अमृतसर से जामनगर 13 घंटे में, भठिंडा, बीकानेर, जोधपुर तक हाई स्पीड कनेक्टिविटी, पंजाब से जुड़ेंगे 3 बडे़ राज्य
Raisina News Desk- सितंबर 18, 2026 02:22 PM IST

अमृतसर से जामनगर का 1316 किलोमीटर का सफर अब 26 घंटे की जगह 13 घंटे में तय हो जाएगा. क्योंकि दोनों शहरों के बीच बन रहा अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे पंजाब से गुजरात के बीच हाईस्पीड कनेक्टिविटी देगा. इस हाईवे से चार बड़े राज्य पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात कनेक्ट हो जाएंगे, जिससे 15 बड़े शहरों के बीच की दूरी भी कम हो जाएगी. भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह प्रोजेक्ट इंडिया का दूसरा सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है. 80,000 करोड़ की भारी भरकम लागत से तैयार हो रहे इस 6-लेन ग्रीनफील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर से उत्तर भारत और पश्चिमी तट के बीच की तस्वीर को बदल देगा. व्यापार के लिहाज से भी यह प्रोजेक्ट चारों राज्यों के लिए गेम चेंजर साबित होने वाला है.
अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे पंजाब और गुजरात के बीच लाइफलाइन का काम करेगा. इन दोनों शहरों के बीच की दूरी फिलहाल 1430 किलोमीटर है, लेकिन इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यह दूरी घटकर 1316 किलोमीटर की रह जाएगी. फिलहाल दोनों शहरों के बीच पुरानी सड़क से सफर करने पर 26 घंटे तक का समय लग जाता है. क्योंकि 2 लेन मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव बहुत ज्यादा होता है. लेकिन यह 6लेन सड़क बनने के बाद समय आधा हो जाएगा. जहां अमृतसर से जामनगर की दूरी 13 घंटे में पूरी कर ली जाएगी. यह एक्सप्रेसवे पंजाब के कपूरथला जिले के टिब्बा गांव के पास से शुरू होगा, जो जामनगर के रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स के पास जाकर समाप्त होगा.
अमृतसर से जामनगर का सबसे ज्यादा लगभग 637 किलोमीटर का हिस्सा राजस्थान से ही गुजर रहा है. ऐसे में यहां तेजी से काम हो रहा है. हनुमानगढ़ से जालोर तक का हाईवे पूरी तरह से खोल दिया गया है. बताया जा रहा है कि एक्सप्रेसवे का 85 से 90 प्रतिशत का काम पूरा हो चुका है. फिलहाल पंजाब और गुजरात के कुछ हिस्सों में तेजी से फिनिशिंग हो रहा है, जिससे इस पूरे कॉरिडोर को दिसंबर 2026 में खोलने की प्लानिंग है.
पंजाब और गुजरात के बीच अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे से व्यापार तेज हो जाएगा. क्योंकि पंजाब का कृषि क्षेत्र एक तरह से गुजरात के पोर्ट-इकोसिस्टम को मजबूती देगा. ऐसे में यह प्रोजेक्ट पूरे उत्तर और पश्चिमी भारत के लिए अहम है. जबकि हरियाणा और राजस्थान के बीच भी यह कनेक्टिविटी को और मजबूत कर देगा. जिससे यह हाईवे एक दो नहीं बल्कि पूरे चार-चार राज्यों की लाइफलाइन बनने वाला है. जिससे चारों राज्यों के बीच की कनेक्टिविटी और मजबूत हो जाएगी.
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