बिहार में अब नदियों की गाद से बनेंगे हाईवे, NHAI और सम्राट सरकार के बीच MoU पर साइन
Raisina News Desk- नवंबर 03, 2026 06:34 PM IST
NHAI और बिहार सरकार के बीच MoUImage Credit source: X/@nitin_gadkari
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अब बिहार में नदियों और जलाशयों से निकाली गई गाद का इस्तेमाल राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के विस्तार के लिए मुख्य सामग्री के रूप में करेगा. इसको लेकर मंगलवार को NHAI और बिहार सरकार के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर साइन हुए. इस मौके पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इस पहल से पर्यावरण की रक्षा करने, परिवहन लागत कम करने और समय बचाने में भी मदद मिलेगी.
नितिन गडकरी ने बताया कि बाढ़ के कारण बिहार को हर साल लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में हमारा लक्ष्य इस पहल के जरिए धीरे-धीरे बिहार को बाढ़ मुक्त बनाना है. उन्होंने कहा कि अगर हम सफल होते हैं, तो एक दिन ऐसा आएगा जब बिहार को बाढ़ की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा. गडकरी ने बताया कि नदियों में जमे गाद ने उनकी जल-वहन क्षमता को काफी प्रभावित किया है, जिससे बाढ़ आती है, कृषि भूमि को नुकसान पहुंचता है और संपत्ति का भी नुकसान होता है.
दरअसल, बिहार को अक्सर बाढ़ और पानी की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इसका एक मुख्य कारण नेपाल से निकलने वाली नदियां हैं, जो अपने साथ भारी मात्रा में पानी और गाद लेकर राज्य में आती हैं. नितिन गडकरी ने जोर देकर कहा कि वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने से पानी के बहाव और निकासी में सुधार होगा, जल निकायों का पुनरुद्धार होगा और राजमार्ग निर्माण के लिए जरूरी सामग्री भी मिल सकेगी.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह पहल एक ऐसा ढांचा तैयार करेगी जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होगा. इसमें नदियों के पुनरुद्धार से बुनियादी ढांचे के विकास में मदद मिलेगी और निकाली गई गाद का उपयोग करने से नई मिट्टी या कृषि योग्य मिट्टी पर निर्भरता कम होगी. गडकरी ने आगे कहा कि इससे उपजाऊ कृषि भूमि को बचाने, निर्माण लागत को कम करने और राजमार्ग परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इसे बिहार सरकार के साथ मिलकर लागू किया जाएगा, जिसमें उचित तकनीकी मूल्यांकन और सुरक्षा उपाय शामिल होंगे.
इस पहल पर भरोसा जताते हुए गडकरी ने कहा कि इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है, जहां इसी तरह की चुनौतियां हैं. इससे टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास और जल प्रबंधन में सुधार को बढ़ावा मिलेगा.
वहीं, एनएचएआई (NHAI) ने एक बयान में कहा कि बिहार में चल रही और प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए लगभग 243 लाख क्यूबिक मीटर गाद की जरूरत है. बताया गया है कि बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के तहत 39 परियोजनाएं चल रही हैं, जो लगभग 1,561 किमी में फैली हैं और इनकी अनुमानित लागत 58,340 करोड़ रुपये है. इसके अलावा 11 प्रस्तावित परियोजनाएं हैं, जो लगभग 1,982 किमी में फैली हैं और इनमें 1,85,200 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है.
बयान के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य विकास से जुड़ी दो महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं को पूरा करना है. पहली, गाद के कारण प्रभावित हुए जल निकायों की पानी ले जाने और रोकने की क्षमता को बहाल करना और दूसरी राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए उपयुक्त मिट्टी और भराव सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना.
बिहार सरकार और NHAI के बीच हुए इस समझौते को ‘बिहार जल स्रोत पुनरुद्धार और गाद प्रबंधन नीति 2026’ और अन्य लागू पर्यावरणीय और कानूनी नियमों के अनुसार लागू किया जाएगा. बयान के मुताबिक, गाद निकालने का काम वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा, जिसके लिए पहले चिह्नित जल निकायों का विस्तृत तकनीकी आकलन किया जाएगा. बिहार सरकार का सड़क निर्माण विभाग (RCD) इसमें नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगा. बयान में कहा गया है कि राज्य स्तरीय समन्वय समिति परियोजना प्रस्तावों, मंजूरियों, काम की प्रगति, नियमों के पालन और संचालन से जुड़ी समस्याओं की समीक्षा करेगी.
इस समझौता ज्ञापन (MoU) में ऐसे सुरक्षा उपाय शामिल हैं, जिनसे यह सुनिश्चित हो सके कि गाद निकालने के काम से पारिस्थितिक संतुलन, नदी के किनारों, तटबंधों, पुलों या अन्य ढांचों पर कोई बुरा असर न पड़े. गाद निकालने की अनुमति केवल स्वीकृत जगहों पर और तकनीकी रूप से तय की गई सीमाओं के भीतर ही दी जाएगी. राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए निकाली गई गाद की गुणवत्ता और उपयुक्तता की जांच, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के तय मानकों और इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) के नियमों के अनुसार की जाएगी.
दरअसल, बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 2014 में 4,615 किमी था, जो बढ़कर अब लगभग 6,500 किमी हो गया है. इसके अलावा 2014 से बिहार की प्रमुख नदियों पर लगभग 29 नए पुलों का निर्माण किया गया है, ताकि क्षेत्रीय संपर्क और लोगों तथा सामानों की आवाजाही को और मजबूत किया जा सके.