Punjab: पार्टी से निकाले गए तीनों नेता गंभीर मामलों में आरोपी थे… AAP ने उठाये सवाल, BJP पर साधा निशाना
Raisina News Desk- नवंबर 03, 2026 01:20 PM IST
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के तीन बागी नेताओं को भाजपा में शामिल किए जाने पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है. आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाया है कि जिन कुंवर विजय प्रताप सिंह, चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा के खिलाफ पहले ही पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोपों में अनुशासनात्मक कार्रवाई कर चुकी है, उन्हें अब भाजपा ने अपने खेमे में कैसे शामिल कर लिया.
आपके मुताबिक इनमें एक नाम सनौर के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा का है, जिनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के गंभीर आरोपों में मामला दर्ज है. इतना ही नहीं, सितंबर 2025 में हरियाणा के करनाल में गिरफ्तारी के दौरान पंजाब पुलिस पर फायरिंग और पथराव के बीच फरार हो गया था. इसके बावजूद दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनके साथ मंच साझा किया और उन्हें औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल कराया.
आप नेताओं ने सवाल खड़े किए हैं कि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे विधायक के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने मंच साझा करने का फैसला किस आधार पर किया? क्या पार्टी ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की समीक्षा की थी? और अगर की थी, तो सार्वजनिक रूप से उसका आधार बताने में क्या आपत्ति है? चुनाव से पहले भाजपा की इस राजनीतिक भर्ती को लेकर आम आदमी पार्टी ने भी सवाल उठाए हैं.
सबसे गंभीर सवाल पठानमाजरा को लेकर उठ रहा है. सितंबर 2025 में पटियाला में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के आरोपों में एफआईआर दर्ज हुई थी. शिकायत में उनकी वैवाहिक स्थिति और शादी के आश्वासन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे. मई 2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दी थी. अदालत ने पासपोर्ट जमा कराने, पुलिस के सामने उपस्थित होने और शिकायतकर्ता या गवाहों से संपर्क नहीं करने जैसी शर्तें भी लगाई थीं. यह मामला आपराधिक आरोपों से जुड़ा है और जमानत मिलने को दोषमुक्त होने के बराबर नहीं माना जा सकता.
उधर, पूर्व मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा के भाजपा में जाने से उनके पुराने राजनीतिक फैसले भी चर्चा में आ गए हैं. जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में मंत्री रहे हैं. लेकिन जनता के कामों में लापरवाही बरतने पर कैबिनेट से हटा दिए गए थे. उनके सामने यह सवाल है कि सरकार में रहते हुए जिन नीतियों और फैसलों का वह हिस्सा थे, उनसे असहमति का स्वर मंत्री पद से हटने के बाद क्यों तेज हुआ?
आम आदमी पार्टी ने इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है. AAP के पंजाब नेतृत्व का कहना है कि पार्टी ने अपने नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ भी आरोप सामने आने पर कार्रवाई की है, जबकि भाजपा गंभीर आरोपों का सामना कर रहे नेताओं को शामिल कर रही है. AAP अपने संगठनात्मक अनुशासन को इस मामले में एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दे के रूप में सामने रख रही है. पार्टी का कहना है कि उसका संगठन किसी एक नेता के बजाय कार्यकर्ताओं, सामूहिक नेतृत्व और जनता से जुड़े मुद्दों के आधार पर काम करता है.
सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि जिस विधायक पर दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं, उसे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ मंच पर स्थान देने का फैसला किस आधार पर हुआ? भाजपा को इसका जवाब देना चाहिए. साथ ही तीनों नेताओं को भी स्पष्ट करना होगा कि जिस पार्टी के टिकट पर वे जनता के प्रतिनिधि बने थे, उसे छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने के पीछे उनके नीतिगत और राजनीतिक कारण क्या हैं.
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस घटनाक्रम ने दल-बदल की राजनीति, महिला सुरक्षा, पार्टी अनुशासन और नेताओं की सार्वजनिक जवाबदेही को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है. आम आदमी पार्टी अपने पहले के अनुशासनात्मक फैसलों और सरकार के कामकाज को सामने रख रही है, जबकि भाजपा इन दागी नेताओं के भरोसे है. लेकिन किसी भी पार्टी का झंडा बदलने से नेताओं का पिछला रिकॉर्ड और उनके खिलाफ उठे सवाल खत्म नहीं हो जाते. इन सवालों का जवाब राजनीतिक दलों और संबंधित नेताओं, दोनों को देना होगा.