोककर उठना पड़ा.
अदालत के आदेश के मुताबिक, पीठ के कोर्ट से उठने के बाद कुछ वकीलों ने सरकारी अधिवक्ता यानी एजीए-वन परितोष कुमार मालवीय के साथ कोर्ट रूम में मारपीट की. उन्हें गंभीर चोटें आईं और वह किसी तरह जान बचाकर जजों के चैंबर तक पहुंचे. अन्य सरकारी अधिवक्ताओं, कोर्ट कर्मचारियों और सुरक्षा में तैनात पुलिस एवं सीआरपीएफ कर्मियों के साथ भी मारपीट किए जाने की बात सामने आई. कोर्ट रूम में रखे फर्नीचर को भी नुकसान पहुंचाया गया.
मामले में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट और उपलब्ध वीडियो फुटेज का भी अदालत ने संज्ञान लिया. पीठ ने कहा कि इस घटना से न सिर्फ न्यायिक कार्यवाही बाधित हुई, बल्कि अदालत की गरिमा और न्याय प्रशासन पर भी गंभीर हमला हुआ है.
अदालत ने सोशल मीडिया पर घटना को लेकर प्रसारित भ्रामक और कथित तौर पर फर्जी पोस्ट पर भी कड़ी नाराजगी जताई. आदेश में ऐसे पोस्ट को हटाने और संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पर विचार करने की बात कही गई है.
हाईकोर्ट ने मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजते हुए संबंधित वकीलों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही और हिंसा, साजिश, उकसावे तथा तोड़फोड़ के आरोपों में एफआईआर दर्ज कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने पर विचार करने का अनुरोध किया है.
जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की पीठ ने स्पष्ट किया कि बार और बेंच के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हिंसा, धमकी और न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने की कोई जगह नहीं है.